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स्टोरीबॉक्स

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स्टोरीबॉक्स (Story Box), आज तक रेडियो का एक प्रोग्राम है जिसमें कहानियां सुनाई जाती हैं (Story Box on Aaj Tak Radio). जमशेद कमर सिद्दीकी आज तक रेडियो के लिए एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. जमशेद आज तक रेडियो के लिए दैनिक और साप्ताहिक पॉडकास्ट का ध्यान रखते हैं. उनको लगभग सभी रेडियो स्टेशनों के लिए रेडियो कहानी लेखन का अनुभव है (Jamshed Qamar Siddiqui Aaj Tak Radio). 

स्टोरीबॉक्स पर सुनाई जाने वाली कहानियां अविश्वसनीय रूप से दिलचस्प रहती हैं. कहानियों को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि लोग खुद को कहानी का हिस्सा मानने लगते हैं. कहानियां आपको बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती हैं. कहानियां आपको और अधिक करने की चुनौती देती हैं. स्टोरीबॉक्स की कहानियां उन लोगों को प्रेरित करती हैं जो कम महसूस कर रहे हैं और जिनको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन की जरूरत है. ये कहानियां शिक्षा का एक शक्तिशाली संसाधन हैं, जिससे आप उनसे सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं. हम सभी के पास साझा करने के लिए एक कहानी है और हर कहानी मायने रखती है. इसी सोच के साथ आज तक रेडियो का स्टोरीबॉक्स प्रग्राम तैयार किया जाता है (Story on Story Box).

स्टोरीबॉक्स जीवन के सभी क्षेत्रों और अनुभवों के लोगों की कहानियों को अनबॉक्स करती है ताकि किसी को भी उनकी कहानियों को सुनने का मौका मिल सके ताकि वे अपने होने का महत्व समझ सकें और जीवन में अपनी सबसे बड़ी क्षमता तक पहुंच सकें (Story Box Podcast).

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स्टोरीबॉक्स न्यूज़

  • कहानी : लखनऊ वाले वकील साहब | STORYBOX WITH JAMSHED

    लखनऊ में एक थे वकील साहब जो बड़े उर्दू दां थे। उन्हें उर्दू से इस क़दर इश्क़ था कि किसी को ग़लत उर्दू बोलते सुन लें तो फौरन टोक देते थे पर क्या हुआ जब उनकी इकलौती बेटी इरम को इश्क़ हो गया एक ऐसे रीलबाज़ लड़के से जो शक्कर को भी सक्कर बोलता था और लखनऊ को नखलऊ, सुनिये स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से उन्हीं की लिखी कहानी 'लखनऊ वाले वकील साहब'

  • कहानी : हमशक्ल | STORYBOX WITH JAMSHED

    कैसा हो अगर कभी कहीं घूमते हुए किसी सुनसान जगह पर आपको मिल जाए आपका एक 'हमशक्ल' जिसकी आवाज़ भी आपकी जैसी ही हो. बातचीत में पता चलता है कि उसका और आपका शहर भी एक ही है और उसकी जेब में उतने ही पैसे जितने आपके हैं. आप की पहली प्रेमिका के नाम से लेकर, कॉलेज में आए नंबर तक सब कुछ एक जैसा है... ऐसे में क्या आप जानना चाहेंगे कि ये अजनबी कौन है और आप दोनों के बीच इतनी समानताएं क्यों हैं? कहीं ये कोई साज़िश तो नहीं, जो कहानी को क़त्ल तक ले जाती है… सुनिये सत्यजीत रे की लिखी थ्रिलर कहानी 'हमशक्ल' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • दस पैसे और दादी | गुलज़ार की कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    सिर्फ़ दस पैसे के लिए दादी से लड़ाई करके घर से भागा 'चक्कू' गुस्से में रेलवे स्टेशन पहुंच गया और चलती ट्रेन में बैठ गया, लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद उसने देखी एक दूसरी दुनिया जहां गरीबी थी, दर्द था और थी एक लावारिस लाश. सुनिए गुलज़ार की लिखी कहानी 'दस पैसे और दादी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal

  • दस पैसे और दादी | गुलज़ार | STORYBOX WITH JAMSHED

    सिर्फ दस पैसे के लिए दादी से लड़ाई करके घर से भागा 'चक्कू' गुस्से में रेलवे स्टेशन पहुंच गया और चलती ट्रेन में बैठ गया लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद उसने देखी एक दूसरी दुनिया जहां गरीबी थी, दर्द था और थी एक लावारिस लाश - सुनिये गुलज़ार की लिखी कहानी 'दस पैसे और दादी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से

