दिल्ली चुनाव में सीलमपुर से राहुल गांधी की एंट्री, कांग्रेस को कितने फायदे की उम्‍मीद

राहुल गांधी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में मोर्चे पर पहले ही पहुंच गए हैं. दिल्‍ली के सीलमपुर से इसका आगाज हुआ. राहुल गांधी की मैदान में मौजूदगी कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाएगी, उससे पहले सवाल ये भी है कि उनके कैंपेन में हिस्सा लेने का मकसद चुनाव ही है या कुछ और?

Advertisement
राहुल गांधी के लिए दिल्ली चुनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण INDIA ब्लॉक में दबदबा कायम रखना है. राहुल गांधी के लिए दिल्ली चुनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण INDIA ब्लॉक में दबदबा कायम रखना है.

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:26 PM IST

दिल्ली में चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय हो न हो, लेकिन कैंपेन जरूर ऐसा हो गया है. और, राहुल गांधी की एंट्री उसमें इजाफा ही करने जा रही हैं. लेकिन, पहले ये समझना जरूरी हो गया है कि राहुल गांधी के चुनाव कैंपेन की शुरुआत में ही रैली करने के फैसले के पीछे बड़ी वजह क्या है?

क्या वास्तव में कांग्रेस नेतृत्व दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर हो गया है? या फिर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में बढ़ते दवाब से उबरने के लिए राहुल गांधी को चुनावी मोर्चे पर उतरने का फैसला करना पड़ा है?

Advertisement

राहुल गांधी के विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर होने पर सवाल इसलिए उठता है क्योंकि अब तक दिल्ली में चुनाव कैंपेन के तहत जो भी काम हो रहा था, न तो राहुल गांधी और न ही प्रियंका गांधी वाड्रा ही कहीं इर्द गिर्द दिखाई पड़ रही थीं. 2020 के विधानसभा चुनाव की भी बात करें तो राहुल गांधी ने कुल जमा चार सार्वजनिक सभाएं या रोड शो किये थे, जिसमें दो जगह प्रियंका गांधी वाड्रा भी साथ थी. तब प्रियंका गांधी सिर्फ कांग्रेस महासचिव हुआ करती थीं, अब तो वो वायनाड से सांसद भी बन गई हैं. 

उस चुनाव के बीच से राहुल गांधी के एक बयान पर काफी बवाल भी हुआ था. राहुल गांधी ने कहा था, 'ये जो नरेंद्र मोदी भाषण दे रहा है... छह महीने बाद ये घर से बाहर नहीं निकल पाएगा... हिंदुस्तान के युवा इसको ऐसा डंडा मारेंगे, समझा देंगे कि हिंदुस्तान के युवा को रोजगार दिए बिना ये देश आगे नहीं बढ़ सकता.'

Advertisement

2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 में से 66 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. 4 सीटों पर कांग्रेस की सहयोगी लालू यादव की पार्टी आरजेडी के उम्मीदवार मैदान में थे. 66 में से कांग्रेस के 63 उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी, और उनमें वे उम्मीदवार भी शामिल थे जिनके पक्ष में भाई-बहन ने घूम घूम कर वोट मांगे थे.  

राहुल गांधी के मैदान में उतरने से पहले कांग्रेस की तैयारी

राहुल गांधी के दिल्ली चुनाव में मोर्चा संभालने से पहले से ही कांग्रेस नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाये हुए हैं, और उनको 'फर्जीवाल' कह कर संबोधित किया जा रहा है - कांग्रेस की तरफ से कुछ चुनावी वादे भी घोषित किये जा चुके हैं. 

1. युवा उड़ान योजना: जैसे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने युवा न्याय के तहत ‘अप्रेंटिसशिप का अधिकार’ कानून लाने की बात कही थी, दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भी युवा उड़ान योजना लाने की घोषणा की गई है. 

