26 सितंबर से पितृपक्ष आरंभ हो रहा है. इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. यह अवधि पितरों के निमित्त श्राद्ध की मानी गई है. इसमें लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं और उनका स्मरण करते हुए तर्पण-पिंडदान करते हैं. पितृपक्ष को कनागत भी कहा जाता है और इसमें खान-पान से जुड़े कई खास नियमों का पालन भी करना पड़ता है. श्राद्ध के दिनों में कुछ विशेष दालों और सब्जियों को भी वर्जित माना गया है. आइए जानते हैं कि इस अवधि में कौन सी दाल, सब्जियों को खाने से बचना चाहिए.
1. मसूर की दाल
पितृपक्ष में मसूर की दाल से परहेज करने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इस दाल में तमो गुण बहुत अधिक होता है. इसलिए श्राद्ध के दौरान इससे परहेज करना चाहिए. दूसरा, मसूर की दाल पितृ परंपरा में स्वीकार्य नहीं है. सिर्फ तिल, जौ, तंडुल (चावल), गेहूं और मूंग ही पितृ के साथ जाते हैं. मृत्यु के बाद आत्मा का सूक्ष्म शरीर भी इन्हीं से बनता है.
मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 32 में इसे लेकर एक श्लोक भी है-
वर्ज्या मर्कटकाः श्राद्धे राजमाषास्तथाणवः.
विप्राषिका मसूराश्च श्राद्धकर्मणि गर्हिताः॥
इसके अर्थ है- श्राद्ध के भोजन में मर्कटक, राजमाष, अणव, विप्राषिका और मसूर की दाल जैसी चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए. शास्त्रों में इन्हें श्राद्ध कर्म के लिए वर्जित बताया गया है.
चने और उड़द दाल से भी रहें दूर
वैदिक शास्त्र के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान चने की दाल या सत्तू और उड़द की दाल से भी परहेज करने की सला दी गई है. उड़द की दाल को संस्कृत भाषा में माष कहा गया है, जो मन में भ्रम पैदा करता है. इसलिए भी कई लोग पितृपक्ष में इससे परहेज करते हैं. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पितृपक्ष के दौरान चना दाल से लोग परहेज करते हैं. इसके अलावा, श्राद्ध की अवधि में बिहार के कई हिस्सों में उड़द की दाल नहीं खाई जाती है.
लहसुन-प्याज से करें परहेज
पितृ पक्ष के दौरान लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इन्हें तामसिक प्रवृत्ति वाला भोजन बताया गया है. इसलिए अगर आप सामान्य दिनों में लहसुन-प्याज खाते हैं, तो पितृ पक्ष में इनका त्याग कर सादा और सात्विक भोजन करने की परंपरा अपनाएं.
इन सब्जियों से भी बचें
पितृ पक्ष में जमीन के अंदर उगने वाली कुछ सब्जियों का सेवन भी नहीं करने की मान्यता है. इनमें गाजर, मूली, शलजम, शकरकंद, चुकंदर, अरबी और सूरन शामिल हैं. मान्यता के अनुसार, श्राद्ध पक्ष के दौरान इन सब्जियों को खुद खाने से बचना चाहिए और श्राद्ध भोजन में ब्राह्मण को भी इन्हें नहीं खिलाना चाहिए.
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