राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने कई बड़े नेताओं के गढ़ में सियासी तस्वीर बदल दी है. राज्य के 50 जिलों की कुल 309 शहरी निकायों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिका के वार्ड पार्षद चुनाव में बीजेपी ने कई बड़े शहरों में अच्छा प्रदर्शन किया है तो कांग्रेस भी जबरदस्त टक्कर देती नजर आई. निकायों के नतीजों ने कई दिग्गजों का कद मजबूत किया है, तो कई नेताओं की पकड़ पर सवाल खड़े किए हैं.
निकाय चुनाव में जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, पाली और झालावाड़ के नतीजे बीजेपी के लिए चर्चा का विषय बन गए हैं. वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है. इसके बावजूद बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने अपना दबदबा कायम रखा तो कई अपनी सियासी जमीन भी नहीं बचा सके.
बीजेपी ने तमाम बड़े शहरों का बोर्ड जीतकर अपनी पकड़ का प्रदर्शन किया है, सीएम भजनलाल शर्मा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को अपने-अपने घरेलू मैदानों पर निर्दलीयों और कांग्रेस ने जोरदार डेंट लगाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद डोटासरा से लेकर बीजेपी के सीएम भजनलाल और डिप्टी सीएम दीया कुमारी में कौन गेनर रहा और कौन लूजर?
भजनलाल शर्मा के लिए कैसे रहे नतीजे
राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी को राज्य स्तर पर मिली बढ़त हौसला बढ़ाने वाली है. बीजेपी 4,179 वार्ड जीती, जबकि विपक्षी पार्टियां 3,613 वार्ड जीत सकी. इसके अलावा 2,273 वार्ड निर्दलीय उम्मीदवार जीते, जिससे वे कई शहरी निकायों में एक निर्णायक ताकत बनकर उभरेय. जयपुर, उदयपुर, कोटा, भीलवाड़ा के नगर निगम में बीजेपी को बहुमत ने मुख्यमंत्री के रूप में भजनलाल शर्मा की पकड़ को मजबूती दी है. जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 78 वार्ड जीतकर बोर्ड पर कब्जा जमाया.
NEET पेपर लीक का मामला, UGC नियमों को लेकर करणी सेना का विरोध और सरकारी स्कूलों की हालत के ख़िलाफ़ CJP का अभियान कुछ ऐसे मुद्दे थे, जिन्होंने राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया था. इसके बाद निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत काफी अहम मानी जा रही है. इसीलिए इस जीत का श्रेय मुख्यमंत्री को दिया जा रहा है.
पीएम मोदी ने कहा कि नतीजे 'डबल-इंजन सरकार' के तहत बीजेपी की विकास और सुशासन की नीतियों के लिए समर्थन दिखाते हैंय पीएम मोदी ने लिखा, 'नगर निकाय चुनावों में बीजेपी को शानदार जीत दिलाने के लिए राजस्थान की जनता का दिल से धन्यवाद. यह 'झूठ की गूंज' पर सच्चाई की जीत का सबूत है.'
हालांकि, भजनलाल शर्मा ने सीएम के रूप में बीजेपी को राज्य में बड़ी जीत दिलाई, लेकिन उनके गृह जिले भरतपुर नगर निगम में बीजेपी को भारी झटका लगा. भरतपुर के 65 वार्डों में निर्दलीयों ने 36 सीटों पर कब्जा कर लिया, जबकि बीजेपी महज 20 सीटों पर सिमट गई. भरतपुर की हार भजनलाल शर्मा के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है.
डिप्टी सीएम दीया कुमारी के लिए कैसे रहे नतीजे
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के लिए राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे कुल मिलाकर राहत भरे और उनका सियासी कद मजबूत करने वाले साबित हुए हैं, हालांकि उनके प्रभाव वाले इलाकों में कुछ चुनौतियां और विरोध भी देखने को मिले हैं. दीया कुमारी विद्याधर नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं. निकाय चुनाव में विद्याधर नगर क्षेत्र में आने वाले वार्डों में बीजेपी ने दमदार प्रदर्शन किया और कांग्रेस को बढ़त नहीं बनाने दी.
जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए बोर्ड पर कब्जा जमाया. राजधानी की इस बड़ी जीत का श्रेय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ-साथ जयपुर की प्रमुख चेहरा होने के नाते उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को भी मिला है. इस तरह दीया कुमारी निकाय चुनाव में गेनर बनकर उभरी हैं.
