SIR के मुद्दे पर डीके शिवकुमार का स्टैंड राहुल गांधी से अलग क्यों?

SIR पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का स्टैंड कांग्रेस लीडरशिप से थोड़ा अलग होना हैरान करने वाला है. डीके शिवकुमार के बयान से तो लग रहा है, जैसे वो राहुल गांधी की तरह एसआईआर के विरोध की जगह सपोर्ट कर रहे हों - डीके विपक्ष के पहले मुख्यमंत्री हैं जो SIR की कर्नाटक में सिफारिश कर रहे हैं.

Advertisement
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार. (Photo: PTI) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

कर्नाटक में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनकी पत्नी उषा शिवकुमार ने SIR फॉर्म भर दिया है. और, साथ ही डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के सभी लोगों से निश्चित तौर पर फॉर्म भरने की अपील की है,  ताकि उनके वोटिंग के अधिकार बचे रहें. 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वोट देने के अधिकार को जीवन के अधिकार जैसा बताया है, और लगे हाथ आगाह भी किया है कि वोटिंग का अधिकार गंवा देने पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है. डीके शिवकुमार का कहना है कि BLO घर-घर जाकर SIR प्रक्रिया वाले फॉर्म बांट रहे हैं. 

Advertisement

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का बयान तो कांग्रेस की पार्टी लाइन के खिलाफ जाता हुआ लग रहा है. कांग्रेस और राहुल गांधी तो SIR का विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस तो देश के 23 विपक्षी दलों के साथ CJI जस्टिस सूर्यकांत को पत्र भेजकर SIR और चुनाव नतीजों में कथित हेरफेर की शिकायत की है, और न्यायपालिका से हस्तक्षेप करने की मांग की है. 

कर्नाटक में SIR को डीके शिवकुमार का समर्थन 

कर्नाटक के लोगों से मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अपील से तो लग रहा है जैसे SIR की सिफारिश कर रहे हों. डीके शिवकुमार विपक्षी खेमे के पहले मुख्यमंत्री लगते हैं जो खुलकर SIR का समर्थन कर रहा हो. अपील जारी करने से पहले डीके शिवकुमार ने पत्नी के साथ मिल करके खुद फॉर्म भरकर जमा किया है. 

डीके शिवकुमार ने साफ तौर पर बोल दिया है कि वोटिंग का अधिकार बचाए रखने के लिए सभी मतदाताओं को समय पर फॉर्म भरकर जमा करना जरूरी है, नहीं तो नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है. डिजिटल साक्षरता को लेकर जताई जा रही चिंता पर डीके शिवकुमार ने माना कि कई लोग ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हो सकते. अपने बारे में डीके शिवकुमार ने बताया, मैं खुद भी ऐप का इस्तेमाल नहीं करता, और इसके लिए दूसरों की मदद ली है. जो लोग ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर सकते, वे बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) से फॉर्म लेकर उसे ऑफलाइन जमा कर सकते हैं.

Advertisement

SIR की सरल प्रक्रिया की प्रशंसा करते हुए डीके शिवकुमार ने समझाया है कि इसे आसान बनाने के लिए परिवार का एक ही सदस्य चाहे तो पूरे परिवार की ओर से सभी के फॉर्म भर सकता है, और फॉर्म पर हस्ताक्षर भी कर सकता है. बोले, एसआईआर प्रक्रिया के जरिए वोटर अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, नाम और फोटो सहित अपनी निजी जानकारी अपडेट कर सकते हैं. अगर वोटर का मोबाइल नंबर मतदाता पहचान पत्र बनवाने के बाद बदल गया है, तो उसे SIR प्रक्रिया के दौरान अपडेट किया जा सकता है. और हां, जिन लोगों की उम्र 18 साल हो चुकी है, वे लोग चुनाव आयोग का फॉर्म-6 भरकर नया वोटर आईडी बनवा सकते हैं.

मुख्यमंत्री के मुताबिक, 30 जून से शुरू होकर SIR प्रक्रिया 29 जुलाई तक चलेगी, और फॉर्म को 30 दिन के अंदर जरूरी दस्तावेजों और अपनी नई फोटो के साथ भरकर जमा करना हर वोटर की जिम्मेदारी है. वोटर लिस्ट 5 अगस्त को जारी की जाएगी. बता दें कि कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है. 

आयोग द्वारा नियुक्त बीएलओ हर घर का दौरा करेंगे और SIR के लिए फॉर्म देंगे. उन्होंने स्पष्ट कहा, 'अगर आपको फॉर्म मिलता है लेकिन आप उसे जमा नहीं करते हैं, तो आप अपना वोटिंग अधिकार खो देंगे. फॉर्म को 30 दिनों के अंदर जरूरी दस्तावेजों और अपनी नई फोटो के साथ भरकर जमा करना हर वोटर की जिम्मेदारी है. इसके बाद 5 अगस्त को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा.'

