राजस्थान में दो बच्चे अपने परिवार से बिछड़ गए थे. परिवार के लोगों ने पुलिस के चक्कर लगाए, रिश्तेदारों से पूछा और हर गुजरते दिन के साथ इस उम्मीद में रहे कि शायद आज उसकी कोई खबर मिल जाए. लेकिन दिन महीनों में और महीने सालों में बदल गए, अब भी उनका कोई पता नहीं चला है. ऐसे में एक सवाल बार-बार मन में आता होगा. जो बच्चा उस दिन छोटा-सा था, वह आज कैसा दिखता होगा? उसका चेहरा कितना बदल गया होगा? क्या उसे भी अपने परिवार की याद आती होगी?
राजस्थान के अजमेर में रेलवे पुलिस अब ऐसे ही सवालों का जवाब तलाशने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद ले रही है. अजमेर राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने सालों पहले रेलवे स्टेशन से लापता हुए दो बच्चों की बचपन की तस्वीरों के आधार पर उनके बड़े होने पर संभावित चेहरे तैयार कराए हैं.
इनमें एक मोहम्मद इमरान है, जो करीब 16 साल पहले लापता हुआ था. दूसरा उस्मान है, जो साल 2014 में अपनी मां से बिछड़ गया था. पुलिस ने 22 अक्टूबर को इन तस्वीरों को पब्लिक किया है. उम्मीद ये है कि आज के चेहरे से मिलती-जुलती तस्वीर देखकर कोई उन्हें पहचान सके और उनकी तलाश आगे बढ़ सके.
पहली कहानी मोहम्मद इमरान की है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 मई 2010 को हैदराबाद के रेन बाजार थाना क्षेत्र में रहने वाले 65 साल के मोहम्मद यूसुफ अपने परिवार के साथ अजमेर आए थे. यात्रा पूरी होने के बाद परिवार वापस लौट रहा था. इसी दौरान अजमेर रेलवे स्टेशन की भीड़ में यूसुफ का 8 साल का नाती इमरान अचानक लापता हो गया.
रेलवे स्टेशन पर हर तरफ लोग थे. कोई ट्रेन पकड़ने की जल्दी में था, कोई अपने परिवार के साथ घर लौट रहा था. इसी भीड़ में एक बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया. परिवार ने तलाश की, लेकिन इमरान नहीं मिला. 29 मई 2010 को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. बाद में 12 जुलाई 2013 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई.
लेकिन वक्त गुजरता गया. जिस बच्चे की तस्वीर पुलिस के पास थी, वह तस्वीर उसके आठ साल की उम्र की थी. अब वह करीब 23 साल का हो चुका होगा. इतने सालों में चेहरे की बनावट बदल सकती है, बचपन की पहचान धुंधली पड़ सकती है. यही वजह है कि पुलिस ने उसकी पुरानी तस्वीर को AI की मदद से उसके मौजूदा उम्र के संभावित चेहरे में बदलवाने की कोशिश की है.
इमरान की कलाई पर मस्सा, सिर पर चोट के निशान
किसी लापता व्यक्ति की तलाश में तस्वीर के अलावा छोटी-छोटी शारीरिक पहचान भी अहम हो सकती हैं. इमरान के मामले में पुलिस रिकॉर्ड में ऐसी कुछ बातें दर्ज हैं. पुलिस के मुताबिक, इमरान का शरीर इकहरा था और उसकी त्वचा का रंग सांवला बताया गया है. उसके दाहिने हाथ की कलाई पर एक मस्सा था.
बचपन में सिर पर चोट लगने के कारण टांके भी लगे थे. इसके अलावा, वह बोलते समय तुतलाता था. ये बातें आज भी उसकी पहचान तक पहुंचने में मददगार हो सकती हैं. हालांकि, इतने साल बाद इनमें से कौन-सी पहचान मौजूद है और किस हद तक बदली है, यह कहना मुश्किल है.
