'मेरा शरीर बदलेगा... क्योंकि मैं जिंदा हूं.'
सिर्फ एक लाइन... लेकिन इस एक वाक्य में दर्द भी था, आत्मविश्वास भी और उन लाखों महिलाओं की आवाज भी, जिन्हें कभी न कभी उनके शरीर के आधार पर आंका गया है.
क्रिस्टियानो रोनाल्डो की मंगेतर जॉर्जिना रोड्रिगेज एक बार फिर चर्चा में हैं. वजह कोई फैशन शो, रेड कार्पेट या लग्जरी लाइफ नहीं, बल्कि उनके शरीर को लेकर की गईं टिप्पणियां हैं. यॉट पर छुट्टियां बिताते हुए बिकिनी में उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. तस्वीरों से ज्यादा लोगों का ध्यान उनके शरीर पर गया. किसी ने उन्हें 'मोटी' कहा, तो किसी ने लिखा कि उनका ग्लैमर खत्म हो गया.
... लेकिन इस बार जॉर्जिना चुप नहीं रहीं.
'मोटी' कहे जाने का दर्द... पहली बार खुलकर सामने आया
दुनिया उन्हें करोड़ों फॉलोअर्स वाली सुपरमॉडल के तौर पर जानती है. लेकिन उस चमक-दमक के पीछे एक ऐसी महिला भी है, जो दूसरों की तरह शब्दों से आहत होती है.
जॉर्जिना ने लिखा कि ट्रोलिंग के बाद उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की हुई कि लोग उन्हें 'मोटी' कह रहे हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपनी छवि के दम पर करियर बनाती हैं, इसलिए ऐसी टिप्पणियां उन्हें परेशान कर गईं.
यह स्वीकार करना आसान नहीं था. सोशल मीडिया की दुनिया में सितारे अक्सर मजबूत दिखने की कोशिश करते हैं, लेकिन जॉर्जिना ने अपने डर को छिपाने के बजाय दुनिया के सामने रख दिया.
फिर रोनाल्डो ने कहा... जो हर महिला सुनना चाहेगी
जॉर्जिना ने अपना दर्द क्रिस्टियानो रोनाल्डो से साझा किया. उन्होंने कहा, 'लोग मुझे मोटी कह रहे हैं. मुझे डर लग रहा है, क्योंकि मेरी जिंदगी मेरी इमेज से जुड़ी है.'
रोनाल्डो का जवाब सिर्फ एक प्रेमी का जवाब नहीं था, बल्कि रिश्ते की असली ताकत भी दिखाता है.
उन्होंने कहा...
'तुम अपनी तस्वीरों से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व से पहचानी जाती हो. तुम एक बेहतरीन महिला हो, खूबसूरत हो, मां हो, सफल हो, अच्छी इंसान हो और प्यार से जिंदगी जीती हो. आखिर तुम्हें और क्या चाहिए?'
शायद यही वो शब्द थे, जिन्होंने जॉर्जिना को एहसास दिलाया कि दुनिया उन्हें जिस नजर से देखती है, उससे कहीं ज्यादा मायने उस इंसान की नजर रखती है, जो उन्हें सबसे करीब से जानता है.
'हर गर्मियों में मेरा शरीर ही खबर बन जाता है'
जॉर्जिना ने बताया कि यह पहली बार नहीं हुआ. हर साल गर्मियों में उनकी तस्वीरें वायरल होती हैं और फिर उनके शरीर पर बहस शुरू हो जाती है.
उन्होंने सवाल किया...
'आखिर यह तय कौन करता है कि परफेक्ट शरीर कैसा होना चाहिए? क्या आज भी हम मानते हैं कि खुशी का कोई साइज होता है?'
यह सवाल सिर्फ ट्रोल्स से नहीं, बल्कि उस सोच से है जो महिलाओं को हमेशा किसी तयशुदा पैमाने पर तौलती रहती है.
'... मुझे अपने कर्व्स से प्यार है'
जॉर्जिना ने साफ लिखा कि वह जिम वजन कम करने के लिए नहीं जातीं. उनके लिए जिम मानसिक शांति है, अनुशासन है, ऊर्जा है और खुद से प्यार करने का जरिया है. उन्होंने लिखा... 'मुझे अपने कर्व्स से प्यार है. यही शरीर मुझे मां बनने का सुख दे चुका है. यही शरीर मुझे गिरने के बाद फिर उठना सिखाता है. यह सम्मान और प्यार का हकदार है, चाहे इसका कोई भी रूप हो.'
जॉर्जिना दो बेटियों की मां हैं. उन्होंने लिखा कि वह चाहती हैं उनकी बेटियां कभी यह न सोचें कि उनकी कीमत उनके शरीर से तय होती है. उनके मुताबिक इंसान की असली पहचान उसका चरित्र, उसके संस्कार और उसका व्यवहार है, न कि कमर का नाप या वजन का आंकड़ा.
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पोस्ट के आखिर में जॉर्जिना ने सफलता की अपनी परिभाषा भी लिखी. उनके मुताबिक सफलता किसी काल्पनिक ब्यूटी स्टैंडर्ड में फिट होना नहीं है. सफलता है... अपने परिवार के साथ रहना, स्वस्थ रहना, हंसना, सीखना और सुकून के साथ जिंदगी जीना.
सोशल मीडिया के दौर में तस्वीरें कुछ सेकंड में वायरल हो जाती हैं और फैसले उससे भी तेज सुना दिए जाते हैं. किसी के वजन पर, किसी के रंग पर, किसी की उम्र पर. जॉर्जिना रोड्रिगेज का यह पोस्ट सिर्फ ट्रोल्स को जवाब नहीं है. यह उन लाखों महिलाओं के लिए संदेश है, जो हर दिन आईने से पहले समाज की नजरों का सामना करती हैं. और शायद इसलिए उनकी सबसे ताकतवर लाइन वही है, जिससे उन्होंने अपनी बात शुरू की थी- 'मेरा शरीर बदलेगा... क्योंकि मैं जिंदा हूं.'
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क