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने देश के युवाओं को पहली नौकरी पक्की करने की बात कही थी. कांग्रेस की तरफ से कहा गया था कि सरकार बनने पर 25 साल तक की उम्र वाले हर डिप्लोमा और डिग्री धारी युवा को सरकारी या निजी क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप का मौका दिया जाएगा, और उसके तहत हर साल एक लाख रुपये यानी हर महीने 8,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. 

Advertisement

कांग्रेस की युवा उड़ान योजना के बारे में बताते हुए सचिन पायलट ने कहा कि अगर हमारी सरकार आती है तो दिल्ली में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को एक साल की अप्रेंटिसशिप के तहत 8500 रुपये हर महीने देंगे... और, युवाओं को उस दौरान फील्ड में भी काम दिलाएंगे.

2. प्यारी दीदी योजना: कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद दिल्ली में सरकार बनने की सूरत में महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है. कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की मौजूदगी में इस योजना की घोषणा की गई. कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में भी कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना की तर्ज पर महिलाओं को फायदा मिलेगा. 

3. जीवन रक्षा योजना: कांग्रेस ने दिल्ली में 25 लाख के बीमा वाली जीवन रक्षा योजना का भी ऐलान किया है. जीवन रक्षा योजना के तहत दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनने पर हर दिल्लीवासी को 25 लाख के बीमे की सुविधा देने का वादा किया गया है.

लोकसभा चुनाव से पहले भारत जोड़ो न्याय यात्रा की तरह राहुल गांधी ने दिल्ली में यात्रा तो नहीं की, लेकिन शुरुआती दौर में भी ये संकेत देने की कोशिश हो रही है कि कांग्रेस नेतृत्व भी इस बार दिल्ली चुनाव को लेकर गंभीर है. 

Advertisement

इंडिया ब्लॉक में दबदबे का सवाल है

कांग्रेस की तरफ से दिल्ली चुनाव को लेकर चाहे जितनी भी गंभीरता दिखाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन राहुल गांधी के कैंपेन में उतरने का मकसद अलग ही लगता है. हो सकता है, कुछ सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन पहले के मुकाबले बेहतर हो - लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए चुनावों के नतीजे तो कोई खास उम्मीद नहीं जगा रहे हैं. 

आंबेडकर के मुद्दे पर मचे बवाल से इंडिया ब्लॉक का मुद्दा कुछ देर के लिए थमता हुआ दिखा जरूर, लेकिन दिल्ली चुनाव में पहले ममता बनर्जी और फिर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की तरफ से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को दिये गये समर्थन के बाद नये समीकरण नजर आने लगे हैं. 

दिल्ली चुनाव में फिलहाल इंडिया ब्लॉक दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है. और ये दो हिस्से भी बराबर नहीं हैं. एक तरफ आम आदमी पार्टी को गठबंधन के दो दलों का सपोर्ट हासिल है, और दूसरी तरफ कांग्रेस मैदान में अकेली पड़ गई है - और राहुल गांधी के दिल्ली चुनाव कैंपेन में उतरने की सबसे बड़ी वजह भी यही लगती है. 

उमर अब्दुल्ला भी इंडिया ब्लॉक के अस्तित्व पर सवाल उठा चुके हैं. अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया आई है, जिसमें वो कह रहे हैं कि इंडिया ब्लॉक बना हुआ है - और उनकी बातों से भी ऐसा लगता है जैसे वो कांग्रेस को किनारे रख कर इंडिया ब्लॉक के बने रहने की बात कर रहे हों. 

Advertisement

कुल मिलाकर जो हालात हैं, उसमें राहुल गांधी के लिए दिल्ली चुनाव में उतरना बहुत जरूरी हो गया था. चुनाव जीतने से कहीं ज्यादा इंडिया ब्लॉक में दबदबा कायम रखने के लिए. दिल्ली ही नहीं 2025 के आखिर में होने वाले बिहार चुनाव में भी कांग्रेस के लिए कुछ खास बचा हुआ नहीं लगता है - लेकिन, 18 जनवरी को राहुल गांधी के बिहार दौरे का कार्यक्रम का मकसद भी तो इंडिया ब्लॉक से ही जुड़ा है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »