अर्नब का कहर... ओडिशा में दर्जनों गांव डूबे, लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी

चक्रवात अर्नब के बाद ओडिशा के गंजम और गजपति में भारी बारिश से गांव जलमग्न हो गए हैं. 2000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं. हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट की तैयारी है. नदियां उफान पर हैं. ट्रेन सेवाएं ठप हैं.

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साइक्लोन अर्नब की वजह से ओडिशा के गंजम और गजपति जिले के कई गांव बाढ़ में डूबे हैं. (Photo: PTI) साइक्लोन अर्नब की वजह से ओडिशा के गंजम और गजपति जिले के कई गांव बाढ़ में डूबे हैं. (Photo: PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:45 PM IST

चक्रवात अर्नब के गुजरने के बाद ओडिशा के तटीय और पहाड़ी जिलों में लगातार भारी बारिश ने गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है. गंजम और गजपति जिलों के कई गांव पानी में घिर गए हैं. हजारों लोग घरों में फंस गए हैं. राज्य सरकार ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई है. 

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मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि केंद्र के गृह मंत्रालय से संपर्क कर कोस्ट गार्ड का हेलिकॉप्टर मंगाने की प्रक्रिया चल रही है. बारिश अब भी जारी है और बादल काफी नीचे हैं, इसलिए हेलिकॉप्टर उड़ान भरने से पहले स्थिति का आकलन किया जा रहा है. इस बीच ओडीआरएफ की टीमें नावों से लोगों को निकालने का काम कर रही हैं.

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गांवों में बाढ़ और फंसे लोग

गंजम जिले के धरकोट, सनाखेमुंडी, सुराडा और पत्रपुर ब्लॉकों के कई गांव पूरी तरह पानी से घिर गए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दो हजार से ज्यादा लोग इन क्षेत्रों में फंसे हुए हैं. धरकोट क्षेत्र के चार जगहों से करीब 120 लोगों को हेलिकॉप्टर से निकालने की तैयारी की गई है. 

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वरिष्ठ जिला प्रशासन अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं. मुख्य सचिव ने कहा कि अतिरिक्त ओडीआरएफ टीमें गंजम भेजी जा रही हैं ताकि राहत और बचाव कार्य तेज किए जा सकें. मौसम विभाग के अनुसार पत्रपुर ब्लॉक में पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा 546.6 मिलीमीटर बारिश हुई है. सुराडा, सनाखेमुंडी और रंगेलुंडा जैसे अन्य ब्लॉकों में भी 200 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है.

नदियों का उफान और शहर में जलभराव

गंजम की रुशिकुल्या और बहुदा नदियां तथा गजपति की वामसाधारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. कई जगहों पर ये नदियां उफान पर हैं. प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है. किसानों की खड़ी धान की फसलें भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हो गई हैं. पानी उतरने के बाद नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा और राज्य सरकार मुआवजा देगी. बेहरामपुर शहर में भी कई इलाकों में पानी भर गया है. 

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घरों में पानी घुस गया है और लोग पूरी तरह कट गए हैं. प्रशासन ने नावें तैनात कर लोगों को निकालने का काम शुरू कर दिया है. यह स्थिति चक्रवात के बाद होने वाली लगातार बारिश का नतीजा है, जो तटीय इलाकों में आम है लेकिन इस बार तीव्रता ज्यादा देखने को मिली.

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रेल सेवाएं प्रभावित

आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच ट्रेन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं. चेन्नई-हावड़ा रूट पर इच्छपुरम और झडुपुडी स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक और पुल पानी में डूब गए हैं. ओडिशा के मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली है. लंबी दूरी के यात्रियों को निकटतम स्टेशनों पर उतारने और वहां खाना, पानी तथा शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं. सड़क मार्ग से लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजने के लिए वाहनों का इंतजाम किया जा रहा है.

केंद्र और राज्य की तैयारियां

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बात की. उन्होंने राज्य को हर संभव मदद का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से जान बचाने, प्रभावित परिवारों की मदद करने तथा राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के काम तेज किए जाएंगे. राज्य प्रशासन राहत शिविरों की व्यवस्था कर रहा है और फंसे लोगों को निकालने पर पूरा फोकस है.

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यह घटना चक्रवात के बाद होने वाली बारिश के खतरे को फिर से उजागर करती है. ओडिशा जैसे तटीय राज्य में चक्रवात आना आम बात है, लेकिन उसके बाद की लगातार बारिश बाढ़ का रूप ले लेती है. नदियां उफान पर आ जाती हैं, गांव कट जाते हैं और फसलें बर्बाद हो जाती हैं. 

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वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं की तीव्रता बढ़ रही है. इसलिए समय पर चेतावनी, मजबूत बचाव दल और बेहतर जल निकासी व्यवस्था जरूरी है. फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने पर है. पानी उतरने के बाद फसल नुकसान का आकलन और मुआवजा प्रक्रिया शुरू होगी. लोगों से अपील है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और खतरे वाले क्षेत्रों से दूर रहें.

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