'पैसा-शोहरत सब बेकार है, असली जिंदगी तो...', हरभजन सिंह ने बताया अपनी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

पॉडकास्ट में भज्जी ने खुलकर बताया कि कैसे पिता बनने के बाद उनके जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव आया. हरभजन सिंह के मुताबिक परिवार से ऊपर कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि बिना परिवार के पैसा-शोहरत सब बेकार है.

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भज्जी ने खोला दिल का राज. (PHOTO: PTI) भज्जी ने खोला दिल का राज. (PHOTO: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने हाल ही में अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ जरूरी बातों का जिक्र किया. प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में हरभजन सिंह दिल खोलकर बात कही है. भज्जी ने बताया कि एक खिलाड़ी के लिए फिट रहना कितना जरूरी होता है.   

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल पूर्व स्पिन गेंदबाजों में शुमार हरभजन सिंह का अंदाज फैन्स को हमेशा से पसंद आया है. भज्जी मैदान पर अपने तीखे तेवरों और अटैकिंग एटीट्यूड के साथ-साथ हर हाल में मैच जीतने की सनक के लिए जाने जाते हैं.

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हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान हरभजन सिंह ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े यू-टर्न का जिक्र किया, जिसने उनके पूरे स्वभाव को ही बदलकर रख दिया. हरभजन सिंह ने कहा कि मैं खुशकिस्मत रहा कि मैंने उस समय क्रिकेट खेला जब बल्ले और गेंद के बीच लड़ाई देखने को मिलती थी.

इसके अलावा हरभजन सिंह ने अपने जीवन के सबसे भावुक लम्हे को याद करते हुए बताया कि मैदान पर वह एक अलग इंसान थे. ड्रेसिंग रूम के बाहर एक मस्ती करने वाले दोस्त थे. लेकिन पिता बनने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया. 

अचानक बदला भज्जी का सोचने का अंदाज

भज्जी ने कहा कि जब मेरी बेटी का जन्म हुआ तो मैं अंदर से बहुत शांत हो गया. अचानक से मेरा स्वभाव ऐसा हो गया कि अब किसी बात का कोई मतलब ही नहीं लगता. अब मुझे लगता है कि बस मेरी बेटी, मेरा बेटा, मेरी पत्नी, मेरी मां और बहनें ही मेरी दुनिया हैं. इसके अलावा बाकी सब व्यर्थ है.

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उन्होंने आगे कहा कि जब आप उस छोटे से बच्चे को अपनी बाहों में थामते हैं तब एहसास होता है कि असल जिंदगी तो यही है. पैसा, शोहरत और काम सब अस्थायी चीजें हैं, असली प्राथमिकता आपका परिवार ही होना चाहिए.

वर्ल्ड चैम्पियनशिप ऑफ लेजेंड्स (WCL) में दोबारा मैदान पर उतरने को लेकर भी हरभजन ने अपने दिल की बात शेयर की. उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के बाद दोबारा मैदान पर उतरना आसान नहीं होता, घुटनों में अब वो पहले जैसी ताकत नहीं रही, लेकिन खेल के प्रति उनका प्यार कभी कम नहीं हो सकता.

भज्जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि जब मैं दोबारा मैदान में उतरता हूं, तो शरीर भले ही 40 साल का हो चुका हो, लेकिन दिमाग आज भी वही 20 साल वाले युवा की तरह सोचता है कि बल्लेबाज को कैसे आउट करना है. 

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