Surya Grahan 2026: छठे भाव में ग्रहण योग! जानें कब कुंडली में 'विजय योग' बनाते हैं राहु-सूर्य

छठे भाव में बनने वाला यह ग्रहण योग व्यक्ति को अपने शत्रुओं पर विजय दिलाने की क्षमता देता है. विरोधी चाहे कितने भी मजबूत क्यों न हों, वे लंबे समय तक टिक नहीं पाते हैं. कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी ऐसे व्यक्ति को सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है.

Advertisement
छठा भाव शत्रु, रोग, ऋण और प्रतियोगिता का कारक भाव होता है. (Photo: ITG) छठा भाव शत्रु, रोग, ऋण और प्रतियोगिता का कारक भाव होता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:46 PM IST

सूर्य और राहु की युति से बनने वाले ग्रहण योग का नाम सुनते ही आमतौर पर लोग भयभीत हो जाते हैं. इसे अक्सर नकारात्मक प्रभाव देने वाला योग माना जाता है. लेकिन इसका फल पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि यह युति किस भाव और किस राशि में बन रही है. कई स्थितियों में यही ग्रहण योग राजयोग की तरह सकारात्मक परिणाम भी देता है. छठा भाव भी ऐसी ही विशेष स्थिति वाला भाव माना जाता है.

Advertisement

छठा भाव शत्रु, रोग, ऋण और प्रतियोगिता का कारक भाव होता है. जब इस भाव में सूर्य और राहु की युति से ग्रहण योग बनता है तो प्रारंभिक स्तर पर कुछ चुनौतियां जरूर सामने आती हैं. व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में विरोध, बाधाएं और सहयोगियों से मतभेद का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही, पिता के साथ विचारों में टकराव की स्थिति भी बन सकती है. लेकिन इन सबके बावजूद यह योग व्यक्ति को अंदर से मजबूत और संघर्षशील बनाता है.

ग्रहण योग कब बनाता है विजय योग?
छठे भाव में बनने वाला यह ग्रहण योग व्यक्ति को अपने शत्रुओं पर विजय दिलाने की क्षमता देता है. विरोधी चाहे कितने भी मजबूत क्यों न हों, वे लंबे समय तक टिक नहीं पाते हैं. कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी ऐसे व्यक्ति को सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है. यही कारण है कि इस योग को कई मामलों में ‘विजय योग’ के रूप में भी देखा जाता है.

Advertisement

विशेष रूप से यदि ऐसा व्यक्ति वकालत या कानून से जुड़े क्षेत्र में हो तो उसे इस योग का विशेष लाभ मिलता है. उसकी तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास और विरोधियों को परास्त करने की योग्यता उसे सफल बनाती है. कार्यस्थल पर भी भले ही कुछ लोग बाधाएं उत्पन्न करें, लेकिन व्यक्ति का प्रभाव और दबदबा बना रहता है, जिससे अंततः सफलता उसी के हिस्से में आती है.

तुला राशि में ग्रहण योग देता है लाभ
यदि यह ग्रहण योग सूर्य की नीच राशि तुला में बनता है तो इसके परिणाम और भी रोचक हो जाते हैं. इस स्थिति में सूर्य चौथे भाव का स्वामी होकर छठे भाव में स्थित होता है. ज्योतिष में छठे भाव में नीच ग्रह का होना कई बार शुभ फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मकताओं को नियंत्रित करने की क्षमता देता है. ऐसे में व्यक्ति को संपत्ति, वाहन और भौतिक सुख-सुविधाओं का लाभ मिल सकता है.

हालांकि ऐसे व्यक्तियों को अपने स्वभाव में संतुलन बनाए रखना चाहिए. विशेष रूप से बड़बोलापन और अहंकार से बचना जरूरी है, क्योंकि यह उनके संबंधों और छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. संयमित व्यवहार और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से इस योग के अच्छे परिणाम और भी बढ़ सकते हैं. छठे भाव में सूर्य-राहु का ग्रहण योग केवल भय का कारण नहीं होती, बल्कि सही समझ और दृष्टिकोण के साथ वही स्थिति सफलता और विजय का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »