राजस्थान के सीकर स्थित जीण माता के दर्शन करने के लिए लाखों भक्त हर वर्ष आते हैं. जीण माता मंदिर सीकर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर है. माता रानी का ये मंदिर हजारों साल पुराना बताया जाता है. मंदिर के निर्माण से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. माना जाता है कि 300 साल पहले मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था, उसके दस्तावेज जरूर उपलब्ध हैं. नवरात्र में यहां लाखों भक्त आते हैं. मंदिर से थोड़ी दूर पहाड़ की चोटी पर उनके भाई हर्ष भैरव नाथ का मंदिर है.
पुजारी ने बताया कि जीण माता का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ था. वह अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं. माता जीण अपनी भाभी के साथ तालाब से पानी लेने गई. पानी लेते समय भाभी और ननद में इस बात को लेकर झगड़ा शुरू हो गया कि हर्ष किसे ज्यादा स्नेह करता है. दोनों में यह निश्चय हुआ कि हर्ष जिसके सिर से पानी का मटका पहले उतारेगा वही उसका अधिक प्रिय होगा. भाभी और ननद दोनों मटका लेकर घर पहुंचीं, लेकिन हर्ष ने पहले अपनी पत्नी के सिर से पानी का मटका उतारा. इससे जीण माता नाराज हो गईं और आरावली के काजल शिखर पर पहुंच कर तपस्या करने लगीं.
हर्ष भैरव नाथ मंदिर की कहानी
तपस्या के प्रभाव से यहीं जीण माता का वास हो गया. अभी तक हर्ष इस विवाद से अनभिज्ञ था. इस शर्त के बारे में जब उन्हें पता चला तो वह अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने उन्हें मनाने काजल शिखर पर पहुंचे. उन्होंने अपनी बहन को घर चलने के लिए कहा, लेकिन माता ने घर जाने से मना कर दिया. बहन को वहां पर देख हर्ष भी पहाड़ी पर भैरों की तपस्या करने लगे. आज भी हर्ष पर्वत पर हर्ष भैरव नाथ का मंदिर है.
यह है मंदिर की कहानी
पुजारियों ने बताया कि माना जाता है कि जीण माता माता दुर्गा की अवतार हैं. जीण माता शेखावाटी इलाके की कई जातियों की कुलदेवी हैं. दूसरे राज्यों में भी बड़ी संख्या में माता को मानने वाले भक्त रहते हैं. जीण माता के मंदिर में बच्चों का मुंडन कराने के लिए भी भारी तादाद में भक्तगण आते हैं.
मान्यता है कि मुगल सम्राट औरंगजेब देश भर के मंदिरों को तोड़ते हुए हर्षनाथ भैरव मंदिर पहुंचा और यहां पर तोड़फोड़ की. इसके बाद जीण माता मंदिर तक पहुंचना चाहा, लेकिन उसके मंसूबे पूरे नहीं हो सके. औरंगजेब ने मंदिर को तोड़ने के लिए अपने सैनिकों को भेजा. इस बात का पता चलने पर स्थानीय लोग जीण माता से प्रार्थना करने लगे.
नवरात्र में होती है भारी भीड़
जीण मंदिर में हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ नवरात्रि में होती है. मंदिर कमेटी की ओर से मां जीण भवानी के दरबार को विशेष फूलों से सजाया गया है और माता का 21 शाही पोशाकों से श्रृंगार किया गया है. मेले के दौरान मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम अमृता खंडेलवाल एवं डीएसपी राहुल गोयल के नेतृत्व में सुरक्षा के कड़े इंतजाम यहां पर किए गए हैं.
मंदिर कमेटी ने यहां पर व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त गार्ड लगाए हैं, इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी मेले की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. दावा किया जाता है कि जीण माता मंदिर में आज भी औरंगजेब की जलाई ज्योत जलती है. जबकि सीढ़ियां मुस्लिम परिवार धोता है.
राकेश कुमार