राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम केवल शहरों के मेयर या चेयरमैन चुनने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के 'फर्स्ट सेमीफाइनल' और 'शहरी सियासी मूड' के तौर पर देखा जा रहा है. सीटों के लिहाज से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो कांग्रेस को झटका लगा है.
शहरी निकाय चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी ने अपना दबदबा कायम रखा. राज्य के 10,245 वार्डों के नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते जबकि कांग्रेस को 3,613 सीटें मिलीं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने पूरे राज्य में जबरदस्त प्रदर्शन किया और 2,273 वार्ड जीते, जिससे वे कई शहरों में किंगमेकर बनकर उभरे हैं.
राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस को पिछले चुनाव की तुलना में पांच फीसदी वोटों का झटका लगा है तो बीजेपी को एक फीसदी वोट का लाभ मिला है. इस तरह से निकाय चुनाव के वोट शेयर और नतीजे ने 2028 के चुनाव का मूड सेट कर दिया है. इसीलिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने लिहाज से चुनावी नतीजों को देख रही हैं.
कांग्रेस को 5% का घाटा, बीजेपी को 1% का फायदा
राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी को 36.11 फीसदी और कांग्रेस को 35.14 फीसदी वोट शेयर मिला है. 27.75 फीसदी वोट निर्दलीय उम्मीदवारों को मिले हैं. इस तरह दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर एक फीसदी से भी कम है. इस प्रकार बीजेपी और कांग्रेस के बीच क्लोज फाइट की बिसात दिख रही है. बीजेपी भले ही सत्ता में है, लेकिन कांग्रेस शहरी इलाकों में उससे बिल्कुल सटकर खड़ी है.
वहीं, 2021 के निकाय चुनाव के नतीजों को देखते हैं तो भाजपा को 35.11 फीसदी, कांग्रेस को 40.30 फीसदी और निर्दलीय उम्मीदवारों को 24.59 फीसदी वोट मिले थे. इस तरह जब 2026 के निकाय चुनाव नतीजे में मिले वोट शेयर की तुलना करते हैं तो बीजेपी को एक फीसदी की बढ़त दिख रही है और कांग्रेस के वोट शेयर में 5.16 फीसदी की कमी आई है. निर्दलीय और नोटा के वोट शेयर में 3.16 फीसदी की बढ़त है.
राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजे किसके लिए मुफीद
राजस्थान नगर निकाय के कुल 10,245 वार्ड के चुनावी नतीजे देखें तो बीजेपी 4,179, कांग्रेस 3,613 और निर्दलीय 2,273 वार्ड में जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं. इसके अलावा आरएलपी 63 सीटें, आम आदमी पार्टी 42, सीपीआई (एम) 38, बसपा 19 और भारत आदिवासी पार्टी 8 पार्षद सीटें जीतने में सफल रही हैं.
राज्य के 10 नगर निगम में से जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है. वहीं, कांग्रेस ने 1 नगर निगम (बीकानेर) में स्पष्ट बहुमत हासिल किया और 2 निगमों (अजमेर, पाली) में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इसके अलावा जोधपुर, भरतपुर और अलवर में मुकाबला त्रिशंकु रहा.
47 नगर परिषदों के चुनाव में बीजेपी ने 21 नगर परिषदों में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है. कांग्रेस ने 17 नगर परिषद में जीत दर्ज की है। इसके अलावा 9 नगर परिषद में निर्दलीय पार्षदों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसी तरह 252 नगर पालिकायों के नतीजे देखें तो भाजपा को 149 नगर पालिका में बहुमत मिला है तो कांग्रेस को 95 नगर पालिकायों में जीत मिली है. इसके अलावा 8 नगर पालिका में निर्दलीय को बढ़त है.
309 निकायों में से 145 निकायों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. निर्दलीयों को 27.47 फीसदी वोट शेयर मिला है और उन्होंने 2,200 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज की है. इस तरह 2028 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को 'बागियों' और निर्दलीय उम्मीदवारों से भारी खतरा रहेगा. ऐसे में टिकट वितरण में जरा सी चूक का खामियाजा बड़े दलों को उठाना पड़ सकता है.
राजस्थान का मूड सेट करेगा निकाय चुनाव
2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ मिली जीत के बाद बीजेपी ने वसुंधरा राजे जैसे बड़े नेताओं को नजरअंदाज करते हुए भजनलाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था. बीजेपी इस बात से खुश होगी कि कुछ नुकसान के बावजूद, कुल मिलाकर राज्य भर में उसका दबदबा कायम है. मुख्यमंत्री नतीजों से खास तौर पर संतुष्ट होंगे क्योंकि ये नतीजे हाल के दिनों में उठे कई विवादों के बीच आए हैं.
NEET पेपर लीक का मामला, UGC नियमों को लेकर करणी सेना का विरोध और सरकारी स्कूलों की हालत के खिलाफ CJP का अभियान कुछ ऐसे मुद्दे थे जिन्होंने राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया था. ऐसे में नतीजों से पता चलता है कि इन मुद्दों का पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा. भजनलाल शर्मा ने पार्टी पर भरोसा जताने के लिए वोटरों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि राज्य में हुए विकास कार्यों पर जनता ने अपनी मुहर लगाई है.
कांग्रेस ने कुछ अहम नगर निकायों में अच्छी बढ़त हासिल की है, लेकिन पार्टी को इस बात की चिंता होनी चाहिए कि AAP और CPM विपक्ष की जगह ले रहे हैं. बारां में AAP और नोखा में CPM की जीत कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जब स्थानीय चुनाव होते हैं, तो ज्यादातर वोट सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में जाते हैं, यह लंबे समय से चलन रहा है, लेकिन इस बार बीजेपी पूरी तरह से बढ़त नहीं बना सकी.
बीजेपी के लिए क्यों टेंशन बढ़ाने वाला है?
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन राजस्थान निकाय चुनाव में उसके वोट घटकर 35 फीसदी पर आ गए हैं. बीजेपी जब भी सत्ता में रही है, उसके और कांग्रेस के बीच 9 फीसदी के वोट का अंतर रहता था. पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस सत्ता में थी तो बीजेपी से साढे चार फीसदी वोट शेयर उसका ज्यादा था.
राजस्थान के 10 में से 4 नगर निगम में ही बीजेपी बहुमत हासिल कर सकी है जबकि बाकी 6 नगर निगम में कांग्रेस और निर्दलीय आगे हैं., इससे पता चलता है कि सूबे में बीजेपी के लिए यह अलार्म है. कांग्रेस ने वसुंधरा राजे के गढ़ में जिस तरह जीत दर्ज की है, वह भी एक बड़ी चुनौती है. इसी तरह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली नगर परिषद में कांग्रेस की जीत बीजेपी के लिए झटका है.
2028 के विधानसभा चुनावों में अभी दो साल से ज्यादा का समय है और ये चुनावी नतीजे सभी अहम पक्षों के लिए अपनी रणनीति में सुधार का आधार बनेंगे. 2023 में बीजेपी ने 41 फीसदी वोट शेयर के साथ 115 सीटें जीती थीं तो कांग्रेस 39.58 फीसदी वोट के साथ 70 सीटें जीती थी.
2026 के निकाय चुनाव ने बीजेपी को राहत तो दी है कि वह शहरों में अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही, लेकिन कांग्रेस की मजबूत वापसी और निर्दलीयों के दबदबे ने संदेश दे दिया है. ऐसे में 2028 की चुनावी जंग बेहद कांटे की होने वाली है.
कुबूल अहमद / शरत कुमार