चेतना सिर्फ दिमाग में नहीं होती, कोशिकाओं में भी होती है, IIT Mandi की खोज

IIT मंडी के वैज्ञानिकों ने खोजा है कि चेतना यानी कॉन्सियसनेस सिर्फ दिमाग में नहीं होती. यह कोशिकाओं में भी होती है. यह खोज चेतना की समझ बदल सकती है और प्राचीन भारतीय ज्ञान से मेल खाती है.

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आईआईटी मंडी ने पौधों के जरिए पता लगाया कि चेतना सिर्फ दिमाग में नहीं होती. (Photo: ITG) आईआईटी मंडी ने पौधों के जरिए पता लगाया कि चेतना सिर्फ दिमाग में नहीं होती. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (IIT Mandi) के वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक खोज की है. उन्होंने पाया कि पौधे बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) पर प्रतिक्रिया देते समय अपनी कोशिकाओं के अंदर मौजूद दुनिया को पूरी तरह से बदल देते हैं. यह खोज बिना दिमाग और नर्वस सिस्टम वाले पौधों में चेतना के बारे में हमारी समझ बदल सकती है.

वैज्ञानिकों ने टमाटर और बैंगन की कोशिकाओं पर एनेस्थीसिया का असर देखा. उन्होंने आधुनिक लाइव सेल माइक्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया. उन्होंने पाया कि पौधे की कोशिकाएं बेहोश करने वाली दवा पर बहुत व्यवस्थित और कॉर्डिनेटेड तरीके से रिएक्ट करती हैं.

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रूट ब्रेन हाइपोथेसिस

पौधों की जड़ का सिरा सूचना ग्रहण करने और प्रोसेस करने का मुख्य केंद्र होता है. इसे रूट ब्रेन कहा जाता है. वैज्ञानिकों ने इसी हिस्से की कोशिकाओं का अध्ययन किया क्योंकि ये पारदर्शी होती हैं. आसानी से देख सकते हैं.

पहले शोध पत्र में वैज्ञानिकों ने दिखाया कि एनेस्थीसिया देने पर कोशिकाओं के अंग क्रम से बंद होते हैं. माइटोकॉन्ड्रिया, लाइसोसोम, क्लोरोप्लास्ट और अन्य अंगों का क्रमबद्ध शटडाउन होता है. अंत में न्यूक्लियस बंद होता है. जब दवा हटाई गई तो ठीक उलटे क्रम में सब कुछ सामान्य हो गया. न्यूक्लियस इस पूरी प्रक्रिया का मास्टर कंट्रोलर साबित हुआ.

सबसे हैरान करने वाली खोज

दूसरे प्रयोग में सबसे आश्चर्यजनक नतीजा सामने आया. पौधों की कोशिकाओं में मौजूद न्यूक्लियस एनेस्थीसिया के दौरान एक साथ व्यवस्थित हो गए. प्रत्येक न्यूक्लियस के अंदर यूक्रोमेटिन (एक्टिव DNA) एक साथ बाहरी किनारे पर चला गया. यह सब एक साथ सभी कोशिकाओं में हुआ, भले ही उनके बीच कोई नर्वस सिस्टम न हो. यह नॉन-लोकल कम्यूनिकेशन को दिखाता है. 

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प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा और प्रो. चयन कांति नंदी का कहना है कि यह खोज भारतीय ज्ञान प्रणाली से मेल खाती है. प्राचीन भारतीय दर्शन चेतना को गैर-स्थानीय और हर जगह व्याप्त मानता है. यह अध्ययन बताता है कि चेतना सिर्फ दिमाग की देन नहीं है, बल्कि यह कोशिकीय स्तर पर भी मौजूद हो सकती है.

वैज्ञानिक अब इस खोज को अन्य जीवों जैसे C. elegans (एक छोटा कीड़ा) पर भी जांच रहे हैं. अगर वहां भी यही पैटर्न मिला तो यह साबित हो जाएगा कि चेतना का सेलुलर सिग्नेचर सार्वभौमिक है. IIT मंडी की यह खोज विज्ञान की दुनिया में नई बहस छेड़ सकती है. पौधे बिना दिमाग के भी चेतना के संकेत दिखा रहे हैं. यह हमें प्रकृति के प्रति और सम्मान करने की प्रेरणा देती है.

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