प्रेमानंद महाराज के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े शिष्य दीपक लोधी की मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. आश्रम प्रबंधन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सूचना जारी कर शिष्यों के नियमों में कुछ जरूरी बदलाव किए हैं. आश्रम की ओर से जारी सूचना में शिष्यों की वेशभूषा के लिए भी कुछ सख्त नियम लागू किए गए हैं. प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक शरण दुलारी ने 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी.
आश्रम प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, जो शिष्य विरक्त या गृहस्थ हैं और किसी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जैसे ठेला या दुकान चलाते हैं, उन्हें सामान्य वस्त्र या कुर्ता-पायजामा पहनने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे सभी शिष्यों को आश्रम के सफेद वस्त्र न पहनने के निर्देश दिए गए हैं. जो शिष्य गृहस्थ हैं और पूज्य महाराज जी केली कुंज की सेवा में जुटे हैं, उनके लिए भी अब सामान्य कुर्ता-पायजामा पहनना अनिवार्य किया गया है.
सफेद कुर्ता पहनने पर बदले नियम
इसके साथ ही सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति केवल उन सदस्यों को होगी, जो प्रेमानंद महाराज की सेवा के लिए या कुंज की व्यवस्था और सेवा में लगे हुए हैं. आश्रम की ओर से जारी संदेश में यह भी कहा गया है कि जो भी लोग अब केली कुंज आएंगे, उन्हें वेशभूषा से जुड़ा यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा. बता दें कि आश्रम में हुई एक युवा साधु की मौत के बाद आश्रम प्रबंधन की ओर से यह फैसला लिया गया है, जिसका सख्ती से पालन करना होगा.
शिष्य दीपक लोधी की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों के निशान पाए जाने के बाद आश्रम की कार्यप्रणाली और शिष्यों की पहचान को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आश्रम प्रबंधन में जारी सूचना में कुछ और भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं. वहीं, दीपक लोधी की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम से कोई भी कैमरे के सामने आकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.
संत समाज ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
वृंदावन में युवा संत की मौत के बाद पूरे संत समाज में बड़ा आक्रोश देखा जा रहा है. इस घटना के बाद सोमवार को परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में धर्म रक्षा संघ के बैनर तले साधु-संतों ने एक बैठक भी बुलाई थी. इस बैठक में संतों ने एक स्वर में युवा साधु की मौत पर दुख जताते हुए घटना की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की थी. धर्म रक्षा संघ की इस बैठक में महंत गंगादास जी महाराज ने कहा, 'युवा साधु के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार हुआ है. यह काम किसी अच्छे आदमी का नहीं है, बल्कि आतंकवादी जैसी प्रवृत्ति वाले किसी शख्स ने ही यह किया है. इसलिए इस घटना के लिए जिम्मेदारी शख्स पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.'
मदन गोपाल शर्मा