भेड़िया - आखिरी पार्ट - STORYBOX WITH JAMSHED

BHEDIA Part 2 | भेड़िया 2| Time Traveller, Murder Mystery & Thriller Story | Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui एक Physics पढ़ाने वाली Professor के कमरे में अचानक एक अजनबी लड़की आती है और दावा करती है कि वह 300 साल बाद की दुनिया से आई है। वह खुद को एक TIME TRAVELLER बताती है। Professor Tabassum पहले उसकी बात सुनकर हँस देती हैं लेकिन धीरे-धीरे कुछ ऐसी बातें कहती हैं कि उन्हें यकीन हो जाता है और फिर बात आती है प्रोफेसर के इकलौते बेटे की मौत की... आख़िर कौन थी वो लड़की और टाइम ट्रैवल को धार्मिक किताबों में ढूंढने वाली प्रोफेसर का वो राज़ खोल दिया जिसमें प्रोफेसर ने मान लिया कि उसने अपने बेटे का कत्ल किया था। क्या था वो राज़ सुनिये कहानी के आख़िरी हिस्से में

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Storybox with Jamshed Storybox with Jamshed

जमशेद क़मर सिद्दीक़ी

  • नोएडा,
  • 26 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

Recap of Part 1 & 2 - भेड़िया के पिछले एपिसोड में आपने देखा कि फिज़िक्स की एक मशहूर प्रोफेसर, प्रोफेसर तबस्सुम जो टाइम ट्रैवल पर रिसर्च कर रही हैं और दुनिया में उनका बड़ा नाम है... वो जब एक साइंटिस्ट्स के एक कंपटिशन में हिस्सा लेने न्यूयार्क पहुंचती हैं तो होटल के कमरे में एक लड़की आती है और कहती है कि वो नैना है और टाइम ट्रैवलर है और तीन सौ साल बाद की दुनिया से आई है। पहले तो प्रोफेसर उसे फ्रॉड समझती हैं लेकिन फिर धीरे-धीरे उनकी पर्सन ज़िंदगी से कुछ ऐसे सबूत देती है जिसके बाद उन्हें यकीन होने लगता है.. नैना बताती है कि फ्यूचर की एक जर्नलिस्ट है वहां टाइम ट्रैवल एक बहुत नार्मल बात है, जर्नलिस्ट अक्सर गुज़रे ज़माने में जाकर पुराने मशहूर लोगों से इंटरव्यू लेते हैं। वो प्रोफेसर का इंटरव्यू इसलिए करने आई है क्योंकि प्रोफेसर को 2326 में टाइम ट्रैवल का जनक माना जाता है... वो सवाल जवाब करती है लेकिन फिर उनसे पूछती है कि आपके बेटे मुर्तज़ा को क्या हुआ था.. प्रोफेसर बताती हैं कि उनके घर के पीछे वाले जंगल में कुछ आदमखोर भेड़िये थे... जिन्होंने उसे मार डाला था, वो एक हादसा था... नैना कहती है कि वो जिस दुनिया से आई है वहां राज़ खुल चुका है कि मुर्तज़ा की मौत भेड़ियों के हमले से नहीं हुई थी... अब आप सच बताइये, क्योंकि हमको मालूम है कि आपने उसके साथ क्या किया था... अब झूठ बोलेंगी तो आपकी बाकी सारी उपलब्धियां बेकार हो जाएंगी और इतिहास आपको एक फेक इंसान की तरह याद करेगा... वो उन्हें कनविंस कर लेती है कि आपके सच बोलने से आपका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा...प्रोफेसर सच बोलने को तैयार हो जाती है और बताती है कि उसने अपने बेटे मुर्तज़ा के साथ क्या किया था। अब आगे

