जितना बताया गया था उससे छोटा निकला सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह

नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति ग्रह का अब तक का सबसे सटीक माप लिया. भूमध्य रेखा पर व्यास 1,42,976 किमी निकला, जो पुराने अनुमान से 8 किमी छोटा है. ध्रुवों के बीच व्यास 1,33,684 किमी यानी पहले से 24 किमी कम. ग्रह पहले थोड़ा ज्यादा चपटा है. यह खोज ग्रह के अंदरूनी ढांचे और सौरमंडल के निर्माण को समझने में मदद करेगी.

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जितना बताया गया था उससे छोटा निकला बृहस्पति ग्रह. (Photo: NASA) जितना बताया गया था उससे छोटा निकला बृहस्पति ग्रह. (Photo: NASA)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (जूपिटर) पहले के अनुमान से थोड़ा छोटा निकला है. नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने अब तक का सबसे सटीक माप लिया है, जिससे पता चला कि इसका आकार और आकृति पहले बताए गए साइज से कुछ अलग है. यह जानकारी ग्रह के अंदरूनी ढांचे को समझने और सौरमंडल के निर्माण की कहानी जानने में बहुत मदद करेगी.

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नए माप क्या कहते हैं?

  • भूमध्य रेखा पर व्यास (इक्वेटोरियल डायमीटर): 1,42,976 किलोमीटर – पहले के माप से करीब 8 किलोमीटर छोटा.
  • उत्तर-दक्षिण ध्रुवों के बीच व्यास (पोलर डायमीटर): 1,33,684 किलोमीटर – पहले के अनुमान से करीब 24 किलोमीटर छोटा.

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बृहस्पति पूरी तरह गोल नहीं है, बल्कि थोड़ा चपटा (फ्लैट) है. नए आंकड़ों से पता चला कि यह पहले सोचे से थोड़ा ज्यादा चपटा है. इसका भूमध्य रेखा वाला हिस्सा ध्रुवों से करीब 7% बड़ा है. तुलना के लिए, पृथ्वी का भूमध्य रेखा वाला हिस्सा ध्रुवों से सिर्फ 0.33% बड़ा है.

पुराने माप कैसे हुए थे?

पिछले माप 1970 के दशक में नासा के वॉयेजर और पायनियर यानों से लिए गए थे. जूनो यान 2011 में लॉन्च हुआ. 2016 से बृहस्पति की कक्षा में चक्कर लगा रहा है. 2021 में इसके मिशन को बढ़ाया गया, जिससे ऐसे विशेष जांच संभव हुए.

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माप कैसे लिया गया?

जब जूनो पृथ्वी के नजरिए से बृहस्पति के पीछे चला गया, तब उसके रेडियो सिग्नल ग्रह के वायुमंडल से गुजरकर पृथ्वी तक पहुंचे. सिग्नल में आए बदलाव से वैज्ञानिकों ने वायुमंडल की संरचना, घनत्व और तापमान का पता लगाया. इससे ग्रह का सटीक आकार और आकृति मालूम हुई.

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इज़राइल के वीजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिक एली गलांती ने कहा कि यह स्थिति जूनो के मुख्य मिशन में नहीं आई थी, इसलिए ये प्रयोग पहले से प्लान नहीं थे. यह अध्ययन हाल ही में जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुआ है.

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है – इसमें सभी बाकी ग्रह समा सकते हैं. पृथ्वी से 1300 गुना बड़ा है. यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है.गलांती ने बताया कि बृहस्पति सौरमंडल में सबसे ज्यादा मास रखता है. इसका निर्माण और संरचना समझने से पता चलेगा कि सौरमंडल कैसे बना और विकसित हुआ.

बृहस्पति ने शुरुआती दौर में अन्य ग्रहों के विकास और आंतरिक ग्रहों (जैसे पृथ्वी) तक पानी, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी अस्थिर पदार्थों की आपूर्ति को प्रभावित किया. ये पदार्थ पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी थे. जूनो यान बृहस्पति के वायुमंडल, अंदरूनी ढांचे, चुंबकीय क्षेत्र और मैग्नेटोस्फियर की जानकारी जुटा रहा है.

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