मध्य प्रदेश के खंडवा में जनसुनवाई के दौरान डॉगी के साथ पहुंचकर आवारा कुत्तों की समस्या उठाने वाले नगर निगम में प्रतिपक्ष नेता दीपक मुल्लू राठौर इन दिनों चर्चा में हैं. दीपक राठौर ने आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि जिस समस्या को लेकर वह जनसुनवाई में पहुंचे थे, वह उनके लिए सिर्फ राजनीतिक या सार्वजनिक मुद्दा नहीं है. उन्होंने कहा कि वह खुद डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं. उनके साथ जनसुनवाई में डॉगी बनकर गया युवक भी डॉग बाइट का शिकार हो चुका है.
दीपक राठौर का कहना है कि खुद डॉग बाइट का दर्द झेलने के कारण वह इस परेशानी को बेहतर तरीके से समझते हैं. उन्होंने कहा कि घायल की गति घायल जाने की तर्ज पर डॉग बाइट की तकलीफ को वही व्यक्ति ज्यादा समझ सकता है, जिसने खुद इसका सामना किया हो.
कई बार प्रशासन के सामने उठाया मुद्दा
दीपक राठौर के मुताबिक, उन्होंने खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर पहले भी कई बार शासन और प्रशासन के सामने अपनी बात रखी है. उनका कहना है कि उन्होंने समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन जब इस मुद्दे पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें अलग तरीके से इसे उठाना पड़ा. जनसुनवाई में डॉगी के साथ पहुंचने का उनका तरीका इसी मुद्दे को लोगों और प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखने की कोशिश थी. इसके बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला चर्चा में आ गया.
खंडवा नगर में पिछले चार वर्षों में डॉग बाइट के 13 हजार 225 मामले सामने आए हैं. नगर निगम इन आवारा कुत्तों के बधियाकरण पर 40 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुका है. इसके बावजूद समस्या कम होती नजर नहीं आ रही है. साल 2026 में भी डॉग बाइट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. जनवरी से जुलाई तक सिर्फ सात महीनों में 2463 लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैं. इसी रफ्तार से मामले सामने आते रहे तो साल के अंत तक यह आंकड़ा चार हजार के पार पहुंच सकता है.
चार साल में डॉग बाइट के 13 हजार 225 मामले
डॉग बाइट से जुड़े इन आंकड़ों को नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य विभाग दर्ज करता है. डॉग बाइट के बाद घायलों के उपचार की जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य विभाग की है. वहीं शहर में आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी संख्या को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है. नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष के सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कुत्तों के बधियाकरण और वैक्सीनेशन के लिए निकाले गए टेंडर की एजेंसी तक तय नहीं हो पाई है.
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कितनी है, इसका आंकड़ा भी नगर निगम के पास मौजूद नहीं है. कुत्तों की संख्या का अनुमान शासन की गाइडलाइन के आधार पर लगाया जाता है. गाइडलाइन के मुताबिक शहर की आबादी के अनुपात में तीन प्रतिशत संख्या आवारा कुत्तों की मानी जाती है. इस हिसाब से करीब पौने तीन लाख आबादी वाले खंडवा शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नौ हजार से ज्यादा आंकी गई है.
वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में आया
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर दीपक राठौर ने जब जनसुनवाई में इस मुद्दे को अलग और रोचक तरीके से उठाया तो मामला तेजी से चर्चा में आ गया. जनसुनवाई में डॉगी के साथ पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर जबर्दस्त तरीके से वायरल हुआ. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन को भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी. जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडिशनल कलेक्टर काशीराम बड़ोले ने दीपक राठौर की शिकायत को सुना.
एडिशनल कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से सुनने के बाद मामले में जांच कमेटी बनाने और कार्रवाई की बात कही. इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में भी आ गया. मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जनसुनवाई लोगों की समस्याओं के निराकरण का गंभीर मंच है. यहां पब्लिसिटी के लिए स्टंट नहीं किया जाना चाहिए.
कलेक्टर बोले जनसुनवाई गंभीर मंच, स्टंट नहीं होना चाहिए
कलेक्टर ने यह भी कहा कि समस्या को सामान्य तरीके से भी जनसुनवाई में रखा जा सकता था. उनके इस बयान के बाद अब इस मामले में एक सवाल भी उठ रहा है कि अगर सामान्य तरीके से रखी गई समस्याओं का समय पर समाधान हो जाता तो इस तरह समस्या को अलग तरीके से उठाने की जरूरत ही क्यों पड़ती. दीपक राठौर का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा पहले भी शासन और प्रशासन के सामने उठाया था. लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. यही वजह रही कि उन्होंने इस बार जनसुनवाई में अलग तरीके से अपनी बात रखने का फैसला किया.
दीपक राठौर ने आज तक से बातचीत में एक बार फिर बताया कि वह खुद डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं. उनके साथ डॉगी बनकर जनसुनवाई में गया युवक भी डॉग बाइट का शिकार हो चुका है. उनका कहना है कि इस समस्या की तकलीफ को वह खुद महसूस कर चुके हैं. इसी वजह से वह चाहते हैं कि खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और इसके समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई हो.
अब जनसुनवाई में डॉगी के साथ पहुंचने का मामला सोशल मीडिया से निकलकर प्रशासन और राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच चुका है. एडिशनल कलेक्टर की ओर से जांच कमेटी बनाने और कार्रवाई की बात कही गई है. वहीं कलेक्टर ने जनसुनवाई में समस्या उठाने के तरीके पर सवाल किया है.
खुद डॉग बाइट का शिकार होने का दावा
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खंडवा में पिछले चार वर्षों में डॉग बाइट के 13 हजार 225 मामले सामने आने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया. नगर निगम द्वारा बधियाकरण पर 40 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए जाने के बाद भी डॉग बाइट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. दीपक राठौर का कहना है कि उन्होंने इसी जनहित के मुद्दे को प्रशासन के सामने मजबूती से रखने की कोशिश की है. अब देखना होगा कि जांच कमेटी बनने के बाद आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान को लेकर क्या कार्रवाई होती है.
जय नागड़ा