वैज्ञानिकों ने बना ली 'Time Machine', समय को किया पीछे!

सदियों से चले आ रहे फिजिक्स के बेसिक लॉ को गलत बताते हुए रूस के कुछ वैज्ञानिकों ने टाइम मशीन बनाने का दावा किया है. हालांकि इसमें कई पेंच हैं.

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इस तस्वीर का इस खोज से कोई लेना देना नहीं है  (Representational Image) इस तस्वीर का इस खोज से कोई लेना देना नहीं है (Representational Image)

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

साइंस फिक्शन फिल्मों में टाइम मशीन तो देखी ही होगी जिसके जरिए लोग टाइम ट्रैवल कर लेते हैं. प्रेजेंट से फ्यूचर या प्रेजेंट से पास्ट में चले जाते हैं. साइंस की दुनिया में भी अब तक ये कल्पना की तरह ही है. लेकिन अभी एक ताजा डेवेलपमेंट में ऐसा ही कुछ हुआ है या यों कहें कि इससे मिलती जुलती कोई खोज की गई है.

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रूस के वैज्ञानिकों ने क्वॉन्टम कंप्यूटर के जरिए टाइम रिवर्सल का डेमोंस्ट्रेशन दिया है. अब ये ध्यान में रखें कि ऐसा असल में नहीं हुआ है, यानी किसी ने टाइम ट्रैवल नहीं किया है. वैज्ञानिकों ने एक डेमोंस्ट्रेशन(प्रदर्शन) किया है और हैरानी की बात ये है कि यह फिजिक्स के नियम के खिलाफ है.  

रूस के मॉस्को यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिक्स एंड टेक्नॉलजी के वैज्ञानिकों ने स्विट्जरलैंड और अमेरिकी रिसर्चर्स के साथ मिल कर एक ‘टाइम मशीन’ डेवेलप किया है. इसे बनाने के लिए क्वॉन्टम कंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया.

रूस के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसी टाइम मशीन तैयार की गई है जो समय को पीछे कर सकती है, लेकिन सिर्फ फ्रैक्शन ऑफ सेकंड्स, वो भी एक्सपेरिमेंट के तौर पर. असल जिंदगी में नहीं. ऐसा किया गया है क्वॉन्टम कंप्यूटर की मदद से. ये कथित टाइम मशीन पास्ट या फ्यूचर में नहीं ले जा सकती है, लेकिन यह आगे की शोध के लिए बड़ा ब्रेकथ्रू जैसा माना जा रहा है.

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ये नई शोध थर्मोडायनेमिक्स के दूसरे लॉ के विपरीत है. क्योंकि थर्मोडायनेमिक्स का दूसरा लॉ ये कहता है कि, इस युनिवर्स की चीजों का समय के साथ क्षय (खात्मा) होता रहता है. यहां तक की सूरज का भी. इसके उदाहरण कई सारे हैं जो आप दिन भर में देखते हैं. आपको बता दें कि इसी का पहला नियम ये कहता है कि एनर्जी ने तो क्रिएट की जा सकती है और न ही खत्म की जा सकती है, इसे सिर्फ ट्रांसफर किया जा सकता है.

MIPT प्रेस ऑफिस

रूस के इन वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने फिजिक्स के इस लॉ का खंडन कर दिया है और टाइम को पीछे कर दिया है.

डॉ. गॉर्डे लेज्विक मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स एंट टेक्नॉलजी के हेड हैं. उन्होंने कहा है, ‘हमने आर्टिफिशियली एक स्टेट तैयार किया है जो

टाइम के थर्मोडायनेमिक्स ऐरो के विपरीत दिशा में तैयार होता है’. उन्होंने यह भी कहा है कि ये सिरीज ऑफ पेपर्स थर्मोडायनेमिक्स के दूसरे लॉ का भी विरोध करता है.

क्या है क्वॉन्टम कंप्यूटर?

साफ शब्दों और कम समय में क्वॉन्टम कंप्यूटर को जानना है तो ऐसे समझें. आम कंप्यूटर में जितनी भी जानकारियां या आप डेटा कह लें, ये बिट्स में स्टोर होती हैं. 0 और 1 के तौर पर आप ऐसे भी समझ सकते हैं.

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क्वॉन्टम कंप्यूटर में बिट्स नहीं, बल्कि यहां क्यूबिट्स (क्वॉन्टम बिट्स) होते हैं और यही 0,1 के फॉर्म में होते हैं. आम कंप्यूटर में कंप्यूटिंग के लिए बाइनेरी कोड्स जैसे 0 या 1 के जरिए इनफॉर्मेशन को रिप्रेजेंट किया जाता है. जबकि क्वॉन्टम कंप्यूटिंग किसी इनफॉर्मेशन को दर्शाने के लिए Qubits यानी 0,1 और 1 और 1 दोनों के सुपरपोजिशन स्टेट का इस्तेमाल करता है.

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