गहलोत-डोटासरा-पायलट के लिए कैसे रहे नतीजे
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर के नगर परिषद में कांग्रेस को एकतरफा जीत मिली है. सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने 65 में से 38 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया जबकि बीजेपी 22 सीटों पर ही सिमट गई. इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डोटासरा ने बीजेपी के मजबूत गढ़ों में कांग्रेस का बोर्ड बनवाकर संगठन स्तर पर अपनी रणनीति का लोहा मनवाया.
सचिन पायलट के लिए भी निकाय चुनाव के नतीजे काफी राहत देने वाले और शहरी क्षेत्रों में उनका प्रभाव साबित करने वाले रहे. सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक और प्रभाव वाले दौसा में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए नगर परिषदों पर अपना परचम लहराया. पायलट के प्रभाव क्षेत्र माने जाने वाले अजमेर नगर निगम के 80 वार्ड में से कांग्रेस 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि बीजेपी 32 सीटों पर पिछड़ गई. इसके अलावा गुर्जर बहुल बेल्ट में पायलट का सियासी दबदबा और मजबूत हुआ है.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए चुनाव नतीजे 'बराबरी की टक्कर' वाले रहे. गहलोत के अपने गृह नगर जोधपुर नगर निगम के 100 वार्ड में कांग्रेस और बीजेपी के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां दोनों पार्टियां 44-44 सीटों की बराबरी पर आकर रुक गईं. जोधपुर में स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण बोर्ड बनाने की चाबी 11 निर्दलीय पार्षदों के हाथ में चली गई है.
हालांकि, सत्ता खोने के बाद भी जोधपुर में बीजेपी को पूर्ण बहुमत न लेने देना गहलोत के व्यक्तिगत प्रभाव की वजह से ही संभव हो पाया, लेकिन गहलोत के बूथ पर कांग्रेस को हार मिली है. डोटासरा और पायलट की तरह गहलोत का जादू पूरी तरह नहीं चल सका.
मदन राठौड़ और वसुंधरा राजे बनीं लूजर
राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने राज्य स्तर पर भले ही बढ़त बनाई हो, लेकिन संगठन प्रमुख मदन राठौड़ और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए ये परिणाम बड़े व्यक्तिगत झटके वाले साबित हुए हैं.बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को बड़ा झटका उनके इलाके में लगा है. राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली नगर परिषद के 65 वार्ड में बीजेपी को झटका लगा, यहां कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि बीजेपी महज 21 सीटों पर सिमट गई. निर्दलीय 15 सीटों पर जीते.
बीजेपी की दिग्गज नेता और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गढ़ ढह गया. वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत सिंह का राजनीतिक गढ़ माना जाने वाला झालावाड़ जिला इस चुनाव में सबसे चर्चित नतीजों का गवाह बना. झालावाड़ नगर परिषद पर वर्षों से बीजेपी का वर्चस्व था. इस चुनाव में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर बीजेपी के गढ़ को पूरी तरह ढहा दिया और स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, जबकि बीजेपी को सिर्फ 13 सीटें ही मिल सकीं.
झालावाड़ जिले की 8 निकायों में से कांग्रेस ने 4 पर बहुमत हासिल किया (झालावाड़ नगर परिषद, भवानी मंडी, खानपुर, डग). वसुंधरा राजे जिस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. झालरापाटन, वहां बीजेपी ने अपनी साख बचा ली. झालरापाटन नगर पालिका में बीजेपी ने 22 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और अकलेरा एवं मनोहरथाना में भी बीजेपी का बोर्ड बनना तय हुआ है.
हनुमान बेनीवाल के लिए कैसे रहे नतीजे
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के लिए राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजे बहुत मुफीद नहीं रहे. बेनीवाल हैदराबाद के सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन तीसरी ताकत बनकर नहीं उभर सके.
केकड़ी नगर पालिका में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. कांग्रेस को 20, बीजेपी को 18 और RLP ने 2 सीटें जीती हैं, जिससे बोर्ड बनाने के लिए चाबी हनुमान बेनीवाल के हाथों में आ गई है. नागौर जिले की नगर पालिकाओं/परिषदों (जैसे बोरावड़, डीडवाना, बासनी आदि) में RLP ने अपने वार्ड प्रत्याशियों को जिताकर स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.
जयपुर नगर निगम चुनाव में RLP ने AIMIM के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और वार्ड 146 में उनके संयुक्त प्रत्याशी ने जीत हासिल की. बेनीवाल का मुख्य आधार ग्रामीण मतदाता और किसान बेल्ट माने जाते हैं. बड़े नगर निगमों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा आदि) में पार्टी कोई बड़ा करिश्मा नहीं दिखा सकी और मुख्य मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच ही सिमट गयाय राज्य स्तर पर बेनीवाल की पार्टी के 63 पार्षद जीत सके हैं.
कुबूल अहमद