रविवार शाम 1 नवंबर को फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच के पास एक छोटे जेट विमान लियरजेट 60 के साथ जो हुआ, उससे सबकी चिंता बढ़ गई है. मौसम की हालत इसमें बड़ा कारण लग रही है. जांच एजेंसी एनटीएसबी अभी पूरी जांच करेगी, लेकिन अभी जो मौसम और उड़ान की जानकारी उपलब्ध है, उससे काफी कुछ समझ में आ रहा है.
दोपहर करीब 12:47-12:48 बजे विमान रॉयल पाम बीच, लोक्साहाची ग्रोव्स और वेस्टलेक इलाके के ऊपर से गुजरा. यह जगह पाम बीच से करीब 13 km पश्चिम में है. उसी समय वहां एक तेज आंधी-तूफान वाला बादल बन रहा था. धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ रहा था. कंट्रोल टीम ने पायलटों को बाएं-दाएं मुड़ने की इजाजत दी थी क्योंकि दक्षिण-पूर्व में मध्यम बारिश बताई जा रही थी. कंट्रोल टीम ने मौसम को काफी खराब बताया था. यानी पायलट पहले से जानते थे कि आगे मौसम की वजह से मुश्किल होगी.
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तूफान वाला बादल इतनी तेजी से कैसे बढ़ा
मौसम की जानकारी बताती है कि तूफान वाला बादल बहुत तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ा. दोपहर 12:36 बजे यह बादल 33 हजार फीट ऊंचा था. सिर्फ 20 मिनट बाद 12:56 बजे यह 48 हजार 300 फीट तक पहुंच गया. यानी 20 मिनट में 15 हजार फीट ऊपर चला गया. इतनी तेजी से बढ़ने का मतलब है कि अंदर बहुत जोरदार ऊपर की हवा चल रही थी. ऐसे बादल के अंदर हवा के तेज झटके लगते हैं.
विमान की ऊंचाई पर बाहर का तापमान शून्य से 45 डिग्री फारेनहाइट यानी 7.2 डिग्री सेल्सियस नीचे था. सामान्य हालत में इतनी ठंड में विमान पर ज्यादा बर्फ नहीं जमती. लेकिन जब तूफान वाला बादल इतनी तेजी से बढ़ता है तो वह नीचे की गर्म और गीली हवा को ऊपर खींच लेता है. इससे ऊंचाई पर भी बहुत तेजी से बर्फ जम सकती है.
12:37 बजे कैप्टन ने कहा कि आगे के खराब मौसम से बचने के लिए थोड़ा बाएं मुड़ना पड़ सकता है. कंट्रोल टीम ने हां कह दी. उस समय विमान अभी भी उस खतरनाक बादल से करीब 8 मिनट और 128 km दूर था. 12:47 बजे दूसरे पायलट ने बताया कि हल्की पारदर्शी बर्फ जम रही है, जो अभी काबू में है और हवा के मध्यम झटके लग रहे हैं.
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विमान उसी समय उस तेज तूफान वाले बादल में घुस रहा था. एक मिनट बाद 12:48 बजे दूसरे पायलट ने ऊंचाई बढ़ाने को कहा क्योंकि बारिश बढ़ रही थी. वह 35 हजार फीट से 37 हजार फीट जाना चाहते थे. करीब 20 सेकंड बाद ही आपातकालीन संदेश यानी मेडे कॉल आ गया. बर्फ बहुत तेजी से जम सकती है.
इससे विमान का उड़ना अचानक मुश्किल हो जाता है. कभी-कभी पूरा कंट्रोल भी हाथ से निकल सकता है. पायलट मौसम की मुश्किल समझ रहे थे और उससे बचने की कोशिश कर रहे थे. सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और बातें आ रही हैं जिनमें लगता है कि हादसे से ठीक पहले विमान का पिछला स्थिर हिस्सा (जिसे हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर कहते हैं) गायब था.
पक्की बात अभी नहीं कही जा सकती, लेकिन इतना जरूर लगता है कि बहुत जोरदार झटके से विमान के शरीर को भारी नुकसान पहुंचा होगा. यह नुकसान बादल के अंदर हुआ या नीचे गिरते समय हुआ, यह अभी साफ नहीं है. यह भी पता नहीं कि नुकसान गिरने की वजह बना या गिरने के बाद हुआ. जांच एजेंसी इन बातों को अच्छी तरह देखेगी.
पूरे आंकड़ों से क्या समझ आता है
उपलब्ध जानकारी से साफ है कि तूफान वाला बादल बहुत तेजी से बढ़ा, अंदर हवा के जोरदार झटके थे और ऊंचाई पर अचानक बर्फ जमने की स्थिति बन गई थी. पायलटों ने मौसम से बचने के लिए रास्ता बदलने की इजाजत ली थी और ऊंचाई बढ़ाने की कोशिश भी की. फिर भी विमान उस तेजी से बढ़ते बादल में घुस गया.
बाहर की ठंड के बावजूद तेजी से बढ़ते बादल ने बर्फ का खतरा बढ़ा दिया होगा. मध्यम बारिश और खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि काबू रखना मुश्किल हो गया. ये सारी बातें मिलकर बताती हैं कि मौसम का बड़ा हाथ हो सकता है. लेकिन असली वजह जांच के बाद ही पता चलेगी.
जांच एजेंसी एनटीएसबी अब पूरी तरह देखेगी कि असल में क्या हुआ और किन-किन बातों ने भूमिका निभाई. तेजी से बढ़ते तूफान वाले बादल में घुसना कितना बड़ा कारण बना, यह जरूर जांचा जाएगा. बर्फ जमना कितना असरदार रहा, यह भी देखा जाएगा. विमान के शरीर को हुए नुकसान की भी जांच होगी.
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यह हादसा याद दिलाता है कि मौसम बहुत तेजी से बदल सकता है. पायलट, हवा की कंट्रोल टीम और मौसम की जानकारी देने वाले सिस्टम को और बेहतर तालमेल रखना चाहिए. छोटे जेट विमानों के लिए तेज तूफान वाले मौसम में खास सावधानी बरतनी चाहिए. उड़ान की योजना बनाते समय बादल कितनी तेजी से ऊपर बढ़ रहा है, इस पर ध्यान देना जरूरी है. यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए मौसम की ताजा जानकारी का सही इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर रास्ता बदलने के फैसले को और मजबूत बनाना चाहिए.
क्या हो सकती है असली वजह?
लियरजेट 60 का यह हादसा बताता है कि मौसम कितना अनिश्चित और खतरनाक हो सकता है. उपलब्ध जानकारी से लगता है कि तेजी से बढ़ता तूफान वाला बादल, हवा के जोरदार झटके और अचानक बर्फ जमना बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर दिखे संभावित नुकसान के संकेत भी जांच में शामिल होंगे. असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी.
ऋचीक मिश्रा