Shardiye Navratri 2026: अष्टमी और नवमी कब है? यहां देखें नवरात्र के पूरे 9 दिन का कैलेंडर

इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर से लेकर 19 अक्टूबर तक रहेंगे. यानी पूरे नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी. इस बीच 18 अक्टूबर को अष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी का कन्या पूजन किया जाएगा. आइए शारदीय नवरात्र का पूरा कैलेंडर एक बार देख लेते हैं.

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नवरात्र का हर दिन अलग-अलग शक्तियों को समर्पित है. (Photo: ITG) नवरात्र का हर दिन अलग-अलग शक्तियों को समर्पित है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

नवरात्र के नौ दिन, पूजा उपासना और साधना के सर्वोत्तम दिन हैं. इन दिनों में साधना से किसी भी तरह की मनोकामना को पूरा किया जा सकता है. नवरात्र का हर दिन अलग-अलग शक्तियों को समर्पित है. अगर हर दिन की शक्ति को समझकर उसके अनुसार अगर कामना की जाए तो कामना निश्चित रूप से पूर्ण होती है. इसके अलावा नवग्रहों से संबंधित समस्या भी इन दिनों में दूर की जा सकती है. इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर को आरम्भ होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा.

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प्रथम स्वरूप
नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप से स्वास्थ्य की शक्ति प्रवाहित होती है. इस दिन माता के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माँ की उपासना लाल फूलों से करनी चाहिए. साथ ही उन्हें गाय के दूध का शुद्ध घी अर्पित करना चाहिये. इस बार पहले स्वरूप की उपासना 11 अक्टूबर को होगी.

द्वितीय स्वरूप
नवदुर्गा के दूसरे स्वरूप में ज्ञान और वैराग्य की शक्ति का प्रवाह रहता है. इस दिन माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माँ की उपासना सफ़ेद फूलों से करनी चाहिए. साथ ही उन्हें शक्कर का भोग लगायें. इस बार दूसरे स्वरूप की उपासना 12 अक्टूबर को होगी.

तृतीय स्वरूप
नवरात्रि के तीसरे दिन साहस और आत्मविश्वास की शक्ति मिलती है. इस दिन माता के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता की पूजा लाल फूलों से करें. साथ ही माता को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगायें. इस बार तीसरे स्वरूप की उपासना 13 अक्टूबर को होगी.

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चतुर्थ स्वरूप
नवरात्रि के चौथे दिन बुद्धि, वाणी और प्रखरता की शक्ति मिलती है. इस दिन माता के कूष्माण्डा स्वरूप की उपासना होती है. इस दिन माता की उपासना हरी वस्तुओं से करें. साथ ही माता को मालपुए का भोग लगायें. इस बार चौथे स्वरूप की उपासना भी 14 अक्टूबर को होगी.

पंचम स्वरूप
नवदुर्गा के पंचम स्वरूप से संतान सम्बन्धी समस्याओं का समापन होता है. इस दिन माता के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता की उपासना पीले फूलों से करें. साथ ही माता को केले का भोग अर्पित करें. इस बार पांचवें स्वरूप की उपासना 15 अक्टूबर को होगी.

छठवां स्वरूप
नवदुर्गा के छठवें स्वरूप से शीघ्र विवाह का वरदान मिलता है. इस दिन माता के कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन भी माता की उपासना पीले फूलों से करें. साथ ही माता को शहद का भोग लगायें. इस बार माता के छठवें स्वरूप की उपासना 16 अक्टूबर को होगी.

सातवां स्वरूप
नवदुर्गा के सातवें स्वरूप से रोग, शोक और बाधाओं का नाश होता है. इसके अलावा नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र मंत्र से छुटकारा मिलता है. इस दिन माता के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता की उपासना सुगंध और धूपबत्ती से करें. साथ ही माता को गुड़ का भोग अर्पित करें. इस बार माता के सातवें स्वरूप की उपासना 17 को होगी.

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आठवां स्वरूप
नवदुर्गा के आठवें स्वरूप से मनचाहे विवाह और सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है. इस दिन माता के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता की पूजा सफेद फूलों से करें. साथ ही माता को नारियल का भोग अर्पित करें. इस बार माता के आठवें स्वरूप की पूजा 18 अक्टूबर को होगी. इस दिन महाष्टमी का कन्या पूजन भी किया जाएगा.

नवां स्वरूप
नवदुर्गा के नवें स्वरूप से मुक्ति मोक्ष और समस्त सिद्धियां मिल सकती हैं. इस दिन माता के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता की पूजा विभिन्न रंग के फूलों से करें. साथ ही माता को काले तिल का भोग लगायें. इस बार माता के नवें स्वरूप की पूजा भी 19 अक्टूबर को होगी. इस दिन महानवमी का कन्या पूजन किया जाएगा.

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