गॉल में भारत ने अपने 600वें टेस्ट मैच को सिर्फ जीत के साथ नहीं, बल्कि एक बेहद खास संदेश के साथ यादगार बना दिया. श्रीलंका को 165 रनों से हराकर भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली. लेकिन इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी कहानी स्कोरबोर्ड पर दर्ज 165 रनों से जीत नहीं, बल्कि 24 साल के बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार की 10 विकेट वाली सनसनी है.
अपने दूसरे ही टेस्ट में सुथार ने मैच में 10 विकेट झटककर बता दिया कि टेस्ट क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की उपयोगिता सिर्फ उसकी बल्लेबाजी की क्षमता से तय नहीं होती और शायद गॉल टेस्ट की सबसे बड़ी सीख भी यही है.
8वें नंबर की ‘बल्लेबाजी’ का मोह कितना जरूरी?
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में एक बहस लगातार चलती रही है- टीम में नंबर-8 तक बल्लेबाजी की गहराई होनी चाहिए. यानी ऐसा खिलाड़ी जो गेंदबाजी भी कर सके और जरूरत पड़ने पर बल्ले से रन भी बना दे.
यह सोच गलत नहीं है. आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में ऑलराउंडर टीम को संतुलन देते हैं, लेकिन गॉल में भारत ने एक अलग तरह का संतुलन दिखाया- सिर्फ सात बल्लेबाजों के साथ टेस्ट जीतकर. यही इस जीत का सबसे दिलचस्प पहलू है.
अगर भारत नंबर-8 तक बल्लेबाजी मजबूत करने के जुनून में किसी ऑलराउंडर को खिलाने की कोशिश करता, तो संभव है कि टीम संयोजन में मानव सुथार के लिए जगह ही न बनती. तब भारतीय टीम के पास एक ऐसा खिलाड़ी होता जो कुछ रन ज्यादा दिला सकता था, लेकिन शायद वही 10 विकेट नहीं मिलते जिनके दम पर भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से शिकस्त दी.
क्रिकेट में कई बार आंकड़े बहुत सीधी भाषा में फैसला सुनाते हैं. सुथार ने नंबर-8 पर रन बनाकर नहीं, विकेट लेकर भारत को मैच जिताया.
10 विकेट ने बदल दी कहानी
सुथार ने पहली पारी में 4 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी को झटका दिया और दूसरी पारी में 6 विकेट चटकाकर मेजबान टीम की उम्मीदें खत्म कर दीं. मैच में उनके 10 विकेट इस बात का प्रमाण हैं कि एक विशेषज्ञ गेंदबाज का प्रभाव सिर्फ गेंदबाजी के आंकड़ों में नहीं, बल्कि पूरे मैच के नतीजे में दिखाई देता है.
दूसरे टेस्ट में ही 10 विकेट लेना किसी भी युवा गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि है. सुथार के लिए यह सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह का दावा भी है.
और यही वह जगह है जहां गॉल टेस्ट का संदेश थोड़ा बड़ा हो जाता है. टेस्ट क्रिकेट में हर खिलाड़ी को बल्लेबाज बनाने की जरूरत नहीं.
एक टीम में हर खिलाड़ी से बल्लेबाजी की उम्मीद करना सुनने में आकर्षक लगता है. लेकिन अगर इसका मतलब यह हो कि आप किसी विशेषज्ञ गेंदबाज की जगह एक अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प चुन लें, तो फैसला हमेशा उतना आसान नहीं होता.
गॉल में भारत के पास सात बल्लेबाज थे, लेकिन उसके पास ऐसे गेंदबाज थे जो मैच जिताने की क्षमता रखते थे. सुथार उनमें सबसे चमकदार रहे.यह जीत बताती है कि टीम का संतुलन केवल बल्लेबाजी की लंबाई से नहीं, विकेट लेने की क्षमता से भी तय होता है.
आखिर टेस्ट मैच जीतने के लिए 20 विकेट चाहिए और गॉल में भारत को वही 20 विकेट हासिल हुए.
सुथार के लिए इससे बेहतर मंच नहीं हो सकता था
भारत के 600वें टेस्ट में सुथार का 10 विकेट लेना कहानी को और खास बना देता है. यह ऐसा प्रदर्शन है जिसे सिर्फ ‘एक युवा स्पिनर का शानदार मैच’ कहकर खत्म नहीं किया जा सकता.
यह उस चयन सोच की भी जीत है जिसमें किसी खिलाड़ी की असली ताकत पर भरोसा किया जाता है. सुथार को टीम में सिर्फ इसलिए नहीं होना चाहिए कि वह 8वें नंबर पर कुछ रन बना सकता है. उन्हें इसलिए होना चाहिए क्योंकि वह विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं.
गॉल में उन्होंने ठीक यही किया. भारत ने 600वां टेस्ट जीता, सीरीज में बढ़त बनाई और एक संभावित टेस्ट स्टार को दुनिया के सामने ला दिया.
...और इस ऐतिहासिक जीत की सबसे खूबसूरत विडंबना यही है- जिस नंबर-8 पर अतिरिक्त बल्लेबाजी की तलाश की जा रही थी, उसी नंबर-8 ने बल्ले से नहीं, गेंद से भारत की जीत की कहानी लिख दी.
गॉल का फैसला साफ है- टेस्ट टीम में 8वां बल्लेबाज होना अच्छा है, लेकिन 10 विकेट लेने वाला गेंदबाज होना उससे कहीं ज्यादा कीमती है.
विश्व मोहन मिश्र