कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी ने 8 मुस्लिमों को दिए टिकट, जयपुर निगम चुनाव में रोमांचक टक्कर!

जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 35 फीसदी टिकट महिलाओं को दिया है. पार्टी 150 वार्डों के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हुए 2500 से ज्यादा नामों पर चर्चा की है. कांग्रेस को घेरने के लिए बीजेपी ने मुस्लिम बहुल सीटों पर 8 मुस्लिम नेताओं को प्रत्याशी बनाया है.

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जयपुर निगम चुनाव में बीजेपी ने 51 महिलाओं को टिकट दिया है.  (Photo: X/@BJP4Rajasthan) जयपुर निगम चुनाव में बीजेपी ने 51 महिलाओं को टिकट दिया है. (Photo: X/@BJP4Rajasthan)

शरत कुमार

  • जयपुर ,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:30 PM IST

जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर इस इलेक्शन को रोचक बना दिया है. बीजेपी के इस दांव से कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ गई है. इस अलावा नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने महिलाओं को 35 फीसदी टिकट दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने 150 में 51 टिकट महिलाओं को दिया है. वहीं कांग्रेस ने संगठन के चेहरों पर भरोसा जताया है. कांग्रेस की सूची में संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और मौजूदा पार्षद शामिल हैं. 

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कांग्रेस ने 4 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, 2 पीसीसी प्रकोष्ठ प्रमुखों और एक पीसीसी सचिव को भी टिकट दिया है. 

भाजपा की सूची में महिला और सामाजिक समीकरण पर खास फोकस दिखाई दे रहा है. 

भाजपा ने 51 महिलाओं को दिया टिकट

महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के सिद्धांत पर चलते हुए बीजेपी ने इस चुनाव में 35 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया है. पार्टी की सूची में महिला मोर्चा से जुड़ी कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय से संगठन में सक्रिय महिला चेहरों को भी मौका दिया गया है. 

वार्ड 47 से दीपा नाथावत, वार्ड 56 से रेखा सैनी, वार्ड 107 से अनुराधा माहेश्वरी और वार्ड 123 से पूनम मेहता को टिकट दिया गया है. 

सबसे चर्चित नाम कांग्रेस की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल का है. भाजपा ने उन्हें वार्ड 110 से प्रत्याशी बनाया है. ज्योति खंडेलवाल जयपुर नगर निगम की महापौर रह चुकी हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रही हैं. अब भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने से वार्ड 110 का मुकाबला खास हो गया है. 

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8 मुस्लिम चेहरों पर भाजपा का दांव

भाजपा ने जयपुर के मुस्लिम बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में भी अपने उम्मीदवार उतारकर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है.  इसके तहत पार्टी ने 8 मुस्लिम नेताओं को पार्षद का टिकट दिया है. 

वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, वार्ड 109 से जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113 से फरीदुद्दीन ‘जैकी’, वार्ड 117 से शब्बो जहां, वार्ड 128 से माजिद पठान, वार्ड 136 से मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 से रहीस मंसूरी और वार्ड 146 से अफसाना को टिकट मिला है. 

इनमें वार्ड 19 सबसे ज्यादा चर्चा में है. सामान्य सीट होने के बावजूद बीजेपी ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. इसे पार्टी की वार्डवार सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. 

कांग्रेस ने संगठन के पदाधिकारियों को मैदान में उतारा

कांग्रेस ने भी टिकट वितरण में अपने संगठन को महत्व दिया है. पार्टी की सूची में कई ऐसे चेहरे हैं जो संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं.

कांग्रेस ने 4 ब्लॉक अध्यक्षों को चुनाव मैदान में उतारा है. इससे साफ है कि पार्टी ने संगठन में सक्रिय और अपने क्षेत्र में पकड़ रखने वाले नेताओं को सीधे चुनावी जिम्मेदारी देने का फैसला किया है. 

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पीसीसी के 2 प्रकोष्ठ प्रमुख भी मैदान में हैं. इनके जरिए पार्टी ने संगठनात्मक नेटवर्क और स्थानीय जनसंपर्क को चुनाव में इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई है. पार्टी ने एक पीसीसी सचिव को भी प्रत्याशी बनाया है. इसका अर्थ यह है कि पार्टी की सूची में संगठन के जमीनी और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का प्रतिनिधित्व दिखाई दे रहा है. 

कांग्रेस ने कई मौजूदा पार्षदों को भी दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है. पार्टी ने अपने मौजूदा जनप्रतिनिधियों के स्थानीय जनाधार और वार्ड में सक्रियता को टिकट का आधार बनाया है. 

कांग्रेस की रणनीति अपने पुराने संगठन और मौजूदा पार्षदों के नेटवर्क के सहारे भाजपा को चुनौती देने की है. हालांकि कई वार्डों में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार दोनों दलों के लिए चुनौती बन सकते हैं. 

2500 से ज्यादा दावेदारों में से भाजपा ने चुने 150 चेहरे

जयपुर के निगम चुनाव के लिए बीजेपी में कई दिनों तक मंथन चला.  150 वार्डों के लिए करीब 2500 से ज्यादा दावेदारों ने टिकट की दावेदारी की थी. पार्टी के सामने जिताऊ उम्मीदवार चुनने के साथ पुराने कार्यकर्ताओं, जातीय समीकरण और स्थानीय प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती थी. 

भाजपा की सूची में महिला, युवा, सामाजिक और संगठन से जुड़े चेहरों का मिश्रण दिखाई दे रहा है. पार्टी ने वार्डवार समीकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है.

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अब बागियों और स्थानीय समीकरणों की परीक्षा

टिकट वितरण के बाद दोनों प्रमुख दलों के सामने अगली चुनौती बागियों को संभालने की है. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरते हैं या किसी दूसरे दल का रुख करते हैं तो कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है. 

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