जीवन की रसायन का 100 साल पुराना रहस्य सुलझाने वाले वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री का नोबेल

2026 का रसायन नोबेल हेनरी कागन और केंसो सोआई को मिला. उन्होंने बताया कि अणुओं का एक तरफा रूप कैसे बनता है. इससे दवा बनाने में मदद मिलेगी. जीवन की रसायन का पुराना रहस्य सुलझा.

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ये हैं केमिस्ट्री के नोबेल विजेता हेनरी कागन और केंसो सोआई. (Photo:X/@Nobelprize) ये हैं केमिस्ट्री के नोबेल विजेता हेनरी कागन और केंसो सोआई. (Photo:X/@Nobelprize)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST

स्वीडन की रॉयल एकेडमी ने 2026 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दो वैज्ञानिकों को दिया है. फ्रांस के हेनरी बी. कागन और जापान के केंसो सोआई. उन्हें यह इनाम इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने एक बहुत पुरानी पहेली का जवाब ढूंढ लिया. कुछ अणु दो तरह के होते हैं. एक बाएं हाथ जैसा, दूसरा दाएं हाथ जैसा. दोनों आईने में एक-दूसरे जैसे दिखते हैं. लेकिन हमारे शरीर में सिर्फ एक तरह का अणु काम करता है. दूसरा नहीं. वैज्ञानिक लंबे समय से सोचते थे कि प्रकृति ने सिर्फ एक को कैसे चुना.

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हमारे शरीर की हर चीज- खून, मांस, प्रोटीन - एक ही तरह के अणु से बनी है. इसे वैज्ञानिक भाषा में होमोचिरैलिटी कहते हैं. मतलब एक ही हाथ वाला. अमीनो एसिड नाम के अणु प्रोटीन बनाते हैं. ये दो रूपों में होते हैं, लेकिन शरीर में सिर्फ एक रूप ही मिलता है. दूसरा रूप प्रकृति में बहुत कम दिखता है. जब वैज्ञानिक प्रयोगशाला में ये अणु बनाते तो दोनों रूप बराबर मात्रा में बन जाते. दवा बनाने वाले लोग परेशान थे क्योंकि दवा में सिर्फ एक रूप ही असर करता है. दूसरा रूप बेकार या नुकसानदायक हो सकता है.

कागन-सोआई की खोज

1986 में हेनरी कागन ने एक नया तरीका निकाला. उन्होंने रसायन की प्रतिक्रिया को ऐसे चलाया कि एक रूप दूसरे से ज्यादा बनने लगा. पहले वैज्ञानिक सोचते थे कि दोनों हमेशा बराबर बनेंगे. कागन ने दिखाया कि छोटी सी शुरुआत भी बड़ा फर्क ला सकती है. इससे एक तरफा अणु बनाना आसान हो गया.

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केंसो सोआई ने 1995 में एक खास प्रतिक्रिया बनाई. 2003 में उन्होंने सफलता पाई. उन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया चलाई जिसमें सिर्फ एक ही रूप बना. दूसरा बिल्कुल नहीं. जीवन के अलावा पहले कभी कोई यह नहीं कर पाया था. उनकी तरकीब में प्रतिक्रिया का नतीजा खुद मदद करता है. जैसे एक बीज से पौधा बढ़े और और बीज बनाए. इससे एक तरफा अणु अपने आप बढ़ते चले जाते हैं.

दवा और आम जीवन पर फायदा

नोबेल समिति ने कहा कि इन दोनों ने सदी पुरानी पहेली सुलझा दी. अब वैज्ञानिक दवा बनाते समय सही अणु चुन सकते हैं. कई दवाओं में गलत रूप शरीर में असर नहीं करता. सही रूप से दवा सस्ती और असरदार बनेगी. कैंसर, संक्रमण और दूसरी बीमारियों की दवाओं में यह काम आएगा.

यह खोज सिर्फ लैब की बात नहीं. यह बताती है कि प्रकृति ने जीवन की शुरुआत कैसे की होगी. छोटे से शुरू होकर एक तरफा रास्ता कैसे चुना गया. कागन और सोआई के काम से रसायनज्ञ अब बेहतर तरीके से अणु बना सकते हैं. आम आदमी के लिए इसका मतलब है- बेहतर और सुरक्षित दवाएं. विज्ञान की यह जीत रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएगी.

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