ओडिशा के नबरंगपुर जिले में सड़क की बदहाली ने मुश्किलें बढ़ा दीं. पापड़ाहांडी ब्लॉक के पुंजिगुड़ा गांव में मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस रास्ते में कीचड़ में फंस गई. काफी कोशिश के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं निकल सकी तो ग्रामीणों ने ट्रैक्टर बुलाया. रस्सी बांधकर ट्रैक्टर की मदद से एंबुलेंस को कीचड़ से बाहर निकाला गया. घटना के बाद गांव की सड़क व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत की शिकायत कई बार प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ.
पुंजिगुड़ा गांव की धनामती भतरा पिछले चार दिनों से बुखार से पीड़ित थीं. बुधवार शाम उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. परिवार ने इलाज के लिए एंबुलेंस को फोन किया. एंबुलेंस मरीज को लेने के लिए गांव तक पहुंच भी गई, लेकिन वापस लौटते वक्त खराब सड़क ने मुश्किल खड़ी कर दी. रास्ते में कीचड़ इतना ज्यादा था कि एंबुलेंस उसके बीच फंस गई.
ड्राइवर ने एंबुलेंस को निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन पहिए कीचड़ में धंसते चले गए. इसके बाद गांव के लोगों ने मिलकर एंबुलेंस को बाहर निकालने का प्रयास किया. जब इससे भी बात नहीं बनी तो ट्रैक्टर की मदद लेने का फैसला किया गया. ग्रामीणों ने एक ट्रैक्टर की व्यवस्था की. इसके बाद एंबुलेंस में रस्सी बांधी गई और ट्रैक्टर की मदद से उसे खींचा गया. काफी मशक्कत के बाद एंबुलेंस कीचड़ से बाहर निकल सकी.
सोचिए, जिस एंबुलेंस को मरीज तक जल्द से जल्द पहुंचना चाहिए, उसे गांव से बाहर निकालने के लिए ट्रैक्टर की जरूरत पड़ गई. इस घटना ने पुंजिगुड़ा की सड़क की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
7 किलोमीटर का रास्ता, 3 किलोमीटर बदहाल
पुंजिगुड़ा गांव पापड़ाहांडी से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर है. ग्रामीणों के मुताबिक इस रास्ते का करीब तीन किलोमीटर हिस्सा बेहद खराब है. बारिश के दौरान यहां की स्थिति और खराब हो जाती है और सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते से रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत तब होती है जब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो या एंबुलेंस को गांव तक पहुंचना हो. खराब सड़क के कारण इमरजेंसी सेवाओं में भी देरी का खतरा बना रहता है.
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पुंजिगुड़ा के ग्रामीणों ने सड़क की हालत को लेकर पहले भी प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की है. सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और गड्ढों से परेशान ग्रामीणों ने इसी रास्ते पर धान तक बो दिया था. उनका मकसद प्रशासन को यह दिखाना था कि सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि यहां सड़क के बजाय धान की खेती की जा सकती है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और विरोध के बावजूद सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
पुंजिगुड़ा की यह घटना सिर्फ खराब सड़क की तस्वीर नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि किसी आपात स्थिति में गांव के लोगों को किन मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है. बुखार से पीड़ित धनामती की हालत बिगड़ने के बाद परिवार ने एंबुलेंस बुलाई. एंबुलेंस गांव तक पहुंची, लेकिन खराब रास्ते पर फंस गई. अगर ट्रैक्टर उपलब्ध नहीं होता तो उसे निकालने में और कितना वक्त लगता, यह कहना मुश्किल है. फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि गांव तक आने वाली सड़क को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में एंबुलेंस और दूसरे जरूरी वाहनों की आवाजाही बाधित न हो.
अजय कुमार नाथ