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कमरे में गहरी खामोशी थी… नैना ने उनसे कहा.... “मैम, जो कहानी आपने दुनिया को बताई... वो ये थी कि आप पोलेंड के सेमिनार से लौटीं... आप घर आईं... मुर्तज़ा से मिलीं... उसने आपको किसी से मिलवाया... उसके अगले दिन आपने अचानक कहा कि हम इसे पिज़्ज़ा मंगाकर सेलिब्रेट करके हैं... आपने पिज़्ज़ा मंगवाकर सेलिब्रेट करते हैं... लेकिन मुर्तज़ा ने कहा कि नहीं, हम पिज़्ज़ा नहीं खाते… हम बाहर घूमने चलते हैं... आपने मना किया... लेकिन मुर्तज़ा नहीं माना... आप और वो घर के पीछे वाले घनी हरियाली वाले इलाके में गए... एक जगह पर चादर बिछाकर बैठे... तभी कुछ आवाज़ हुई... आपने पलटकर देखा तो झाड़ियों में हलचल थी… आपने मुर्तज़ा को अलर्ट किया कि शोर मत करो... लंबी खामोशी थी... लेकिन तभी खामोशी टूटी और आपके बैग में रखा फोन बज गया... जितनी देर में आपने बैग खोला... एक बड़ा सा आदमखोर भेड़िया झाड़ियों से निकला और उसने मुर्तज़ा पर हमला कर दिया… आप चिल्लाईं... लेकिन....वो मुर्तज़ा को झाड़ियों में खींच ले गया... मुर्तज़ा की लाश भी नहीं मिली...”

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नैना ने प्रोफेसर की तरफ देखा... उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। नैना ने कहा, “मैम मैं जानती हूं कि ये कहानी झूठी है... ये सच नहीं है... हम सब जानते हैं कि हुआ क्या था... पर आप बताइये ताकि ये इंटरव्यू फैक्चुअल कहा जा सके... वरना एक भी झूठ और ये पूरा इंटरव्यू बेकार हो जाएगा... और मेरा यहां आना भी.. और आप तीन सौ साल बाद की दुनिया में एक महान साइंटिस्ट कहलाने का मौका खो देंगी… बताइए… क्या हुआ था...”

प्रोफेसर तबस्सुम अपनी जगह से उठ खड़ी हुईं.... कुछ सोचते हुए खिड़की के पास खड़ी हो गईं… फिर बोली.... "नैना, देखो औलाद दुनिया की सबसे अजीम नेमतों में से एक है. जब पहली बार मुर्तजा मेरी गोद में आया था... मैं बता नहीं सकती कि मैंने उस वक्त कैसा महसूस किया था। इफ्तिखार साहब के जाने के बाद मैंने उसे अकेले पाला पोसा... सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में भेजा... वो सब कुछ दिया जो मां अपने बेटे को देती है.... लेकिन मुर्तज़ा मुझे वो एक चीज़ नहीं दे पाया जो औलाद अपनी मां को देती है... पोते-पोती की खुशी”

  • “मैं समझी नहीं... उसकी तो अभी शादी भी नहीं हुई थी... फिर आप ये कैसे कह सकती हैं कि...”
  • प्रोफेसर ने बताया, “पोलेंड कॉनफ्रैंस से वापस इंडिया लौटने से तीन दिन पहले उसने मुझे बताया कि जब मैं आउंगी तो वो मुझे किसी स्पेशल से मिलवाएगा... मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैंने ज़िंदगी अकेलेपन में काटी है, इसिलए हमेशा चाहती थी कि हमारा परिवार आगे बढ़े... ताकि तनहाई दूर हो... मैं इंडिया पहुंची, वो दिन भी आ गया... मैंने उस दिन घर को सजाया था.. थोड़ी देर बाद घर की घंटी बजी... दरवाज़ा खोला... सामने मुर्तज़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था... और ठीक उसके पीछे... एक.. एक लड़का था। उस लड़के का नाम सोहित था, सोहित माथुर.. उसका पार्टनर था. वो दोनों… शादी करना चाहते थे. आई वास आई वास शॉक्ड रादर अशेम्ड...

