शारदीय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है. पूरे नौ दिन देवी की आराधना के बाद दशहरे यानी विजयादशमी के दिन मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस साल मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु बड़े ही भावुक मन से देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और फिर उनसे अगले वर्ष आने की प्रार्थना करते हैं. देश के विभिन्न हिस्सों में इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है.
मां दुर्गा की कुछ पारंपरिक प्रतिमाओं में देवी के माथे पर बिंदी के नीचे मकड़ी और उसका जाल भी दिखाई देता है. क्या आपने सोचा है कि आखिर यह क्यों होता है. देवी के माथे पर यह मकड़ी 'डाकर साज' से जुड़ी प्रतिमा की सजावट में देखने को मिलती है. मकड़ी का यह जाल देवी की महामाया का प्रतिनिधित्व करता है. महामाया का मतलब वो दिव्य शक्ति जो अपनी माया से इस सृष्टि का संचालन करती है.
मकड़ी को महामया से क्यों जोड़ते हैं?
शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि मकड़ी जिस तरह खुद अपना जाल बनाती है और फिर उसी जाल के बीच रहती है. उसी तरह इंसान भी संसार में अपनी एक व्यवस्था बनाता है. और फिर समय के साथ-साथ इच्छाओं, मोह और रिश्ते के बंधन में उलझता चला जाता है. मान्यता है कि इस माया को रचने और संचालित करने के पीछे देवी की शक्ति है. इसलिए मकड़ी के जाल को संसार की जटिलताओं के रूप में देखा जाता है और मकड़ी उससे ऊपर रहने वाली शक्ति का प्रतीक होती है.
अपने जाल में कभी नहीं फंसती मकड़ी
मकड़ी अपना जाल बनाती तो है, लेकिन कभी खुद उसमें फंसती नहीं है. इसी तरह इंसान को भी मोह-माया के जाल से खुद को बचाने का प्रयास करना चाहिए. मतलब पैसा, परिवार, रिश्ते और जिम्मेदारियां जीवन का हिस्सा हैं. लेकिन माया के इस जाल में खुद को पूरी तरह खो देना या गुम कर लेना सही नहीं है.
दुर्गा विसर्जन कब है?
पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से लेकर 21 अक्तूबर को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट तक रहेगी. ऐसे में दुर्गा विसर्जन 20 अक्तूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 30 तक किया जाएगा. शुभ मुहूर्त की इस अवधि में आप किसी भी वक्त देवी की प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं.
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