24 सितंबर की रात थी. कोटद्वार के उदयरामपुर कलालघाटी में रहने वाली मीना देवी ने बेटे युवराज से फोन पर बात की. बेटा अबू धाबी में था. करीब पांच साल से विदेश में होटल की नौकरी कर रहा था. बात हुई. सब ठीक लगा. लेकिन परिवार को नहीं पता था कि युवराज से ये उनकी आखिरी बातचीत होने वाली है. तीन दिन बाद फोन बंद हो गया. परिजनों ने जब युवराज से दोबारा बात करने की कोशिश की तो फोन स्विच ऑफ मिला.
पहले लगा होगा कि फोन की बैटरी खत्म होगी. फिर दोबारा कोशिश की. फिर की. लेकिन फोन चालू नहीं हुआ. परिवार ने युवराज की मंगेतर से संपर्क किया. वह भी अबू धाबी में रहती हैं. मंगेतर के मुताबिक, युवराज 27 सितंबर को अपने कमरे से किसी काम के लिए बाहर निकला था. लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटा.
युवराज कहां गया? यही सवाल अब परिवार के सामने है. युवराज करीब पांच साल से होटल लाइन में काम कर रहा था. परिवार ने होटल के मैनेजर से भी संपर्क किया. मैनेजर की ओर से परिवार को कथित तौर पर बताया गया कि युवराज दो दिन की छुट्टी पर गया था और तीसरे दिन उसे काम पर लौटना था. लेकिन तीसरे दिन युवराज होटल नहीं पहुंचा. फिर परिवार ने दूतावास से संपर्क किया.
परिवार के मुताबिक, भारतीय दूतावास से उन्हें जानकारी मिली कि युवराज का Exit हो गया है. अब परिवार सोच में पड़ गया. अगर युवराज ने अबू धाबी से Exit किया, तो फिर वह गया कहां? क्या वह भारत के लिए निकला था? अगर निकला था तो भारत पहुंचा क्यों नहीं? और अगर भारत पहुंचा है तो परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया? परिवार के पास फिलहाल इन सवालों का कोई जवाब नहीं है.
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युवराज के भाई दीपक का कहना है कि परिवार लगातार उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि वहां से Exit होने की जानकारी तो मिल रही है, लेकिन इसके बाद युवराज कहां गया, इसकी कोई जानकारी नहीं है. भाई का कहना है कि अगर उन्हें इतना पता चल जाए कि युवराज किस जगह गया है तो वे उसकी तलाश कर सकेंगे.
युवराज के पिता गोविंद सिंह मजदूरी करते हैं. परिवार के मुताबिक, युवराज पिछले करीब पांच साल से विदेश में काम करके घर की आर्थिक मदद कर रहा था. एक तरफ बेटे की कोई खबर नहीं. दूसरी तरफ यह भी पता नहीं कि उसे तलाशना कहां से शुरू करें. परिवार अब सरकारी स्तर पर भी मदद मांग रहा है. युवराज के भाई के मुताबिक, कोटद्वार के SDM को शिकायती पत्र दिया गया है. इसके अलावा परिवार ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी से भी मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई है.
परिवार के लोगों का कहना है कि वे विदेश में रहने और वहां की प्रक्रियाओं से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं. इसलिए भारत सरकार और भारतीय दूतावास से युवराज की तलाश में मदद की अपील कर रहे हैं. युवराज की मां को आखिरी बार 24 सितंबर की रात बेटे की आवाज सुनाई दी थी.
27 सितंबर को वह कमरे से निकला. फिर फोन बंद हो गया. होटल में भी वापस नहीं पहुंचा. परिवार को उसके Exit की जानकारी मिली, लेकिन उसके बाद उसकी लोकेशन का पता नहीं चला. अब कोटद्वार में परिवार सिर्फ एक खबर का इंतजार कर रहा है. युवराज जहां भी हो, सुरक्षित हो. और किसी दिन अचानक उसका फोन आए और दूसरी तरफ से वही आवाज सुनाई दे- 'मां, मैं ठीक हूं.'
विकास वर्मा