अस्पताल हिल रहा था, बिजली गुल थी… फिर भी डॉक्टरों ने कराई डिलीवरी, भूकंप के बीच पैदा हुई 'जेम्पिता'

इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बीच एक महिला की डिलीवरी हुई. बिजली गुल होने पर डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में सर्जरी की. 1.3 किलो की बच्ची पैदा हुई, जिसका नाम भूकंप के नाम पर 'जेम्पिता' रखा गया.

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इंडोनेशिया में भूकंप के दौरान पैदा हुई बच्ची जेम्पिता सोनी वोना. (Photo: Reuters) इंडोनेशिया में भूकंप के दौरान पैदा हुई बच्ची जेम्पिता सोनी वोना. (Photo: Reuters)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

इंडोनेशिया के ईस्ट नुसा तेंगारा इलाके में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया. इसी दौरान 39 साल की मारिया फ्लोरिडा नोगो केलेन की अचानक डिलीवरी कराने की जरूरत पड़ गई. मारिया की प्रेग्नेंसी में पहले से परेशानी थी, इसलिए डॉक्टरों ने बच्चे को करीब दो महीने पहले ही निकालने का फैसला किया. भूकंप के झटकों से अस्पताल की इमारत हिल रही थी और बिजली भी बार-बार जा रही थी. ऐसे में डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करके बच्ची को जन्म दिलाया.

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मारिया नगेकेओ इलाके में रहती हैं, जो भूकंप के केंद्र के पास है. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर डिलीवरी में देर होती तो मारिया की हालत बहुत गंभीर हो सकती थी. उन्हें जानलेवा दौरा पड़ने का खतरा था. इसलिए डॉक्टरों ने भूकंप के बीच ही तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला किया. बच्ची का जन्म सिर्फ 1.3 किलो वजन के साथ हुआ. उसका नाम जेम्पिता रखा गया, जो इंडोनेशियाई शब्द जेम्पा से बना है. जेम्पा का मतलब भूकंप होता है.

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बिजली गई तो टॉर्च से किया ऑपरेशन

मारिया की डॉक्टर योना सारा पारदेड़े ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में बिजली की समस्या थी. बिजली जाने पर डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी से काम जारी रखा. इसी दौरान भूकंप के झटके भी महसूस हो रहे थे और अस्पताल की इमारत हिल रही थी.

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डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्ची को लेकर थी. वह समय से करीब दो महीने पहले पैदा हो रही थी और उसका वजन भी बहुत कम था. डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर भी नहीं था. इसके बावजूद डॉक्टरों ने ऑपरेशन पूरा किया.

1.3 किलो की बच्ची को टेंट में रखा

जेम्पिता का वजन जन्म के समय सिर्फ 1.3 किलो था. वह समय से पहले पैदा हुई थी, इसलिए उसे खास देखभाल की जरूरत थी. जन्म के बाद उसे इनक्यूबेटर में रखा गया. भूकंप के बाद अस्पताल के अंदर रहना सुरक्षित नहीं था. इसलिए बच्ची का इनक्यूबेटर बाहर लगाए गए एक टेंट में रखा गया. 

डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी करते रहे और जन्म के बाद बच्ची की हालत स्थिर रही. डिलीवरी के बाद मारिया को ज्यादा खून बहने की समस्या भी हुई. डॉक्टरों ने उनका इलाज किया और उनकी हालत संभाली.

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भूकंप में 54 लोगों की मौत

ईस्ट नुसा तेंगारा में आए इस भूकंप में अब तक 54 लोगों की मौत हो चुकी है. कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है. कई अस्पताल भी भूकंप से प्रभावित हुए हैं.

भूकंप के बाद कई डॉक्टरों और मेडिकल टीमों ने अस्पतालों के बाहर टेंट लगाकर घायलों का इलाज किया. लोग आफ्टरशॉक्स के डर से घरों में वापस जाने से बच रहे हैं. कई इलाकों में लोगों को साफ पानी और खाने की जरूरत भी है.

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मारिया ने डॉक्टरों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें डर नहीं लगा. वह अपने बच्चों के लिए स्वस्थ रहना चाहती थीं और उन्हें खुशी है कि डॉक्टरों ने मुश्किल हालात में भी उनका साथ नहीं छोड़ा.

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