वैसे तो बृज भूमि को उतर प्रदेश के मथुरा में हैं. लेकिन राजस्थान के जैसलमेर को भी श्रीकृष्ण की बृज भूमि कहा जाए तो ये गलत नहीं होगा. यहां वैष्णव संप्रदाय के दर्जनों कृष्ण मंदिर और ठाकुर जी की भक्ति में लीन बड़ी तादात में श्रद्धालु हैं. यहां के सोनार किले में स्थित एक प्राचीन जैसल कुआं भी है, जिसे खुद भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की प्यास बुझाने के लिए सुदर्शन चक्र चलाकर खोदा था. जन्माष्टमी पर इस पूरे शहर का माहौल कृष्णमय हो जाता है. इसी शहर के सोनार दुर्ग में स्थित जैसलू कुएं को भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन से जोड़कर देखा जाता है.
कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां
देशभर में 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. ऐसे में जैसलमेर के कृष्ण मंदिरों में भी जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. शहर के मंदिर पैलेस स्थित श्री गिरधारी जी मंदिर में विशेष आयोजन की तैयारी चल रही है. यह मंदिर पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा है. यहां श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने वाले हैं. मंदिर में युवा श्रद्धालु भी भक्ति में शामिल हो रहे हैं. ढोल और ताशों के साथ भजन और बधाई गीतों का दौर चल रहा है. शाम को विशेष आरती भी की जा रही है.
जैसलमेर में एक दर्जन से ज्यादा कृष्ण मंदिर
जैसलमेर को यदुवंशी भाटी राजपूतों की ऐतिहासिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है. शहर में करीब एक दर्जन से ज्यादा कृष्ण मंदिर बताए जाते हैं. इनमें गिरधारी जी मंदिर के अलावा बांके बिहारी जी, मदन मोहन जी, श्रीनाथ जी, गोविंदसर, मेलाब और लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर प्रमुख हैं. इन मंदिरों में श्रद्धालु भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन नजर आते हैं. इनमें श्री गिरधारी जी मंदिर को प्रमुख और प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है.
अर्जुन की प्यास से जुड़ी है कुएं की कहानी
जैसलमेर के प्रसिद्ध सोनार दुर्ग में लक्ष्मीनाथ जी मंदिर के पास जैसलू कुआं स्थित है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह कुआं हजारों साल पुराना है. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की प्यास बुझाने के लिए त्रिकूट पहाड़ी पर सुदर्शन चक्र से इसे खोदा था. प्रचलित कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण और अर्जुन द्वारका की ओर जा रहे थे. रास्ते में दोनों त्रिकूट पहाड़ी पर रुके. अर्जुन को प्यास लगी, लेकिन आस-पास पानी नहीं था. तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कुआं खोदा और अर्जुन की प्यास बुझाई.
कुएं में आज भी मौजूद है पानी
वर्तमान में जैसलू कुएं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हालांकि, बताया जाता है कि इसके भीतर आज भी पानी मौजूद है. इतिहास से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में बस्ती बसाने से पहले पानी के स्रोत को प्राथमिकता दी जाती थी. कुछ इतिहासकार इस क्षेत्र को प्राचीन सरस्वती नदी के प्रवाह से भी जोड़ते हैं. मान्यता है कि कुआं खोदे जाने पर सरस्वती का पानी मिला था. सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र की खोज को लेकर विशेषज्ञों की रुचि आज भी बनी हुई है.
विमल भाटिया