Kajri Teej 2026: 30 या 31 अगस्त, कजरी तीज का व्रत कब है? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को रात 9 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी और 31 अगस्त को रात 8 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि की मान्यता के चलते कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा.

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कजरी तीज का व्रत सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख की कामना से रखती हैं. (Photo: ITG) कजरी तीज का व्रत सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख की कामना से रखती हैं. (Photo: ITG)

प्रवीण मिश्र, ज्योतिषी

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST

हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन सुहागनों का निर्जला उपवास होता है. यह व्रत सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख की कामना से रखती हैं. कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा इस दिन विशेष मानी जाती है. इस साल कजरी तीज के व्रत को लेकर काफी कन्फ्यूजन है. कोई 30 अगस्त तो कोई 31 अगस्त को कजरी तीज बता रहा है.

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कजरी तीज 2026 कब है?
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को रात 9 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी और 31 अगस्त को रात 8 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि की मान्यता के चलते कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा.

कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं. कई जगह कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. महिलाएं अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा करती हैं. पूजा के दौरान शिव-पार्वती से परिवार की सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की जाती है.

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कजरी तीज मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत कई क्षेत्रों में इस पर्व की खास परंपराएं हैं. कुछ जगहों पर इसे बूढ़ी तीज कहा जाता है तो कुछ जगहों पर सातुड़ी तीज भी कहते हैं. कुछ क्षेत्रों में इस दिन नीमड़ी तीज भी कहा जाता है.

कजरी तीज की पूजन विधि
कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विधान बताया गया है. इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, चंदन, धूप, दीप, फल, फूल अर्पित किए जाते हैं. जबकि माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है. भगवान को सफेद मिठाई, दूध से बनी चीज या खीर का भोग लगाएं. पूजा के बाद भगवान शिव और पार्वती माता के मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा सुनें.

इस दिन पारंपरिक रूप से कुछ घरों में एक खास तरह की पूजा भी होती है. इस पूजा में मिट्टी या गोबर से छोटी तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है. उसके पास नीम की टहनी लगाई जाती है. फिर तालाब की आकृति में जल और कच्चा दूध डालकर दीपक जलाया जाता है. हालांकि, पूजा की यह विधि क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.

चंद्रमा को अर्घ्य के बाद खोलें व्रत
कजरी तीज का व्रत करने वाली महिलाएं चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. रात को चंद्रोदय होने के बाद जल में थोड़ा सा दूध मिलाएं और फिर दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाते हुए चंद्र देव को अर्घ्य दें. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भगवान शिव को पूजा में अर्पित किए गए फल ये व्रत खोल लें. इसके बाद आप चाहें तो सामर्थ्य के अनुसार कुछ भी दान कर सकते हैं. इस दिन आप सुहाग सामग्री, दूध, दही, मिश्री, खाने का सामान या धन का दान कर सकते हैं.

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