भोपाल में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. यहां ठगों ने पहले एक व्यापारी से दोस्ती की, उसे अपने साथ घुमाया और फिर सोलर कंपनी में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच दिया. वहीं असली खेल तब शुरू हुआ, जब आरोपियों ने व्यापारी से बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने को कहा. लेकिन व्यापारी ने इनकार किया तो आरोप है कि उसे अगवा कर बंधक बना लिया गया और चाकू की नोक पर मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और चेकबुक लूट ली.
मामला कटारा हिल्स थाना क्षेत्र का है. व्यापारी यशवंत लोधी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि करीब 15 दिन पहले दीपक नाम के व्यक्ति ने उसे व्हाट्सऐप कॉल किया था. दीपक ने सोलर कंपनी में निवेश करने की बात कही. उसने हरीश दुबे के साथ मिलकर कंपनी और करंट अकाउंट के जरिए तीन प्रतिशत मुनाफा देने का लालच भी दिया. आरोप है कि इसके बाद दोनों व्यापारी को विदिशा लेकर गए. वहां उससे इंटरनेट बैंकिंग की आईडी और पासवर्ड भी हासिल कर लिए गए. लेकिन जब आरोपियों ने बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने की कोशिश की तो व्यापारी ने साफ इनकार कर दिया. इसके बाद मामला दोस्ती और निवेश के झांसे से निकलकर जबरन वसूली और लूट तक पहुंच गया.
आधी रात फ्लैट में ले जाकर बनाया बंधक
शिकायत के मुताबिक 31 अगस्त की रात करीब 2 बजे दीपक उर्फ रोहन बिष्ट और हरीश दुबे व्यापारी को कटारा हिल्स स्थित एक मल्टी के फ्लैट नंबर 509 में ले गए. वहां पहले से रोनित राज और हर्ष मेहरा मौजूद थे. आरोप है कि चारों ने व्यापारी को कमरे में बंद कर दिया. हर्ष मेहरा ने उसके हाथ पकड़ लिए, जबकि रोनित राज ने उसकी गर्दन और पेट पर चाकू लगा दिया. आरोपियों ने जान से मारने की धमकी देते हुए व्यापारी के एप्पल और सैमसंग मोबाइल, टैबलेट और चेकबुक अपने कब्जे में ले लिए.
बैंक अकाउंट के लिए बनाया था पूरा प्लान?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों की नजर व्यापारी के बैंक अकाउंट पर थी. पुलिस को शक है कि साइबर ठगी के लिए बैंक खाते का इस्तेमाल करने की तैयारी थी. व्यापारी के अकाउंट देने से इनकार करने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसे बंधक बनाकर दबाव बनाने की कोशिश की.
इस मामले में पुलिस ने हर्ष मेहरा और रोनित राज को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं दीपक उर्फ रोहन बिष्ट और हरीश दुबे अभी फरार हैं. पुलिस उनकी तलाश में जुटी है. पुलिस के मुताबिक चारों आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है और साइबर ठगी के लिए बैंक अकाउंट हासिल करने के पीछे उनका पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है.
धर्मेंद्र साहू