Raksha Bandhan 2026: इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर कई सारे संयोग एकसाथ बन रहे हैं. इस बार राखी का यह पर्व 28 सितंबर को मनाया जाएगा. ज्योतिष गणना के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार पर चंद्र ग्रहण, पंचक और भद्रा काल का साया रहने वाला है. ऐसे में लोगों को चिंता सता रही है कि वह कब और कैसे रक्षाबंधन का त्योहार मनाएंगे. इस बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्र ने विस्तार से जानकारी दी है.
सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक?
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने पंचांग देखकर बताया कि इस बार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर इसका समापन होगा. सावन पूर्णिमा तिथि पर अलग-अलग समय चंद्र ग्रहण, पंचक और भद्रा रहेंगी.
रक्षाबंधन पर भद्रा का समय
27 अगस्त को सुबह पूर्णिमा तिथि के साथ भद्रा आरंभ हो जाएगी. इसका समापन 27 अगस्त को रात 09:29 बजे होगा. जबकि रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा. 28 अगस्त की तारीख पूरी तरह से भद्रा मुक्त रहेगी.
सावन पूर्णिमा पर पंचक शुरू
इस साल सावन पूर्णिमा पर पंचक भी लगने वाला है. हिंदू पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक पंचक रहेगा. चूंकि यह पंचक गुरुवार से आरंभ हो रहा है, इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जाएगा. ज्योतिषविद ने बताया कि पंचक के कारण राखी बांधने पर कोई रोक-टोक नहीं है. इसलिए सावन पूर्णिमा से शुरू हो रहे अग्नि पंचक से घबराने की जरूरत नहीं है.
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण
28 अगस्त को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी होने वाला है. आगामी चंद्र ग्रहण सुबह 06.53 बजे से लेकर दोपहर 12.32 बजे तक रहने वाला है. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक की मान्यता ग्रहण की दृश्यता से जुड़ी होती है. ग्रहण भारत में दिखाई देने की वजह से इसका सूतक काल यहां मान्य नहीं होगा. ऐसे में आप किसी भी शुभ मुहूर्त में भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है?
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अलावा, दोपहर को 12.01 बजे से लेकर दोपहर 01.05 बजे के बीच अभिजीत मुहूर्त में भी भाई को राखी बांध सकती हैं.
प्रवीण मिश्र, ज्योतिषी