Janmashtami 2026: शुभ मुहूर्त में ऐसे कराएं खीरे से कान्हा का जन्म, पंचामृत स्नान भी स्टेप-बाय-स्टेप समझें

Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आज रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक निशीता काल रहेगा. आप इस शुभ घड़ी में खीरे से भगवान का जन्म करवाने के बाद उन्हें पंचामृत स्नान और विधिवत पूजा कर सकते हैं.

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जन्माष्टमी पर खीरे के डंठल को काटने की विधि को नाल छेदन कहा जाता है. इसे भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक माना जाता है. (Photo: ITG) जन्माष्टमी पर खीरे के डंठल को काटने की विधि को नाल छेदन कहा जाता है. इसे भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक माना जाता है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:50 PM IST

आज देशभर में धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व मनाया जा रहा है. जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था. इसलिए जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र के संयोग में लोग मध्य रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म करवाते हैं और फिर उनकी विधिवत पूजा करते हैं. इस दौरान कन्हैय्या का जन्म करवाने के लिए खीरे का प्रयोग किया जाता है. बहुत सारे लोग जो पहली बार जन्माष्टमी का व्रत रख रहे हैं या फिर जिन्होंने पहले यह रस्म नहीं निभाई है, उनके लिए हम स्टेप-बाय-स्टेप इसके बारे में बताते हैं

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श्रीकृष्ण के जन्म और पूजा का मुहूर्त क्या है?
4 सितंबर को जन्माष्टमी रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक निशीता काल रहेगा. आप इस शुभ घड़ी में खीरे से भगवान का जन्म करवाने के बाद उन्हें पंचामृत स्नान और विधिवत पूजा कर सकते हैं.

खीरे से कैसे कराएं कान्हा का जन्म?
जन्माष्टमी की पूजा में खीरे का विशेष महत्व बताया गया है. जन्माष्टमी पर खीरे के डंठल को काटने की विधि को नाल छेदन कहा जाता है. इसे भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक माना जाता है. मध्यरात्रि में पूजा के लिए रखे खीरे को पहले साफ पानी से स्नान कराएं. इसके बाद सिक्के की मदद से खीरे का डंठल काटें. यह प्रक्रिया शिशु की नाल काटने के प्रतीक के रूप में की जाती है. इसके बाद खीरे में हलका सा चीरा लगाकर उसमें से लड्डू गोपाल की छोटी प्रतिमा रखें. कान्हा के जन्म के साथ ही भक्त जयकारा लगाते हैं. इस दौरान 'जय कन्हैया लाल की' का उद्घोष किया जाता है.

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कान्हा के पंचामृत स्नान की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

स्टेप 1- सबसे पहले लड्डू गोपाल को पालने में रखें. हल्के हाथों से उनकी मालिश करें. और इसके बाद स्वच्छ पानी से स्नान कराएं.

स्टेप 2- फिर चंदन पाउडर और पानी मिलाकर लेप तैयार करें. इसे भगवान के बाल स्वरूप पर हल्के हाथों से लगाएं. इसके बाद दो साफ बर्तन लें. एक में लड्डू गोपाल को रखें और दूसरे में स्नान के लिए पानी लें.

स्टेप 3- पानी में गंगाजल और तुलसी की कुछ पत्तियां डालें. इस पवित्र जल से लड्डू गोपाल की प्रतिमा रखें और स्नान कराएं. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें.

स्टेप 4- इसके बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत स्नान कराएं. इसके लिए क्रम का ध्यान रखें. सबसे पहले कच्चे दूध से स्नान कराएं. इसके बाद दही का प्रयोग करें.

स्टेप 5- फिर लड्डू गोपाल को शहद और शुद्ध देसी घी का प्रयोग करें. अंत में गंगाजल से स्नान कराकर प्रक्रिया पूरी करें.

स्टेप 6- स्नान पूरा होने के बाद लड्डू गोपाल को साफ और सुंदर वस्त्र पहनाएं. भगवान को गुलाब के फूल अर्पित करें. इसके बाद मोरपंख वाली पगड़ी पहनाएं.

स्टेप 7- आखिर में बाल गोपाल के हाथ में बांसुरी सजाएं. इस तरह उनका बाल स्वरूप तैयार करें. अंत में विधि-विधान से पूजा करें और भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारें.

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