जब क्रिकेट की दुन‍िया में पहली बार आया स्पॉट फ‍िक्स‍िंग का ज‍िन्न, पाकिस्तान‍ियों ने करवाई थी अपनी बेइज्जती

क्रिकेट में फिक्सिंग का जिक्र आते ही कई पुराने मामले याद आते हैं. लेकिन साल 2010 के लॉर्ड्स टेस्ट मैच को कौन भूल सकता है जिसने स्पॉट फिक्सिंग को दुनिया के सामने एक नए और बेहद खतरनाक रूप में ला खड़ा किया. इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच खेले गए उस मुकाबले में कुछ ऐसी नो बॉल हुईं, जिनका जिक्र एक स्टिंग ऑपरेशन में किया जा चुका था.

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मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ ने पैसे लेकर फेंके थे नो-बॉल. (Photo: AFP) मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ ने पैसे लेकर फेंके थे नो-बॉल. (Photo: AFP)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • लंदन,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:04 AM IST

इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच अगस्त 2010 में खेला गया लॉर्ड्स टेस्ट मैच क्रिकेट के इतिहास के सबसे विवादित मुकाबलों में दर्ज है. उस टेस्ट मैच में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों ने ऐसा तूफान खड़ा किया, जिसने पाकिस्तान के तीन बड़े खिलाड़ियों के करियर पर गहरा असर डाला. मामले में सामने आई नो-बॉल की पहले से की गई भविष्यवाणी ने जांच एजेंसियों और क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया था.

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इस पूरे मामले की शुरुआत पाकिस्तान के प्लेयर एजेंट मजहर मजीद से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन से हुई. ब्रिटिश अखबार न्यूज ऑफ द वर्ल्ड (News of the World) ने टेस्ट मैच के चौथे दिन यानी 28 अगस्त 2010 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसके मुताबिक उस एजेंट ने पाकिस्तान के गेंदबाजों को मैच के खास मौकों पर नो बॉल फेंकने के लिए पैसे दिए थे.

मजहर मजीद ने 1.5 लाख पाउंड लेकर फिक्सिंग कराने का दावा किया था. उसने मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ का नाम लेते हुए कहा था कि दोनों गेंदबाज मैच के दौरान खास वक्त पर नो बॉल डालेंगे. उसके दावों में तत्कालीन कप्तान सलमान बट और विकेटकीपर बल्लेबाज कामरान अकमल के नाम भी सामने आए थे.

उसने कथित तौर पर कहा था कि मोहम्मद आमिर इंग्लैंड की पारी का पहला ओवर करेंगे और तीसरे ओवर की पहली गेंद नो बॉल डालेंगे. मैदान पर आमिर ने वास्तव में उस ओवर की पहली गेंद नो बॉल फेंकी, जो क्रीज से काफी आगे निकल गई थी. इसके बाद आसिफ की गेंदबाजी के दौरान भी 10वें ओवर की आखिरी गेंद पर नो बॉल हुई. लगातार सामने आए इन घटनाक्रमों ने आरोपों को और गंभीर बना दिया.

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लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन पाकिस्तान टीम के होटल में पुलिस पहुंची. ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) की एंटी करप्शन यूनिट ने भी मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की. उस दिन पाकिस्तान ने मैदान पर भी बेहद खराब प्रदर्शन किया था और तीसरे दिन उसके 14 विकेट गिर गए थे. मैच खत्म होने के कुछ ही समय बाद टीम बस भी होटल के लिए रवाना हो गई थी.

आसिफ-आमिर और कप्तान पर लगा बैन
जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद आईसीसी ने मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ और सलमान बट के खिलाफ कार्रवाई की. फरवरी 2011 में आमिर को पांच साल, आसिफ को सात साल और बट को 10 साल का प्रतिबंध मिला. इनमें से आसिफ और बट की सजा का कुछ हिस्सा निलंबित था, लेकिन तीनों सितंबर 2015 तक आधिकारिक क्रिकेट से दूर रहे.

इस मामले की सबसे दिलचस्प कड़ियों में से एक मोहम्मद आमिर की वापसी रही. 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और अपना कमबैक टेस्ट मैच लॉर्ड्स में ही खेला. यानी जिस मैदान पर नोबॉल विवाद ने उनके करियर को सबसे मुश्किल दौर में पहुंचाया था, उसी लॉर्ड्स में आमिर ने पाकिस्तान की टेस्ट टीम में दोबारा कदम रखा.

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