“मैम, इसमें कुछ भी अशेम्ड होने वाली बात नहीं है, और फिर आप तो साइंटिस्ट हैं”
- हां हूं साइंचटिस्ट, और मैं ये भी जानती हूं कि इसमें कोई बुराई नहीं है... उसे कुदरत ने वैसा ही बनाया था... तीन सौ साल बाद की दुनिया का मुझे नहीं पता, लेकिन हम जिस दुनिया में रहते हैं.. वो अभी बी मुर्तज़ा जैसे लोगों के लिए जहन्नुम है। मज़ाक उड़ाते हैं लोग… कैसे कैसे नाम रखते हैं... आखिरी सांस तक उन्हें ह्यूमिलिएट किया जाता है… मैं... मैं मुर्तज़ा को ऐसे नहीं देख सकती थी... मैं अपने प्यारे मुर्तज़ा को इस तरह ह्यूमिलिएट होते नहीं बर्दाश्त कर सकती थी… उसे तिल तिल कर मरते देखना मेरे बस में नही था.... इसलिए मैंने उसे इस दुनिया से आज़ाद कर दिया”
 

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  • नैना ने कहा, कत्ल वाले दिन क्या हुआ था
  • प्रोफेसर बोली, “मैंने उसे कहा कि सोहित के आने के अगले दिन मैंने मुर्तज़ा से कहा कि तुम्हारी आने वाली ज़िंदगी को सेलिब्रेट करते हैं। उसने कहा पिज़्ज़ा मंगाते हैं... मैंने कहा, नहीं बाहर चलते हैं... उसने मना किया...और कहा भी कि भेड़िये के हमले की खबरें लगातार आ रही हैं, इट्स नॉट सेफ... पर मैंने कहा, कुछ नहीं होता... मेरा मन है खुली हवा में कुछ देर टहलने का... वो तैयार हो गया। हम पीछे वाले जंगल में गए... सुबह के चार बजे... ठंड थी। वो मुझे पूरे रास्ते सोहित माथुर के बारे में बताता रहा... उसकी पहली मुलाकात, उनकी दोस्ती... मैं सब सुनती रही... वो पूछता रहा आप की आंखों में आंसू क्यों है... मैं कैसे बताती कि ये आंसू इसलिए हैं क्योंकि ये आखिरी बार था जब मैं मुर्तज़ा को देख रही थी। हम एक जगह चादर बिछा कर बैठ गए। मुर्तज़ा अपने फोन में कुछ गाने ढूंढने लगा... मैंने अपना फोन अपने बैग से निकाला और बात करने के बहाने पीछे चली गयी... फिर मैंने बैग से एक बड़ा चाकू निकाला और ठीक उसके पीछे जाकर कांपते हाथों से उसकी गर्दन के पिछले हिस्से पर वार किया... मुर्तज़ा ने एक बार पलट कर हैरानी से देखा... और फिर वो खून से लथपथ एक तरफ लुढ़क गया। वो मर चुका था... लेकिन मैंने उसे नहीं मारा... इस दुनिया ने, इस ज़माने ने मारा... मैं अपने बच्चे का सिर गोद मे लेकर देर तक रोती रही... चीखती रही... लेकिन कोई नहीं था मुझे सुनने वाला... फिर मैंने उसकी डेड बॉडी जंगल में एक पुरानी मज़ार के ठीक बगल में दफना दी... और वापस आकर वन विभाग को फोन किया और कहा कि भेड़िये ने मुर्तज़ा पर हमला कर दिया... और उसे खींच ले गया... और उसके बाद...” कहते हुए वो पलटीं... “नैना... नैना ... अरे कहां चली गयी”
     
  • अचानक उन्होंने देखा कि कमरा खाली था… नैना जा चुकी थी। उन्होंने रूम का दरवाजा खोला और गैलरी में वैक्यूम क्लीनिंग कर रहे एक अंग्रेज़ कर्मचारी से कहा. “Excuse me, did you see anyone coming out of this room”
    - No Mam, ma'am. Is everything Ok?
    - आ... हां...
    कहते हुए मायूस प्रोफेसर ने दरवाजा बंद किया और खामोश कमरे में वापस सोफे पर बैठ गई. इस वक्त उनके ज़हन में दो वक्त चल रहे थे एक तो गुज़रा हुआ वक्त जिसमें मुर्तज़ा की चीखें थीं.... और दूसरा तीन सौ साल बाद का वक्त... उस ज़माने में उनकी अहमियत... और जो कुछ भी नैना ने उन्हें बताया था।
     