  • कहानी - क्या मंटो फ्रेंच कहानियों से आइडिया चुराते थे? STORYBOX WITH JAMSHED

    क्या 'नफ़ासत हसन' नाम का कैरेक्टर दरअसल सआदत हसन मंटो पर ही लिख गया था? क्या देवेंद्र सत्यार्थी ने शरारत करते हुए अपने दोस्त के बारे में दिखाया कि वो फ्रैंच राइटरों के मशहूर जुमलों को चुराकर अपनी कहानियों में डालता है? सुनिये मंटो की देवेंद्र पर लिखी कहानी के बाद देवेंद्र सत्यार्थी का जवाब, सुनिये स्टोरीबॉक्स के 'मंटो V/s सत्यार्थी' सीरीज़ की दूसरी और आख़िरी कहानी में, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी | मुशायरे में भैंस | Storybox with Jamshed

    हकीम अहसानुल्लाह साहब के पास एक ऐसा नुस्खा था जिसके बारे में कहा जाता था कि बेऔलाद लोग अगर पान में दबाकर खा लें तो औलाद हो जाती है. शायरी के शौकीन हकीम साहब जब मुशायरे में पहुंचते तो देखते कि लोग वहां अपनी भैंस लेकर आए होते थे कि हकीम साहब एक पान इसे भी खिला दें - सुनिये मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी की एक तहरीर 'धीरजगंज का मुशायरा' का एक हिस्सा स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी : दिल आज शायर है | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    वो शायर था लेकिन उसका काम कब्रें खोदना था. वो उसी कब्रिस्तान में रहता था जहां काम करते हुए उसके बाप ने उसे शायरी भी सिखाई और कब्र खोदना भी ... वही बाप जिनके साथ हुए हादसे को वो भूलने की कोशिश कर रहा था लेकिन तभी उसकी एक रोज़ कब्रिस्तान के दरवाज़े पर एक खूबसूरत चेहरा दिखाई दिया और फिर सब कुछ बदल गया - सुनिये कहानी 'दिल आज शायर है' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी : किराए का मकान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    उन्हें किराए का मकान चाहिए था लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं था. उनकी भाषा भी अलग थी और कपड़े भी कुछ अलग परिवेश के थे पर उनकी एक कहानी थी. एक उदास कहानी जो उन्होंने बताई तो मैं ना नहीं कर पाया लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे उनकी ख़ौफनाक सच्चाई पता चली... सुनिये कहानी 'किराए का मकान' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी | साग मीट | भीष्म साहनी

    "मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हो। आज के जमाने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता. मैं ताले तो नहीं लगा सकती. यह दूसरा नौकर मथरा सात रोटियाँ सवेरे और सात रोटियाँ गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वह भी इसे दो. लेकिन मैं कहती हूँ, “ठीक है, कम से कम टिका तो है, भई आजकल किसी नौकर का भरोसा थोड़ी है। कब कह दे - मैं जा रहा हूँ” ये भी मुझे यही कहते हैं,कुत्ते के मुँह में हड्डी दिए रहो तो नहीं भौंकेगा" - सुनिये भीष्म साहनी की मशहूर कहानी 'साग मीट' स्टोरीबॉक्स में @Jamshedhumd से

  • कहानी : एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था. लेकिन तभी पुलिस की तरफ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं, सभी लोग होशियार रहें. उन दिनों मैं एक कैफे में सिक्योरिटी ऑफिसर के तौर पर काम था. मैं अपनी ड्यूटी कर रहा था कि तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो जश्न मना रहे लोगों को घूर रहा था... कौन था वो आदमी? उसके इरादे क्या थे... सुनिये स्टोरीबॉक्स में कहानी 'एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी : मजाज़, एक शायर अधूरे ख़्वाबों का | Storybox with Jamshed

    एक शायर था जिसकी तस्वीरें गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों की तकियों के नीचे मिलती थी... जो इश्क़ भी लिखता था और इंकलाब भी... लेकिन उसके हिस्से आई ज़िंदगी की मायूसी, अधूरी मुहब्बत और एक दर्दनाक मौत... सुनिये स्टोरीबॉक्स में इस हफ्ते कहानी उर्दू शायर मजाज़ लखनवी की जमशेद क़मर सिद्दीकी से

  • कहानी : एक सुपर हीरो की कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    सुपरहीरो वो नहीं जो आसमान में उड़ते हैं, बिल्डिंग्स से लटकते हैं, विलेंस को मारते हैं -सुपरहीरो वो होते हैं जो ज़िंदगी की तकलीफों, दूरियों और ग़म के बीच कुछ ऐसा कर जाते हैं कि दुनिया उन्हें याद रखती है. ये कहानी है कारगिल के एक ऐसे ही हीरो की. जमशेद क़मर सिद्दीक़ी स्टोरीबॉक्स में सुना रहे हैं 'एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी'

  • आधी रात की ख़ामोशी | Horror Kahaani | Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

    रात के ख़ामोश पहर में उस घर में जहां मैं अकेले रहता था, दूसरे कमरे से वो आवाज़ दरअसल कई दिनों से आ रही थी. रात की खामोशी को चीरती हुई वो आवाज़ हर रात मुझे परेशान करने लगी थी. किसकी थी वो आवाज़? और क्या थी उस आवाज़ की दर्दनाक कहानी - सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में कहानी 'आधी रात की ख़ामोशी'

  • कहानी : एक कागज़ का फूल | Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

    पांच साल के बाद वो अचानक दिखी एक अस्पताल में. ये वही लड़की थी जो हमेशा ब्रैंडेड कपड़े पहनती थी. महंगे शौक रखती थी लेकिन आज उसकी हालत ख़राब थी. कपड़े औसत, बाल बिखरे, चप्पलें घिसी हुई, चेहरे का रंग उड़ा और हाथ में मेडिकल रिपोर्ट्स. ये वही लड़की थी जिसने कभी मेरा इश्क़ ठुकराया था. सुनिये जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'एक कागज़ का फूल' स्टोरीबॉक्स में

  • कहानी| शायरी की बीमारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    आग़ा शिराज़ी साहब वैसे तो नेक आदमी थे लेकिन उनको एक बीमारी थी कि हर बात के लिए उनके पास चार शेर होते थे. अगर आप कभी कहें कि मुझे दिल का दौरा पड़ रहा है और मैं मरने वाला हूं एंबुलेंस बुला दीजिए तो कहेंगे "बुलाता हूं लेकिन पहले मौत पर चार शेर सुन लीजिए" - सुनिये एक सनकी शायर की मज़ेदार कहानी स्टोरीबॉक्स में

  • मुखर्जी बाबू की डायरी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद क़मर सिद्दीक़ी

    लंदन में रहने वाले मुखर्जी साहब के पास एक डायरी थी जिसमें उन तमाम ख़ूबसूरत औरतों के नाम थे जो उनसे पिछले 15 सालों में मिली थीं. जब भी उनके पास कुछ फ़ुर्सत होती तो डायरी खोलते और लाइन से लिखे नामों पर फोन करने लगते. उन्होंने नामों के आगे ये भी लिख रखा था कि आखिरी बार बात हुई थी तो क्या बात हुई थी. फोन करते ही उसी बात से बात शुरु करते ताकि लगे कि पुरानी जान पहचान है. उस रोज़ भी वो कोई खास मसरूफ़ नहीं थे - सुनिये कहानी 'मुखर्जी साहब की डायरी' STORYBOX में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी : मुझे मरे हुए लोग दिखते हैं | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद कमर सिद्दीक़ी

    वो सात साल का बच्चा स्कूल के अकेले कमरे में किससे बातें करता था? वो कौन था जो हमेशा उसके साथ रहता था लेकिन और किसी को दिखाई नहीं देता था? सुनिये कहानी 'मुझे मरे हुए लोग दिखते हैं' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से Disclaimer: ये कहानी पूरी तरह से मनोरंजन के लिए बनाई गयी है। हमारा मकसद किसी भी तरह से अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है।

  • कहानी : जिलानी साहब की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    जिलानी साहब के बेटे की सगाई में बड़ी दावत का इंतज़ाम था लेकिन ऐन वक्त पर जब लोग खाने का लुत्फ़ ले रहे थे तो पता चला कि कुछ लोग बिन बुलाए दावत में घुस आए हैं - कैसे पकड़ेंगे उन बिन बुलाए लोगों को जिलानी साहब - सुनिए स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • पहली सी मुहब्बत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    हम उस जेनरेशन से आते हैं जो इश्क़ करना फिल्मों से सीखती है जहां हर पल कुछ हो रहा होता है. कोई शरारत, कोई बात, कोई बातचीत. हम समझते हैं कि इश्क़ में ऐसा ही होता है और अगर ये नहीं है तो इश्क़ बोरिंग है लेकिन हकीकत ये है कि इश्क़ उन शादीशुदा पुराने लोगों के बीच भी होता है जो एक कमरे में बैठे बिना बात किये खामोशी से अपना अपना काम करते रहते हैं. उनका इश्क़ वक्त के साथ मैच्योर हो जाता है - सुनिये कहानी 'पहली सी मुहब्बत' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

  • कहानी | चलो एक बार फिर से | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

    दुनिया में औलाद और मां-बाप की ये कहानी हज़ारों बार दोहराई जा चुकी है पर ये कहानी है कि कभी पुरानी नहीं होती. ये कहानी तब तक दोहराई जाएगी जब तक औलादें उतनी मुहब्बत अपने मां-बाप से करना नहीं सीखेंगी. फिक्र मत करो, घर तुम्हारे नाम कर दिया है बेटा" - सुनिये उम्र के आखिरी मोड़ पर खड़े एक शख्स की आखिरी मुहब्बत और उसके बेटे की नाराज़गी की कहानी - चलो एक बार फिर से - स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से

  • कहानी | एक चुगलखोर की मौत | Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

    चुगलखोर चाचा जब मर कर दूसरी दुनिया में पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वो तो दोज़ख में भेज दिये गए हैं। वहां उन्होंने क्या किया कि उन्हें वापस जन्नत भेजा गया और आखिर क्यों उन्हें जन्नत रास नहीं आई - सुनिए पूरी कहानी स्टोरबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

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