AI से तैयार तस्वीर पुलिस के लिए एक नया सुराग है, कोई पक्का सबूत नहीं. लेकिन अगर किसी को तस्वीर देखकर इमरान की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी मिलती है, तो उसकी तलाश को आगे बढ़ाया जा सकता है.
उस्मान मां के साथ अजमेर आया, फिर स्टेशन पर बिछड़ गया
दूसरी कहानी उस्मान की है. वह साल 2014 में अपनी मां नजमा के साथ अजमेर आया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, नजमा जयपुर निवासी किशोर की पत्नी थीं. 29 अप्रैल 2014 को वह अपने बेटे उस्मान को लेकर अजमेर पहुंची थीं. उसी दिन दोपहर करीब 3 बजकर 45 मिनट पर अजमेर रेलवे स्टेशन पर उस्मान अपनी मां से बिछड़ गया. परिवार ने उसे तलाश किया, लेकिन उसका पता नहीं चला.
13 जून 2014 को इस मामले में अजमेर जीआरपी थाने में केस दर्ज किया गया. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की. उस वक्त उस्मान की उम्र करीब 5 साल 6 महीने थी. आज वह लगभग 17 साल का किशोर हो चुका होगा. यानी उसकी पुरानी तस्वीर और आज के चेहरे के बीच करीब 11 साल से ज्यादा का अंतर है. पुलिस ने उसकी बचपन की तस्वीर को भी AI सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार कराया है, ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि वह अब कैसा दिख सकता है.
आंखों में हल्का भेंगापन, गोल चेहरा... उस्मान की पहचान के संकेत
पुलिस रिकॉर्ड में उस्मान का रंग गोरा, चेहरा गोल और शरीर इकहरा बताया गया है. उसकी आंखों में हल्का भेंगापन भी दर्ज है. यह उसकी पहचान का संकेत हो सकता है. अब पुलिस की कोशिश है कि उसकी बचपन की तस्वीर के साथ तैयार किया गया संभावित मौजूदा चेहरा लोगों तक पहुंचे. हो सकता है कि कोई उसे जानता हो, उसके साथ रहा हो या उसके बारे में कोई ऐसी जानकारी रखता हो, जो पुलिस की तलाश में मदद कर सके.
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बच्चों के लापता होने के मामलों में समय सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. जिस उम्र में बच्चा गायब हुआ था, उस उम्र की तस्वीर कुछ साल बाद उसकी पहचान कराने के लिए पर्याप्त नहीं रह जाती. खासकर तब, जब बच्चा बड़ा होकर किशोर या युवा हो चुका हो. AI की मदद से पुरानी तस्वीर के आधार पर उम्र बढ़ने के बाद संभावित चेहरा तैयार किया जा सकता है. इससे तलाश के लिए एक अतिरिक्त सुराग मिल सकता है.
अजमेर जीआरपी ने इन दोनों मामलों में इसी तकनीक का इस्तेमाल किया है. पुलिस के मुताबिक, यह उसके लिए इस तरह की पहली पहल है. अब तस्वीरें आम लोगों तक पहुंचाकर पहचान में मदद मांगी जा रही है.
16 साल का इंतजार, और एक नई उम्मीद
इमरान के लापता होने के बाद करीब 16 साल गुजर चुके हैं. उस्मान को अपनी मां से बिछड़े भी 12 साल से ज्यादा वक्त हो गया है. इस दौरान उनकी जिंदगी कहां पहुंची, वे किस हाल में हैं और उन्हें अपने परिवार के बारे में कुछ याद है या नहीं, इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं हैं. AI से तैयार तस्वीरें पुलिस की तलाश में एक नया रास्ता जरूर खोल सकती हैं. अजमेर पुलिस की यह कोशिश इसी उम्मीद पर टिकी है कि तकनीक की मदद से शायद उन दो परिवारों को कोई खबर मिल सके, जिसका वे सालों से इंतजार कर रहे हैं.
चंद्रशेखर शर्मा