अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कार्ल डाइसरॉथ के लिए 5 अक्टूबर का दिन जिंदगी भर के लिए बेहद अहम बन गया. खबर मिली की उन्हें 2026 के फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाएगा. खुशखबरी मिलते ही घर में खुशी की लहर दौड़ गई, बच्चों ने अपने पिता को गले लगाया और उन्हें बधाइयां दी.
इस ऐतिहासिक पल को पूरे परिवार ने साथ जिया. हालांकि खुशी के पल के बाद कार्ल फिर से बच्चों के लिए टिफिन बनाने में जुट गए. डाइसरॉथ ने नोबेल जीतने की खबर सबसे पहले अपने परिवार के साथ साझा की.
कार्ल डाइसरॉथ को यह सम्मान जर्मनी के वैज्ञानिक पीटर हेगेमन और जॉर्ज नागेल के साथ मिला है. तीनों को ऑप्टोजेनेटिक्स के विकास में उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है. सीधी भाषा में समझें तो इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक रोशनी का इस्तेमाल करके दिमाग की खास नर्व सेल्स को चालू या बंद कर सकते हैं.
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इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दिमाग की अलग-अलग कोशिकाएं व्यवहार, भावनाओं और बीमारियों को कैसे प्रभावित करती हैं. इस खोज ने ब्रेन साइंस को समझने का तरीका बदल दिया है. इसका इस्तेमाल पार्किंसन और डिप्रेशन जैसी स्थितियों पर रिसर्च में भी किया गया है और आगे इसके कई मेडिकल इस्तेमाल की संभावनाएं देखी जा रही हैं.
'अभी बहुत कुछ खोजना बाकी'
इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद जब डाइसरॉथ से सवाल पूछा गया कि वह इसे कैसे सेलिब्रेट करेंगे, तो उन्होंने का कि वह वापस काम पर लौटना चाहते हैं. उनका कहना है कि अभी बहुत कुछ खोजना बाकी है और बहुत से लोगों की मदद करनी है. अब सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों के तमाम तरह के रिएक्शन सामने आ रहे हैं. नोबल जैसा बड़ा सम्मान मिलने के बावजूद कार्ल की सादगी लोगों का दिल जीत रही है.
आजतक साइंस डेस्क