समय के कैनवास पर राजनीति ने अपनी कूची बदल ली है. राजनीति के अख़ाड़े का केंद्र संसद से खिसककर इंस्टाग्राम की रील्स और 'X' (ट्विटर) की टाइमलाइन पर आ गया है. इस नए डिजिटल रणक्षेत्र में दो महारथी आमने-सामने हैं. एक तरफ 'डिजिटल इंडिया' का चेहरा पीएम नरेंद्र मोदी हैं, तो दूसरी तरफ जन-संवाद की नई भाषा तलाशते राहुल गांधी. लेकिन इस बार नियम कोई पुराना नेता तय नहीं कर रहा, बल्कि दर्शक और निर्णायक की भूमिका में खड़े हैं Gen-Z.
पिछले कुछ समय से संसद के भीतर और बाहर प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच सियासी टकराव देखने को मिल रहा है. अब इस पॉलिटिकल मुकाबले का नया मैदान सोशल मीडिया बन गया है. खासतौर पर इंस्टाग्राम. जहां दोनों नेता युवाओं और छात्रों तक सीधे पहुंच बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. दिलचस्प बात ये है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी, दोनों के इंस्टाग्राम अकाउंट की रीच में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ये आंकड़े बताते हैं कि राजनीतिक संवाद का तरीका भी तेजी से बदल रहा है और इसमें इंस्टाग्राम की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम होती जा रही है.
यूं तो पीएम मोदी सोशल मीडिया पर पहले से ही काफी लोकप्रिय हैं. एक्स और फेसबुक पर उनकी मजबूत मौजूदगी है, लेकिन हाल के दिनों में इंस्टाग्राम पर भी उनकी सक्रियता बढ़ी है. 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर छात्रों के मार्च और उसके बाद हुए घटनाक्रम के बीच पीएम मोदी ने युवाओं से सीधे संवाद का रास्ता अपनाया. 23 जुलाई को उन्होंने छात्रों की चिंताओं को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो को 305 मिलियन व्यूज मिले. 2.1 करोड़ से ज्यादा लाइक्स मिले, जबकि करीब 19 लाख कमेंट्स आए. इस वीडियो को 18 लाख रीपोस्ट मिले. लगभग 78 लाख लोगों ने इसे शेयर भी किया.
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इसके अगले ही दिन यानी 24 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी का एक और वीडियो सामने आया. इस वीडियो को करीब 1.6 करोड़ लाइक्स और 15 लाख कमेंट्स मिले. करीब 10 लाख लोगों ने इसे रीपोस्ट किया, जबकि 25 लाख से ज्यादा लोगों ने शेयर किया. ये सिलसिला यहीं नहीं थमा, पीएम मोदी ने 26 जुलाई को एक और वीडियो शेयर किया, जिसे 1.4 करोड़ लाइक्स, 10 लाख कमेंट्स मिले, जबकि 15 लाख लोगों ने इसे शेयर किया. इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री मोदी के करीब 10.6 करोड़ फॉलोअर्स हैं और वह दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेताओं में शामिल हैं.
डिजिटल पब्लिशर्स और B2C ब्रांड्स के लिए सोशल लिसनिंग और एनालिटिक्स का काम करने वाली कंपनी डाटा बीइंग्स ने 20 जुलाई से पहले और उसके बाद 4 इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर प्रति पोस्ट औसत एंगेजमेंट का विश्लेषण किया. इसमें प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, बीजेपी और कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट्स को शामिल किया गया. पीएम मोदी की 20 जुलाई से पहले एक पोस्ट पर औसतन करीब 11.9 लाख लोगों की एंगेजमेंट थी. प्रदर्शन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 46.3 लाख हो गया. यानी इसमें 289.9% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. यह प्रदर्शन आंदोलन से पहले के स्तर का करीब 3.9 गुना है. यानी इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री की पोस्ट को देखने, लाइक करने, कमेंट करने और शेयर करने वाले लोगों की संख्या में अचानक बड़ा उछाल आया.
