दीपावली का समय नजदीक है. कोई नया घर बनवाने की प्लानिंग कर रहा होगा तो कोई पुराने घर में ही कुछ फेरबदल करवाने की तैयारी में होगा. नया घर बनवाते समय या घर में कुछ बदलाव करवाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखकर आप अपने घर की ऊर्जा को संतुलित रख सकते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि के साथ हंसी-खुशी का माहौल बना रहने में मदद मिलती है. समय भले ही विपरीत हो, लेकिन बेहतर और सकारात्मक ऊर्जा वाला घर विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति की हिम्मत और विवेक को बनाए रखने में सहायक होता है.
किन बातों का रखें ख्याल?
घर की ऊर्जा में लगभग 33 प्रतिशत भाग घर का मुख्य द्वार निर्धारित करता है. यदि आपके घर का प्रवेश द्वार सकारात्मक है तो काफी हद तक घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है. इसलिए नया घर बनवाते समय मुख्य द्वार की दिशा और उसके स्थान का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
वहीं दूसरे स्थान पर टॉयलेट आता है. ग्रहों में राहु माने जाने वाले टॉयलेट का स्थान भी वास्तु में बहुत महत्वपूर्ण है. टॉयलेट हमेशा ईस्ट-साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-वेस्ट और वेस्ट-नार्थ-वेस्ट दिशा में होना अच्छा माना जाता है. इन तीन दिशाओं के अलावा टॉयलेट जहां कहीं भी होगा, उस दिशा से संबंधित गुणधर्मों में परेशानी पैदा कर सकता है. इसलिए घर की प्लानिंग करते समय टॉयलेट के स्थान को बाद के लिए नहीं छोड़ना चाहिए.
तीसरा स्थान रसोई का आता है. रसोई में अग्नि तत्व होने के कारण इसका स्थान भी महत्वपूर्ण होता है. अग्नि हमेशा अग्नि कोण यानी साउथ-ईस्ट से साउथ की दिशा में होना अच्छा माना जाता है. पश्चिम दिशा में भी रसोई अच्छे परिणाम देने वाली मानी जाती है. इसलिए रसोई बनवाते समय केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए.
चौथे स्थान पर मंदिर का सही दिशा में होना आवश्यक है. उत्तर दिशा से लेकर नार्थ-ईस्ट दिशा तक मंदिर का होना शुभ परिणाम देता है. वहीं पश्चिम दिशा में भी मंदिर शुभ फलदायी माना जाता है. घर में पूजा का स्थान ऐसा हो कि वहां सकारात्मक और शांत वातावरण बना रहे.
पांचवें स्थान पर बेडरूम आते हैं. टॉयलेट वाली दिशाओं को छोड़कर ही बेडरूम को प्लान करना चाहिए. बेडरूम की स्थिति का संबंध व्यक्ति के आराम, मानसिक शांति और दिनचर्या से भी माना जाता है. इसलिए घर बनवाते समय बेडरूम की दिशा को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
दीवारों के रंग और टाइल्स के कलर पर भी ध्यान दें
इन पांच चीजों को सही तरह से प्लान करने पर काफी हद तक घर की ऊर्जाओं को बेहतर रखा जा सकता है. इसके बाद घर का इंटीरियर, दीवारों के रंग, टाइल्स के रंग और घर में रखी जाने वाली वस्तुएं भी प्रभाव डालती हैं. हालांकि घर के निर्माण में इन पांच चीजों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है. शुरुआत में ही इनका सही स्थान तय कर लिया जाए तो बाद में बदलाव कराने की जरूरत कम पड़ती है और घर की ऊर्जा को संतुलित रखने में भी मदद मिलती है.
अंशु पारीक