चीतों के बाद अब MP में जंगली भैंसों की वापसी... असम से लाए गए, मुख्यमंत्री ने कान्हा टाइगर रिजर्व में छोड़े

MP Kanha Wild Buffalo Reintroduction: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा. करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों को फिर से बसाने की पहल की गई है. सरकार ने तीन साल में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा है...

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कान्हा में 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़े गए 6 मादा और 2 नर जंगली भैंसे.(Photo:ITG) कान्हा में 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़े गए 6 मादा और 2 नर जंगली भैंसे.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • मंडला/बालाघाट,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों को फिर से बसाने की पहल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को कान्हा टाइगर रिजर्व का दौरा किया. यहां सूपखार परिक्षेत्र में 8 जंगली भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया. इन भैंसों ने क्वारंटाइन अवधि पूरी कर ली है. अब इन्हें बड़े क्षेत्र में रखा जाएगा. इससे वे स्थानीय वातावरण के अनुकूल हो सकेंगी.

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जंगली भैंसों को असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से मध्य प्रदेश लाया गया था. इन्हें दो चरणों में कान्हा पहुंचाया गया. पहली खेप 28 अप्रैल 2026 को आई थी. इसमें 3 मादा और एक नर भैंसा था. दूसरी खेप इसी साल 9 मई को लाई गई. इसमें भी तीन मादा और एक नर भैंसा था.

सभी आठ भैंसों को पहले एक हेक्टेयर के बाड़े में रखा गया. यहां उनकी क्वारंटाइन अवधि पूरी हुई. इसके बाद 11 अक्टूबर को उन्हें बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया. यह बाड़ा 17 हेक्टेयर में बना है. अब भैंसों को यहां के मौसम और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा.

करीब 100 साल बाद बसाने की कोशिश

मध्य प्रदेश के जंगलों से जंगली भैंसे लगभग 100 साल पहले विलुप्त हो गए थे. अब वन विभाग इन्हें फिर से बसाने में जुटा है. इसके लिए सूपखार क्षेत्र को चुना गया है. यहां पहले भी जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं.

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मुख्यमंत्री ने इस पहल को अहम बताया. उन्होंने कहा कि करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण शुरू हुआ है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से इन भैंसों को मध्य प्रदेश लाया गया. उन्होंने बताया कि भैंसों ने करीब 2,200 किलोमीटर की दूरी तय की है.

100 साल बाद कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा जंगली भैंसा.

तीन साल में 50 जंगली भैंसें बसाने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है. अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने की योजना है. इसके लिए वन विभाग विशेष तैयारी कर रहा है. भैंसों को पहले स्थानीय वातावरण के अनुकूल बनाया जाएगा. इसके बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा.

इस पहल से वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. क्षेत्र की जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी. साथ ही, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

CM ने बालाघाट के सूपखार में 8 जंगली भैंसों को 17 हैक्टेयर के बड़े बाड़े में रिलीज किया.

वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को फिर से बसाने के लिए काम कर रही है. इससे पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा.

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मुख्यमंत्री ने नौरादेही में चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाने की दिशा में कदम उठाया गया. मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख किया.

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