दूसरी ओर, राहुल गांधी के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी पिछले कुछ समय में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है. खासकर नीट और छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों के बाद उनकी सोशल मीडिया रीच में बड़ा इजाफा देखने को मिला है. राहुल गांधी ने छात्रों के लिए 'आस्क मी एनीथिंग' (AMA) सेशन किया था, इसने भी लोगों का काफी ध्यान खींचा. एक्स पर राहुल गांधी के करीब 2.85 करोड़ फॉलोअर्स हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी की तुलना में काफी कम हैं. इसके बावजूद उनकी पोस्ट और वीडियो की रीच तेजी से बढ़ी है. डाटा बीइंग्स के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई से पहले राहुल गांधी की एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर औसतन करीब 1.52 लाख लोगों की एंगेजमेंट थी. छात्रों के प्रदर्शन के बाद यह बढ़कर करीब 4.26 लाख हो गई. यानी इसमें 180.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यानी उनका एंगेजमेंट पहले के मुकाबले करीब 2.8 गुना हो गया है.
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ये आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी चारों के सोशल मीडिया अकाउंट पर 20 जुलाई के बाद एक पोस्ट पर औसत एंगेजमेंट बढ़ी है. हालांकि, इन राजनीतिक दलों के आधिकारिक अकाउंट की वृद्धि पीएम मोदी और राहुल गांधी के पोस्ट की तुलना में कम रही. कांग्रेस के फॉलोअर्स 50 हजार से बढ़कर 72 हजार हो गए, यानी 43.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं बीजेपी के फॉलोअर्स 25 हजार से बढ़कर करीब 34 हजार हो गए, यानी इसमें 37.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इससे एक अहम बात सामने आती है कि राजनीतिक दलों के ब्रांड की तुलना में नेताओं की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके सीधे संवाद वाले कंटेंट का असर इंस्टाग्राम पर कहीं ज्यादा दिखाई दे रहा है. पीएम मोदी और राहुल गांधी, दोनों ने युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम के उसी अंदाज को अपनाया है, जिस अंदाज में Gen-Z सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए वीडियो और रील्स का सहारा लिया. यहां तक कि उन्होंने देर रात भी रील पोस्ट कीं. वहीं राहुल गांधी ने ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन और छात्रों के साथ सीधे संवाद का रास्ता चुना. यह तरीका पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से बिल्कुल अलग है. यहां लंबे भाषण या प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय छोटे वीडियो, रील्स, सवाल-जवाब और सीधे संवाद के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश हो रही है. यही वजह है कि राजनीतिक संदेश अब सिर्फ 'नेता बोले और जनता ने सुना' तक सीमित नहीं रह गया है. सोशल मीडिया पर युवा सवाल पूछ रहे हैं, प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वीडियो शेयर कर रहे हैं और खुद भी कंटेंट बना रहे हैं.
20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हुई. इसी दौरान इंस्टाग्राम पर राजनीतिक संवाद का एक नया दौर देखने को मिला. जो छात्र खुद प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और रील्स बना रहे थे, उन्हें उसी प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के वीडियो भी दिखाई देने लगे. पीएम मोदी ने जहां छात्रों को सीधे संबोधित करने की कोशिश की, वहीं राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत और सवाल-जवाब के जरिए अपनी बात रखी. इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय राजनीति में युवाओं तक पहुंचने के लिए इंस्टाग्राम अब महज मनोरंजन का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, यह राजनीतिक संवाद का भी अहम माध्यम बनता जा रहा है. भविष्य में यह डिजिटल मुकाबला और तेज हो सकता है, क्योंकि राजनीतिक दलों को अब सिर्फ वोटरों तक नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर लगातार सक्रिय रहने वाली नई पीढ़ी तक भी अपनी बात पहुंचानी है.
हेमंत पाठक