जर्मनी ने फिर लहराया परचम... स्पेन को हराकर चौथी बार बना हॉकी वर्ल्ड चैम्पियन, पाकिस्तान की बराबरी की

स्पेन के खिलाफ खिताबी मुकाबले में जर्मन टीम के डिफेंडरों और गोलकीपर ने कमाल का खेल दिखाया. स्पेनिश खिलाड़ियों ने लगातार आक्रामण किए, लेकिन जर्मनी की टीम ने हर अटैक को नाकाम किया. जर्मनी के लिए मिचेल स्ट्रुथॉफ ने मैच का इकलौता गोल दागा.

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जर्मनी ने स्पेन को हराकर रच दिया इतिहास (Photo: AFP) जर्मनी ने स्पेन को हराकर रच दिया इतिहास (Photo: AFP)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • वाव्रे (बेल्जियम),
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:16 AM IST

जर्मनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एफआईएच मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया. 30 अगस्त (रविवार) को वाव्रे के बेल्फियस हॉकी एरिना में खेले गए फाइनल में जर्मनी ने स्पेन को 1-0 को हराया. जर्मनी ने लगातार दूसरी और कुल मिलाकर चौथी बार मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप जीता है. इसके साथ ही जर्मनी मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप की संयुक्त रूप से सबसे सफल टीम बन गई. पाकिस्तानी टीम भी चार बार ये टूर्नामेंट जीत चुकी है. जर्मनी की टीम इससे पहले कुआलालंपुर (2002), मोंचेंग्लादबाख (2006) और भुवनेश्वर (2023) में आयोजित मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप में चैम्पियन बनी थी. वहीं पाकिस्तान ने 1971, 1978, 1982 और 1994 में खिताब जीते. 

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विजेता का फैसला सिर्फ एक गोल से हुआ, लेकिन जर्मनी की रक्षापंक्ति ने जिस तरह स्पेन के हमलों को रोका, उसने उसे चैम्पियन बना दिया. फाइनल का पहला हाफ गोलरहित रहा. दोनों टीमों को पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन गोलकीपरों और डिफेंस ने किसी को बढ़त नहीं लेने दी. तीसरे क्वार्टर में स्पेन ने आक्रामक तेवर दिखाए और जर्मनी के गोलपोस्ट पर लगातार दबाव बनाया. उसने इस क्वार्टर में 10 हमले किए, लेकिन जर्मन खिलाड़ी हर बार रास्ते में खड़े नजर आए.

फिर 44वें मिनट में जर्मनी को वह मौका मिला जिसका उसे इंतजार था. दाएं फ्लैंक से आए शानदार मूव के बाद मिचेल स्ट्रुथॉफ ने गेंद को गोल में डिफ्लेक्ट कर दिया. स्पेन के गोलकीपर के अपनी जगह से हटने का जर्मनी ने पूरा फायदा उठाया और 1-0 की बढ़त हासिल कर ली. एक गोल से पिछड़ने के बाद स्पेन ने पूरी ताकत झोंक दी. अगले ही मिनट उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन कप्तान मार्क मिरालेस का ड्रैग फ्लिक जर्मनी के फर्स्ट रशर से टकरा गया.

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मैच के अंतिम चार मिनट में स्पेन ने बड़ा जोखिम उठाते हुए गोलकीपर लुइज कालजाडो को बाहर कर अतिरिक्त फील्ड खिलाड़ी उतार दिया. इसका मतलब था कि स्पेन को बराबरी के लिए हर हमला बेहद आक्रामक तरीके से करना था. जर्मनी ने हालांकि दबाव में अपना संयम नहीं खोया. अंतिम सीटी तक उसकी रक्षापंक्ति ने स्पेन को गोल करने का मौका नहीं दिया और टीम ने ट्रॉफी अपने नाम कर ली.

तीसरी बार फाइनल में हारा स्पेन
स्पेन ने सेमीफाइनल में सह-मेजबान नीदरलैंड्स को 4-3 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी. 1998 के बाद यह उसका पहला वर्ल्ड कप फाइनल था और कुल मिलाकर तीसरी बार वह खिताबी मुकाबले तक पहुंचा था. लेकिन जर्मनी के खिलाफ एक गोल की कमी ने उसका इंतजार और लंबा कर दिया. स्पेन अब भी मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप में अपने पहले खिताब की तलाश में है.

उधर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को 2-1 से हराया. टॉमस डोमेने ने 41वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर अर्जेंटीना को आगे किया. नीदरलैंड्स ने 49वें मिनट में फ्लोरिस मिडेंडॉर्प के गोल से बराबरी कर ली, लेकिन 59वें मिनट में अर्जेंटीना के कप्तान मथियास रे ने पेनल्टी कॉर्नर पर निर्णायक गोल दाग दिया. नीदरलैंड्स को अंतिम सेकंडों में लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह बराबरी नहीं कर सका. महिला वर्ग में अर्जेंटीना ने तीन बार की चैम्पियन नीदरलैंड्स को हराकर खिताब अपने नाम किया था.

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