  • उसके जाने के बाद बहुत देर तक प्रोफेसर खामोशी कमरे में बैठी आंसुओं को रुमाल करती रहीं। कब उनकी आंख लगी पता ही नहीं चला। अगला दिन कंपीटिशन का दिन था... यानि एलायंस ओफ वर्ल्ड साइंटिस्ट की सरेमनी थी... हालांकि नैना ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि ये अवार्ड उन्हें ही मिलने वाला है, बाद में ऑर्गनाइज़र्स कंफर्मेशन भी आ गया था। इसलिए वो पूरी तरह कॉनफिडेंट होकर अच्छे से तैयार होकर... ऑर्गनाइज़र्स की भेजी लक्ज़री गाड़ी में बैठ कर वेन्यू पर पहुंच गयीं।

गैलरी से अंदर जाकर एक बड़े से दरवाज़े को उन्होंने धक्का दिया... तो एसी की ठंडी हवा चेहरे पर पड़ी... और सामने एक बड़ा सा ऑडिटोरियम था, जिसमें अंधेरा था और स्टेज पर छ सात लोग बैठे थे। पीछे स्टेज पर पांच छ तस्वीरों में एक तस्वीर प्रोफेसर तबस्सुम की भी थी।

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वहाँ फिजिक्स की नई थियरीज पर डिस्कशन हो रहा था और बाद में सात शॉर्टलिस्टेड साइंटिस्ट में से एक को इस बार का प्राइज मिलना था जो की प्रोफेसर तबस्सुम जानती थी की उन्हें ही मिलने वाला है। उनके आते ही लोगों ने उनकी तरफ देखा और कई लोगों ने उन्हें घेर लिया। ख़ैर प्रोफेसर को उनकी सीट तक ले जाया गया और वो बैठ गईं।

कुछ सूट-बूट पहने कुछ और बुजुर्ग उनके करीब आए और बहुत ही औपचारिक स्वागत करने लगे. अवार्ड शो शुरू हुआ प्रोफेसर तबस्सुम आराम से बैठी रहीं.... और फिर वो घड़ी आई जब जीतने वाले के नाम का अनाउंस होना था।
SO LADIES AND GENTLEMEN… THE WINNER OF ALLIANCE OF WORLD SCIENTISTS 2026 … GOES TO…. Fedrick Rothman from the University of Toronto….

प्रोफेसर साहिबा कुर्सी से थोड़ा सा उठी की उठी रह गयीं.... ये क्या हुआ... ये अवार्ड तो उन्हें मिलने वाला था... .नैना ने उन्हें बताया था... और फोन भी तो आया था… ये.. ये कैसे हो सकता है... उनके पैर अचानक कांपने लगे. कानों के पीछे उन्हें कुछ गर्म बूँदें ढलकती हुई महसूस हुईं।

वो बदहवास सी उठीं और वहां खड़े ऑर्नाइज़र की टीम के एक शख्स से पूछा कि आप लोग विनर को एक दिन पहले फोन करते हैं क्या, मेरे पास कल एक फोन आया था... वो आदमी अंग्रेज़ी में बताया, “कि ऐसा नहीं होता... हम नाम को यहीं रीवील करते हैं.. हम कभी एक दिन पहले विनर को फोन करके नहीं बताते” कहकर वो सामने देखने लगा... प्रोफेसर हैरानी से इर्द गिर्द देख रही थी. अचानक ऑडिटोरियम की चमकती रोशनी उनकी आँखों में चुभने लगी. वो वापस कुर्सी पर तकरीबन गिरते हुए बैठ गयी कि तभी उनकी नज़र ऑडिटोरियम की एक सीट पर पड़ी.... दो आंखें मुस्कुराकर उन्हें देख रही थीं....
“नैना” ... प्रोफेसर तबस्सुम के होठों से बस इतनी ही निकला।
यानि ये सब कुछ. ये सब एक फरेब था झूठ था. उनका सर चकराने लगा. बेहोश होने लगीं. कुछ देर बाद उन्हें होश आया तो कॉन्फ्रेंस हाल में लोग उन्हें घेरे हुए खड़े थे. भीड़ के बीच कुर्सी पर बेसुध पड़ी प्रोफेसर ने बंद होती आँखों को खोलकर देखा. सामने एक अंग्रेज़ पुलिस ऑफिसर खड़ा था. कुछ और लोग भी थे. उसने कहा, “प्रोफेसर तबस्सुम यू अरे अंडर अरेस्ट for the murder of your own son Murtaza Iftikhar” ऑडिटोरियम में शोर मच गया. अफरा-तफरी मच गई… कैमरे के फ्लैश चमकने लगे।

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कुछ देर बाद पुलिस प्रोफेसर तबस्सुम को हाथों में हथकड़ियाँ डालकर पुलिस कार की तरफ ले जा रही थी तभी उनका सामना नैना से फिर हुआ. वो पुलिस की गाड़ी से टिकी हुई हाथ बांधे उन्हें देख रही थी. दोनों करीब आए तो वो एक दूसरे के आमने-सामने ठहर गए. नैना बोली.

“गुनाह वक्त की किसी भी तह में प्रोफेसर साहिबा... उसकी सज़ा टाइम ट्रैवल करते हुए आपतक पहुंच ही जाती है”

  • एक मिनट मैं... I just want 2 minutes… उन्होंने पुलिस ऑफिसर से कहा, और नैना से पूछा... तुम्हें किसने बताया था मेरी चौथी किताब का नाम.
    - (हँसकर) आपने ही बताया था... एक सेमिनार में... आप भूल गईं।
  • और वो जो फोन आया कि मैं यहां विनर हूं...
  • वो मैंने करवाया था...
  • तुम्हे तुम्हे क्या मिला ये सब करके... WHO ARE YOU?

इस बार नैना की नीली आँखों में बेहिसाब दर्द था. वो बोली. मेरा नाम नैना ही है. नैना माथुर... सिस्टर ऑफ सोहित माथुर....
प्रोफेसर कांप गयीं... उसने आगे कहा, “पूरी दुनिया आपका झूठ मान गई थी... कि मुर्तज़ा को भेड़ियों ने मारा... लेकिन मेरे भाई सोहित... उसे यकीन था कि कत्ल आपने किया है…और जानती हैं... सोहित अब कहाँ है… मुर्त़ज़ा की मौत के बाद... सोहित ने अपनी जान ले ली.... वो मर गया...मैंने उस दिन तय कर लिया था कि आपका पर्दाफाश करूंगी… क्योंकि आप टाइम ट्रैवल पर रिसर्च कर रही थीं तो मैंने आपकी ही रिसर्च से आपको जाल में फंसाने का प्लैन किया। मुर्तज़ा की मौत के बाद आप पर कोई एक्शन इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि मुर्तज़ा की लाश नहीं मिली थी... पर आपने कल मुझे बता दिया उसकी लाश पुरानी मज़ार के बगल में थी... हमें बॉडी मिल गयी है... सच सामने आ चुका है... एंड योर पर्फेक्ट क्राइम इज़ नो मोर परफेक्ट.. गुड बाय प्रोफेसर” कहते हुए नैना वहाँ से चली गई।

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हथकड़ियों में बंधी प्रोफेसर साहिबा को पुलिस गाड़ी में बैठाया गया और कुछ देर बाद कार प्रोफेसर धूल उड़ाती चली जा रही थी. और वहाँ से लाखों मील दूर एक सुनसान जंगल में एक पुरानी कब्र के बगल में खुदी हुई मिट्टी के किनारे एक फूल खिल आया था.

 

---- समाप्त ----

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