चढ़ावा, चंपत और यूपी चुनाव... बीजेपी को कितना डैमेज और कितना कंट्रोल?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अयोध्या में जो कुछ हुआ है, बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है. लेकिन, राहत की बात बस इतनी है कि विपक्ष मुद्दा उठाने के नाम पर बयानबाजी की रस्मअदायगी भर निभा रहा है.

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय. (Photo: ITG) श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय. (Photo: ITG)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

सवाल उठ रहे हैं कि श्रीराम मंदिर न्यास के ट्रस्टियों का चढ़ावे की चोरी का पहले से पता था? चंपत राय का इस्तीफा बहुत देर से आया. तब तक दुरुस्त करने के लिए कुछ बचा भी नहीं था. चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे. अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद के मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है. 

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या गए थे. चंपत राय को योगी आदित्यनाथ के दौरे से दूर रखा गया था. तभी से लगने लगा था कि चंपत राय की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. चंपत राय के साथ मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है. 

उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं, लेकिन समय से पहले चुनाव कराए जाने की भी खबरें आ रही हैं. यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या का चढ़ावा चोरी कांड और चंपत राय का कठघरे में खड़ा हो जाना, बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत है. 

चंपत राय के इस्तीफे के बाद क्या?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. बीजेपी अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का श्रेय लेती है, जिसकी केंद्र में भी सरकार है. 2024 की शुरुआत में अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन समारोह हुआ था, लेकिन उसके कुछ ही दिन बाद हुए आम चुनाव में बीजेपी अयोध्या (फैजाबाद लोकसभा सीट) समाजवादी पार्टी से हार गई थी. 

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चंपत राय ने SIT जांच के बहाने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया था. प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रस्ट से पूरा वित्तीय ब्योरा मांगा था. असल में, अयोध्या के बीजेपी नेता डॉक्टर रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग की थी कि राम मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करे.

चंपत राय के इस्तीफे से बीजेपी नेता रजनीश सिंह संतुष्ट नहीं हैं. रजनीश सिंह का कहना है सिर्फ इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, क्योंकि इस्तीफा देने में बहुत देर कर दी है. रजनीश सिंह का कहना है, इस्तीफा तो उसी दिन दे देना चाहिए था, जिस दिन उन पर आरोप लगे थे. आजतक से बातचीत में रजनीश सिंह ने दावा किया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ही जेल जाएंगे. बोले, 'अनिल मिश्रा के खिलाफ साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है, उनका घर देख लीजिए, तीन मंजिला मकान है, लिफ्ट लगी है, कहां से पैसा आ रहा है? लड़का विदेश में पढ़ रहा है... SIT के सामने मजबूत साक्ष्य आया होगा, तभी इन्होंने इस्तीफा दिया है. इनकी संपत्ति की जांच होगी और ये लोग जेल जाएंगे.'

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SIT की जांच, और आगे की पड़ताल

7 जून को पहली बार श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया. उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT बना दी. SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) संजय प्रसाद को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी - और अब 26 जून को चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है. 

अयोध्या का यह पूरा मामला चंपत राय के ही इर्द गिर्द घूम रहा है. चुनाव के ऐन पहले चंपत राय वो किरदार बन गए हैं, जिसने बीजेपी के सामने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. शुरू में चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर आरोपों का खंडन भी किया था, लेकिन एसआईटी बना दिए जाने के बाद से उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली. 

उत्तर प्रदेश के ही बिजनौर से आने वाले चंपत राय डिग्री कॉलेज में वे केमिस्ट्री पढ़ाते थे. लेकिन, बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में काम करने लगे. चंपत राय के पिता भी संघ से जुड़े थे, और उसी पारिवारिक माहौल से उनको यह दिशा मिली. संघ से ही चंपत राय विश्व हिंदू परिषद में आए थे. और, बाद में  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बनाए गए. 

अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन बीजेपी ने शुरू किया था जिससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद भी जुड़ गए थे. मंदिर बनने के बाद संघ ने आंदोलन की पूर्णाहूति मानते हुए खुद को अलग कर लिया. अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया, और उसी में चंपत राय को महासचिव बनाया गया था.  

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में FIR दर्ज कराई गई थी. लेकिन, एफआईआर में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं है. जिन 8 आरोपियों के एफआईआर में नाम हैं, सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में चंपत राय का ड्राइवर और करीबी सहयोगी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल है. 

कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच अभी चल रही है, लेकिन पहले आई रिपोर्ट में कहा गया था कि SIT की शुरुआती जांच पड़ताल में चंपत राय के खिलाफ किसी तरह की आपराधिक कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं. अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान जो भी जानकारी मिलेगी, आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय होगी. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में अपने अयोध्या दौरे और सरकार के एसआईटी गठन का जोर देकर जिक्र किया. बोले, मैंने 19 जून को अयोध्या के दौरे पर कहा था, जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो... अयोध्या हम सबकी आस्था का प्रतीक है... अयोध्या पर आक्षेप मत करो, श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कार्रवाई भी प्रारंभ हो जाएगी... और आपने देखा कि एसआईटी की रिपोर्ट आई और तुरंत कार्रवाई प्रारंभ हो गई.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अयोध्या का यह कांड चुनाव से पहले सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. योगी आदित्यनाथ हर हाल में मुद्दे को न्यूट्रलाइज करने की कोशिश में लगे हुए हैं. योगी आदित्यनाथ जांच की भी बात कर रहे हैं, और ऐन उसी वक्त विपक्ष पर भी हमला बोल दे रहे हैं. 

क्या विपक्ष ने मौका गंवा दिया

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के लिए यह सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है, लेकिन कहीं कोई मजबूत आवाज नहीं नजर आ रही है. यह जरूर है कि आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह बहुत पहले से जमीन खरीद में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते रहे हैं. 

यह भी संयोग है कि जिस दिन आम आदमी पार्टी के नेता अयोध्या पहुंचे, उसी दिन चंपत राय ने इस्तीफा दिया है. दर्शन के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, हमने भगवान राम के दर्शन किए, और मंदिर में हुए इतने बड़े घोटाले को लेकर प्रभु से प्रार्थना की है... जिन्होंने भी यह पाप किया है और आस्था के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें भगवान राम कठोर से कठोर सजा दें.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया, 'यह पूरी तरह साफ है कि भ्रष्टाचार की कड़ियां और तार बहुत ऊपर तक जुड़े हुए हैं. इस मामले में असली प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूरा दोष निचले स्तर के कर्मचारियों के सिर मढ़ा जा रहा है.'

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अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर देवरिया में योगी आदित्यनाथ ने कहा, दिल्‍ली से भी आज एक सज्‍जन वहां आए हैं, और मैं उनसे भी कहना चाहूंगा कि दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्षों तक अवसर दिया, लेकिन दिल्‍ली को उन्होंने बर्बादी और भ्रष्टाचार के सिवाय कुछ नहीं दिया.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, जैसा न्याय अयोध्या के साथ डबल इंजन की भाजपा सरकार ने किया है, अगर यही न्‍याय आम आदमी पार्टी दिल्‍ली के साथ करती तो दिल्ली भी चमकती, जैसे आज अयोध्या धाम चमक रहा है.

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोशल साइट X पर एक पोस्ट में लिखा है, जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ कर दिए गए होंगे, और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है... उसके बाद FIR हो रही है.

योगी आदित्यनाथ ने देवरिया की सभा में अखिलेश यादव को भी निशाना बनाया, 'ये जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, उठाने का कुंठित प्रयास कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है. ये वे लोग हैं, जो भगवान राम को नकार चुके थे. भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा कर चुके थे. एक पक्ष उसमें है, जो कहता था कि राम हुए ही नहीं, यानी अयोध्या को भी ये नकारना चाहते थे.

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यूपी में समाजवादी पार्टी की गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा पार्टी संसद के मानसून सत्र में उठाएगी. केसी वेणुगोपाल ने कहा, यह देश के सबसे बड़े मुद्दों में से एक है. हम इस मुद्दे को नहीं छोड़ सकते. करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. ट्रस्ट खुद सवालों के घेरे में है. सरकार को इस पर जवाब देना होगा.

और, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने सोशल साइट X पर पूछा है, राम मंदिर के लिए उद्धव ठाकरे ने 1 करोड़ रुपये और 4 किलो चांदी की ईंट दान की थी... इतने साल बाद भी ट्रस्ट की ओर से रसीद नहीं मिली है. आखिर ईंट कहां गई? अब जवाबदेही तय करने का समय आ गया है.

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