Advertisement

साथ ही, डीके शिवकुमार ने आगाह किया है कि जो लोग अपना वोटिंग अधिकार खो देंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है. पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कहते हैं, केवल वोटर को ही राशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं. और चेतावनी देते हुए कहते हैं, कर्नाटक में भी फॉर्म न भरने वालों को गृह ज्योति और गृह लक्ष्मी जैसी गारंटी योजनाओं, पेंशन और बाकी सरकारी लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है.

जिस तरह और जिस हद तक डीके शिवकुमार का SIR पर जोर है, ऐसा लगता है जैसे वो कांग्रेस का मुख्यमंत्री होने के नाते विरोध करने के बजाए SIR को एनडोर्स कर रहे हैं - और ये सब कांग्रेस नेतृत्व के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है.

और, INDIA ब्लॉक विरोध कर रहा है

कांग्रेस INDIA ब्लॉक का अघोषित नेतृत्व करती है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके की हार के साथ साथ केरल में कांग्रेस की जीत के बाद तो यह बात पक्की भी हो गई है. डीएमके की तो कांग्रेस ने परवाह भी नहीं की, ममता बनर्जी के पास तो विपक्ष में कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने के अलावा फिलहाल कोई रास्ता भी नहीं बचा है - राहुल गांधी के नेतृत्व पर अब सवाल उठाने वाला भी कोई नहीं है.

Advertisement

आम आदमी पार्टी और डीएमके तो घोषित तौर पर खुद को INDIA ब्लॉक से पूरी तरह अलग बता चुके हैं, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में 23 पार्टियों ने देश के मुख्य न्यायाधीश को जो पत्र लिखा गया है, उस पर दोनों ही दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं.  

रिपोर्ट के मुताबिक 23 विपक्षी दलों ने CJI जस्टिस सूर्यकांत को पत्र भेजकर SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और चुनाव नतीजों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील की है. समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां तो इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस के साथ हैं ही,  डीएमके और आम आदमी पार्टी की तरफ से पत्र पर हस्ताक्षर किया जाना ज्यादा महत्वपूर्ण है. 

सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि 4 पन्नों के पत्र का मुख्य विषय देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग द्वारा इसके कथित दुरुपयोग के जरिए केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. ऐसे ही एक सूत्र के मुताबिक, हमने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील इसलिए की है क्योंकि जब बाकी सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र की उम्मीद न्यायपालिका से होती है. हमारे पत्र में अलग-अलग राज्यों के ऐसे खास उदाहरण दिए गए हैं, जिनमें बताया गया है कि एसआईआर का कथित तौर पर किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है. पत्र का मुख्य विषय एसआईआर है, लेकिन इसमें चुनाव से जुड़ी अन्य कथित गड़बड़ियों और विभिन्न राज्यों के उदाहरणों का भी उल्लेख किया गया है.

Advertisement

डीके शिवकुमार के स्टैंड के मायने

SIR के विरोध में राहुल गांधी बिहार में विपक्षी नेताओं के साथ वोटर अधिकार यात्रा कर चुके हैं. 'वोट चोर, गद्दी छोड़' जैसे नारे भी लगा चुके हैं. केस स्टडी के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर चुके हैं. चुनाव कैंपेन के दौरान तो नहीं, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी के आरोपों का समर्थन करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर चुके हैं. 

ऐसे में, एक तरफ कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ SIR के खिलाफ अब भी मुहिम चला रही है, और दूसरी तरफ कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बातों से लगता है जैसे वो सख्त लहजे में चेतावनी दे रहे हों कि वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों की तरह बंद कर देंगे. 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कहना है, राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं कर्नाटक के निवासियों के लिए हैं... हमारी गारंटी योजनाएं कर्नाटक के लोगों के लिए हैं... कर्नाटक के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ दूसरे राज्यों के लोगों को क्यों दिया जाए? हमारी मंशा है कि इन योजनाओं का लाभ केवल इसी राज्य के लोगों तक पहुंचे.

भले ही डीके शिवकुमार 'दूसरे राज्यों...' की बात कर रहे हैं, सुनकर तो ऐसा लगता है जैसे वो 'घुसपैठिया' बोलना चाह रहे हैं.  SIR प्रसंग में 'घुसपैठिया' शब्द का इस्तेमाल बीजेपी नेताओं की तरफ से होता है, डीके शिवकुमार का वैसा बोलना राजनीतिक रूप से ठीक नहीं होगा, इसलिए वो परहेज कर रहे हैं.

Advertisement

सवाल यह है कि क्या डीके शिवकुमार ये सब अपने मन से कर रहे हैं? क्या आलाकमान ने डीके शिवकुमार को ऐसा करने की छूट दे रखी है? क्या डीके शिवकुमार के स्टैंड को 'प्रो-बीजेपी' या शशि थरूर वाली राजनीतिक लाइन से भी जोड़ कर देखा जा सकता है?

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »