Shardiye Navratri 2026: इस दिशा में करें कलश स्थापना, कल सुबह 3 घंटे 53 मिनट रहेगा शुभ मुहूर्त

वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि का स्थान माना गया है और अग्नि को शक्ति, ऊर्जा, उत्साह और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है. मां दुर्गा का स्वरूप भी शक्ति और पराक्रम से जुड़ा हुआ है. इसलिए मां की आराधना के लिए इस दिशा को विशेष रूप से अनुकूल माना जा सकता है.

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दुष्टों और राक्षसों का संहार करने वाली मां दुर्गा की आराधना के लिए चौकी स्थापना करने जा रहे हैं तो इसके लिए अग्नि तत्व की दक्षिण-पूर्व दिशा (साउथ-ईस्ट) सबसे उपयुक्त है. दुष्टों और राक्षसों का संहार करने वाली मां दुर्गा की आराधना के लिए चौकी स्थापना करने जा रहे हैं तो इसके लिए अग्नि तत्व की दक्षिण-पूर्व दिशा (साउथ-ईस्ट) सबसे उपयुक्त है.

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

शारदीय नवरात्र कल से शुरू हो रहे हैं. शारदीय नवरात्र में प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना यानी कलश स्थापना करने का विधान है. दुष्टों और राक्षसों का संहार करने वाली मां दुर्गा की आराधना के लिए चौकी स्थापना करने जा रहे हैं तो इसके लिए अग्नि तत्व की दक्षिण-पूर्व दिशा (साउथ-ईस्ट) सबसे उपयुक्त है. हालांकि पूजा पाठ के लिए सबसे उपयुक्त स्थान जल तत्व के ईशान कोण (नॉर्थ-ईस्ट) को माना जाता है. इस दिशा में मां दुर्गा की आराधना करना शुभ फलदायी रहता है. भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा राक्षसों व दुष्टों का संहार करने वाली मां दुर्गा के लिए अग्नि तत्व की दिशा भी उपयुक्त है.

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वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि का स्थान माना गया है और अग्नि को शक्ति, ऊर्जा, उत्साह और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है. मां दुर्गा का स्वरूप भी शक्ति और पराक्रम से जुड़ा हुआ है. इसलिए मां की आराधना के लिए इस दिशा को विशेष रूप से अनुकूल माना जा सकता है.

इसकी सबसे मुख्य वजह मां के पूजन में प्रयोग किए जाने वाले लाल रंग के परिधान, अखंड ज्योत, मां के हाथ में संहार करने वाले शस्त्र त्रिशूल और तलवार का होना है. लाल रंग स्वयं अग्नि तत्व को दर्शाता है और मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग की चुनरी, लाल फूल और अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग भी विशेष रूप से किया जाता है. इसके साथ ही पूजा स्थल पर नियमित रूप से जलने वाली ज्योत भी अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसे में जब मां की चौकी अग्नि कोण में स्थापित की जाती है तो दिशा और पूजा सामग्री के बीच सामंजस्य बना रहता है.

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अलग दिशा चुनने से पहले ये उपाय करें
जल तत्व की दिशा में किसी भी रूप में अग्नि तत्व से संबंधित चीजों का होना घर की ऊर्जाओं का संतुलन बिगाड़ सकता है. इसलिए यदि आप जल तत्व की दिशा ईशान कोण में ही मां दुर्गा की आराधना करना चाहते हैं तो आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. यहां मां की चौकी पर लाल रंग के कपड़े के बजाए हल्का नीला, हरा या पीले रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए.

ज्योत प्रज्ज्वलित करने और मां दुर्गा के लाल रंग के परिधान के अलावा जितना सम्भव हो लाल रंग का प्रयोग कम करें. ईशान कोण को वास्तु में जल तत्व, ज्ञान व आध्यात्मिक ऊर्जा का क्षेत्र माना जाता है. इसलिए इस स्थान पर पूजा करते समय अत्यधिक अग्नि तत्व को बढ़ाने के बजाय संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है.

लेकिन अग्नि तत्व की दक्षिण-पूर्व दिशा में आप लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं. यहां अग्नि तत्व होने के कारण तत्व असंतुलन की समस्या नहीं रहती है. मां की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाने के साथ लाल पुष्प, लाल चुनरी और अन्य लाल रंग की पूजन सामग्री का प्रयोग भी किया जा सकता है. नवरात्रि में जब मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, उस समय चौकी स्थापना के लिए इस दिशा का चयन पूजा स्थल को शक्ति और ऊर्जा से जोड़ने वाला माना जाता है.

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ होती है. इस बार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक रहेगी. यानी करीब 3 घंटे 53 मिनट का मुहूर्त कलश स्थापना के लिए रहेगा. जो लोग इस शुभ घड़ी में घटस्थापना न कर पाएं वो अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक भी घटस्थापना कर सकते हैं.

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