सावन शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. यह दिन नाग देवता की पूजा के लिए खास माना जाता है. इस तिथि का महत्व धर्म के साथ-साथ ज्योतिष और वास्तु के नजरिए से भी खास बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन नाग देव की पूजा करने से राहु-केतु और कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने की प्रार्थना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन रसोई में कढ़ाई और तवे का प्रयोग नहीं किया जाता है.
नाग पंचमी पर क्यों तवे पर नहीं बनाते रोटी?
नाग पंचमी के दिन कई घरों में तवे पर रोटी नहीं बनती है. कुछ लोग इस दिन तवे को हाथ तक नहीं लगाते हैं. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. दरअसल, ज्योतिष में लोहे के तवे को राहु का प्रतीक माना गया है. वहीं, रसोई की आग को मंगल से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन लोहे के तवे को आग पर चढ़ाना शुभ नहीं होता है. इस दिन तवे के साथ-साथ कढ़ाई का प्रयोग करना भी वर्जित माना गया है.
यही वजह है कि कई घरों में नाग पंचमी पर रोटी नहीं बनाई जाती हैं. घर में पहले से बना भोजन खाया जाता है. कई जगह तो खीर या ठंडे भोजन का ही सेवन किया जाता है. इससे रसोई में तवा और तेज आंच का उपयोग नहीं करना पड़ता है.
राहु का तवे से कनेक्शन
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु का संबंध सर्प से माना जाता है. इसलिए नाग पंचमी पर राहु के प्रतीक माने जाने वाले लोहे के बर्तनों को गर्म नहीं किया जाता. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में तनाव, विवाद और परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस दिन सावधानी रखने की सलाह दी जाती है.
राहु से तवे का कनेक्शन क्या है?
ज्योतिष शास्त्र में रसोई में रखा तवा राहु का प्रतिनिधित्व करता है और इसे सर्प (राहु) के फन से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए नागों के सबसे बड़े दिन नाग पंचमी पर लोग खाना बनाने के लिए लोहे के तवे का प्रयोग नहीं करते हैं. इस दिन भोजन बनाने के लिए मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों का उपयोग कर सकते हैं. इस दिन चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा दान करना या बहते जल में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है.
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