गुजरात में मॉनसून की सक्रियता फिर से बढ़ गई है. अहमदाबाद समेत राज्य के कई हिस्सों में सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. काले बादलों की वजह से शहर के अधिकांश इलाकों में अंधेरा छाया हुआ है. मौसम विभाग ने द्वारका, जामनगर, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, भरूच, सूरत और नवसारी जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
वहीं अहमदाबाद, कच्छ, मोरबी, सुरेंद्रनगर, आनंद, राजकोट, बोटाद, अमरेली, भावनगर, नर्मदा, तापी, डांग और वलसाड में यलो अलर्ट है. अब तक इस सीजन में गुजरात में औसत से 80 प्रतिशत से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है.
दक्षिण गुजरात में यह आंकड़ा 110 प्रतिशत तक पहुंच गया है जबकि कच्छ में सिर्फ 30 प्रतिशत बारिश हुई है. राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटों में 33 जिलों के 240 तालुकों में बारिश हुई. अहमदाबाद में जलभराव के कारण एक स्कूल बस और निजी कार गड्ढे में फंस गईं.
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बारिश की वजह से अहमदाबाद समेत कई शहरों में सड़कों पर पानी भर गया है. कमजोर जगहों पर आवागमन प्रभावित हो रहा है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. दक्षिण और सौराष्ट्र के कुछ हिस्सों में और तेज बारिश की संभावना है. प्रशासन जल निकासी के काम में जुटा है ताकि शहरों में परेशानी कम हो.
बारिश के पीछे वैज्ञानिक कारण
इस भारी बारिश का मुख्य वैज्ञानिक कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का सक्रिय रहना और एक कम दबाव का क्षेत्र है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और उत्तर विदर्भ के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब दक्षिण-पूर्व राजस्थान और आसपास के गुजरात की ओर बढ़ गया है.
इसके साथ जुड़ी चक्रवाती हवाओं का घेरा लगभग 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है. मॉनसून ट्रफ भी नालिया से होते हुए इस कम दबाव वाले क्षेत्र से गुजर रही है और आगे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक फैली है. अरब सागर से आने वाली नम हवाएं इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर खिंच रही हैं.
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जब नम हवाएं ऊपर उठती हैं तो ठंडी होकर बादल बनाती हैं और भारी वर्षा होती है. सितंबर का महीना मॉनसून के अंतिम चरण का होता है. इस समय अक्सर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बने निम्न दबाव के क्षेत्र पश्चिम की ओर बढ़ते हैं. गुजरात में सक्रिय बारिश लाते हैं.
स्थानीय स्तर पर मिट्टी की नमी और ऊपरी वायुमंडल की अस्थिरता भी बारिश को तीव्र बना रही है. जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी भारत में भारी बारिश की घटनाएं पिछले कुछ दशकों में बढ़ी हैं क्योंकि समुद्र का तापमान बढ़ने से नमी ज्यादा उपलब्ध हो जाती है.
कहां हुई कितनी बारिश और असर
दक्षिण गुजरात में सबसे ज्यादा बारिश हुई है क्योंकि वहां मॉनसून की धारा ज्यादा सक्रिय रहती है. कच्छ में कम बारिश इसलिए है क्योंकि वह क्षेत्र अपेक्षाकृत शुष्क है और नमी वहां तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती. अहमदाबाद जैसे शहरों में जलभराव की समस्या इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि शहरीकरण के कारण प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं.
स्कूल बस और कार के फंसने जैसी घटनाएं इसी जलभराव का नतीजा हैं. किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है लेकिन अतिवृष्टि से नुकसान का खतरा भी बना रहता है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों तक बारिश की गतिविधि जारी रह सकती है.
कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. नागरिकों को मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए. प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था मजबूत रखने और आपात सेवाओं को तैयार रखने की जरूरत है. कुल मिलाकर यह बारिश मॉनसून की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है लेकिन स्थानीय और बड़े पैमाने की मौसमी प्रणालियों के मेल से यह तीव्र रूप ले रही है. सतर्क रहकर ही इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है.
आजतक साइंस डेस्क