कभी बल्ले से मचाता था तहलका, अब मौलवी है ये पाकिस्तानी क्रिकेटर, भारत के खिलाफ खेली थी ऐतिहासिक पारी

बाएं हाथ के बैटर सईद अनवर का क्रिकेट करियर सिर्फ आंकड़ों की वजह से खास नहीं रहा. 194 रनों की ऐतिहासिक पारी, टेस्ट क्रिकेट में बड़ी इनिंग्स और खूबसूरत बल्लेबाजी ने उनके सफर को ऐसा बना दिया, जिसे पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे यादगार अध्यायों में गिना जाता है.

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भारत के खिलाफ खूब चमके सईद अनवर, 2003 वर्ल्ड कप में भी जड़ा था शतक. (Photo: Reuters) भारत के खिलाफ खूब चमके सईद अनवर, 2003 वर्ल्ड कप में भी जड़ा था शतक. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:12 AM IST

पाकिस्तानी टीम इस समय इंग्लैंड दौरे पर है, जहां उसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है. टीम ने लगातार दो टेस्ट मैच गंवाए हैं, जिसके चलते वो सीरीज में 0-2 से पिछड़ चुकी है. अब पाकिस्तानी टीम 9 सितंबर से होने वाले सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच को हर हाल में जीतना चाहेगी, ताकि क्लीन स्वीप की शर्मिंदगी से बचा जाए. एजबेस्टन टेस्ट मैच से पहले पाकिस्तानी टीम में बड़ी सर्जरी भी हुई है. सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया गया, जबकि कोचिंग स्टाफ में भी फेरबदल हुए.

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पाकिस्तानी टीम इस समय भले ही खराब दौर से गुजर रही है, लेकिन एक वक्त क्रिकेट जगत में उसकी भी तूती बोलती थी. पाकिस्तानी टीम में एक से बढ़कर एक क्रिकेटर्स हुआ करते थे. बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज सईद अनवर को कौन भूल सकता है, जिन्होंने अपने करियर में कई यादगार पारियां खेलीं. खूबसूरत टाइमिंग, शानदार प्लेसमेंट और शुरुआत से ही तेजी से रन बनाने की क्षमता उनकी पहचान थी.
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6 सितंबर (रविवार) को 58 साल के हुए सईद अनवर का इंटरनेशनल करियर 1990 से 2003 तक चला. पाकिस्तान के लिए उन्होंने टेस्ट और वनडे इंटरनेशनल दोनों में हजारों रन बनाए. अनवर ने 1997 में भारत के खिलाफ चेन्नई ओडीआई में 146 बॉल पर 194 रनों पारी खेली थी. उस समय यह ओडीआई क्रिकेट में किसी बल्लेबाज का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था. अनवर दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन सचिन तेंदुलकर की गेंद पर सौरव गांगुली के हाथों कैच आउट हो गए.

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दिलचस्प बात यह है कि सईद अनवर के इस रिकॉर्ड की बराबरी 2009 में जिम्बाब्वे के चार्ल्स कोवेंट्री ने नाबाद 194 रन बनाकर की. इसके बाद 2010 में भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 200 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और अनवर का रिकॉर्ड पीछे छूट गया.

टेस्ट में भी खूब बोला अनवर का बल्ला
वनडे इंटरनेशनल में तो सईद अनवर का बल्ला जमकर बोला ही, टेस्ट क्रिकेट में भी उन्होंने कई बड़ी पारियां खेलीं. खास बात यह रही कि उनकी कई बेहतरीन टेस्ट पारियां विदेशी जमीन पर आईं. 1994 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वेलिंगटन में उन्होंने 169 रन बनाए, जो उनका पहला टेस्ट शतक था. इसके दो साल बाद इंग्लैंड के खिलाफ द ओवल में उन्होंने 176 रनों की शानदार पारी खेली. 1998 में भारत के खिलाफ कोलकाता टेस्ट मैच में अनवर ने नाबाद 188 रन बनाए, जो टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर रहा. उनकी बल्लेबाजी में जबरदस्त आकर्षण था. वह गेंद को ताकत से मारने के बजाय टाइमिंग और प्लेसमेंट के दम पर चौके निकालने में माहिर थे.
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सईद अनवर ने पाकिस्तान के लिए 55 टेस्ट मैचों में 4,052 रन बनाए. उनका औसत 45.52 रहा और उन्होंने 11 शतक के अलावा 25 अर्धशतक जड़े. ओडीआई क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड और शानदार रहा. 247 ओडीआई मैचों में उनके नाम पर 8824 रन दर्ज हैं. इस दौरान उन्होंने 20 शतक और 43 अर्धशतक लगाए. वह ऑफ साइड में शानदार ड्राइव के लिए खास तौर पर मशहूर थे. गेंदबाज अगर ऑफ स्टम्प के बाहर थोड़ी भी जगह देता, तो अनवर उसे बाउंड्री तक पहुंचाने में देर नहीं करते थे. उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ एक खास तरह की खूबसूरती भी थी.

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सईद अनवर के टेस्ट करियर का अंत बेहद भावुक परिस्थितियों में हुआ. अगस्त 2001 में बांग्लादेश के खिलाफ मुल्तान टेस्ट में उन्होंने 101 रन बनाए. यह उनके टेस्ट करियर का 11वां और आखिरी शतक साबित हुआ. उस मुकाबले में पाकिस्तान ने पहली पारी में 546/3 का विशाल स्कोर बनाया था और टीम के पांच बल्लेबाजों ने शतक जड़े थे. एक पारी टेस्ट में पांच शतकों का अनोखा रिकॉर्ड पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के नाम संयुक्त रूप से दर्ज है. हालांकि अनवर के लिए यह मैच खुशी से ज्यादा दर्द लेकर आया.

बेटी की मौत ने बदली जिंदगी
मुल्तान टेस्ट में शतक लगाने के दो दिन बाद सईद अनवर की साढ़े तीन साल की बेटी बिस्माह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. बेटी की मौत की खबर के बाद अनवर लाहौर लौट गए. इस त्रासदी के बाद उन्होंने दोबारा टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला. वह क्रिकेट से कुछ समय के लिए दूर रहे और उनका जीवन भी पहले जैसा नहीं रहा. यही वजह है कि मुल्तान में बनाया गया 101 रन उनके करियर के सबसे यादगार और भावुक शतकों में शामिल हो गया.

बेटी को खोने के बाद सईद अनवर ने वनडे क्रिकेट में वापसी की और 2003 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ शतक लगाया. पाकिस्तान वो मुकाबला हार गया, लेकिन अनवर की पारी शानदार रही. उन्होंने अपना यह शतक बेटी बिस्माह को समर्पित किया था. यह पारी उनके इंटरनेशनल करियर के सबसे भावुक पलों में से एक बन गई.

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संन्यास के बाद धर्म की ओर झुकाव
सईद अनवर ने 15 अगस्त 2003 को इंटरनेशनल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास ले लिया. इसके बाद वह धार्मिक गतिविधियों से जुड़ गए और अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली. अनवर लगाताकर इस्लाम के प्रचार-प्रसार से संबंधित कार्यक्रमों में सक्रिय रहे. पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ के जीवन में भी अनवर की अहम भूमिका रही.

मोहम्मद यूसुफ ने 2004 में इस्लाम धर्म अपनाया था. उन्होंने बाद में बताया था कि धर्म परिवर्तन के दौरान सईद अनवर ने उनकी काफी मदद की थी. यूसुफ इस्लाम अपनाने से पहले यूसुफ योहाना के नाम से जाने जाते थे.

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