Adopted Child Custody Case 2026: बच्चा गोद लेने के लिए लोगों को एक लंबा लेगल प्रोसेस करना पड़ता है, उसके बाद ही किसी शख्स को बच्चे की कस्टडी मिल पाती है. लेकिन अगर गोद लिए बच्चे के बड़े होने के बाद माता-पिता उसकी देखभाल नहीं कर पा रहे हों और उसके आक्रमक बर्ताव से उनको परिवार की सिक्योरिटी का डर सताने लगे. तो कानून का क्या कहता है. हाल ही में दिल्ली से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें साल 2018 को कानूनी प्रकिया से गोद लिए बच्चे से परेशान होकर मां अब उसे वापस सौंपने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची है.
गोद लिए बच्चे के आक्रामक व्यवहार की वजह से मां ने यह फैसला लिया है, इस मामले पर कोर्ट ने CARA और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी से पूछा है कि ऐसे मामले में बच्चे की देखभाल और सुरक्षित पुनर्वास के लिए कानून क्या कहता है.आइए जानते हैं कि बच्चा गोद लेने के कुछ साल बाद किसी कारण से उसकी कस्टडी वापस की जा सकती है या नहीं.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में नाबालिग की वापसी से संबंधित कानून पर बहुत कम उदाहरण मौजूद हैं. इस मामले में उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित बाल कल्याण अधिकारियों से जवाब मांगा है, क्योंकि एडॉप्शन के नियमों में एक बार कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को वापस करने का सीधा प्रावधान या साफ दिशा-निर्देश नहीं हैं.
इसके अलावा हाईकोर्ट ने लाजपत नगर स्थित कस्तूरबा निकेतन परिसर की बाल कल्याण समिति को भी नोटिस जारी कर पूछा कि क्या नाबालिग को परिसर में रखा जा सकता है. कोर्ट ने 30 सितंबर तक अधिकारियों को जवाब देने के लिए कहा है, उसके बाद ही कोर्ट इस मामले पर कोई फैसला लेगी.
क्यों बच्चा वापस करना चाहती है मां?
पिछले हफ्ते इस मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने एक महिला ने अपील दायर की. महिला ने कोर्ट को बताया कि उसके पति और उसने 2018 में CARA के तहत 6 साल के बच्चे को गोद लिया था, लेकिन कुछ समय बाद बच्चे के व्यवहार और मेंटल हेल्थ को लेकर कई समस्याएं सामने आईं. बच्चा बौद्धिक विकलांगता से पीड़ित है और शायद गोद लेने के समय ठीक से उसका चेकअप नहीं हुआ था या फिर डॉक्टर उसकी मेंटल हेल्थ के बारे में ठीक से पता नहीं लगा पाए थे.
बच्चा करता है आक्रामक व्यवहार
महिला के वकील अली बिन सैफ ने कोर्ट को बताया है कि बच्चे काफी आक्रामक व्यवहार करता है और चोरी जैसी समस्या भी सामने आई है. गोद लेने के बाद बच्चे को माता-पिता ने स्कूल डाला था, लेकिन वहां पर उसने एक बच्चे के साथ बहुत गलत और आक्रामक व्यवहार किया था, जिसके बाद उसको स्कूल से निकाल दिया गया था. बच्चे को उसके बर्ताव की वजह से कई स्कूलों से निकाला गया है और समय के साथ वो ज्यादा गुस्सैल हो रहा है.
3 महिलाएं कर रही हैं बच्चे की देखभाल
बच्चे को गोद लेने के 3 साल बाद ही महिला के पति का निधन हो गया था और उसके बाद से वो अपनी बुजुर्ग मां और बहन के साथ रह रही हैं. ऐसे में तीन महिलाएं बच्चे की देखभाल कर रही हैं और इस कारण उनको हमेशा यही डर सताता है कि अगर वो चोरी करने और गलत बर्ताव करने से बच्चे को रोकती हैं तो वो उनके साथ कुछ गलत कर सकता है.
महिला ने कोर्ट में अपनी याचिका में यह मांग की है कि बच्चे को किसी सरकारी या प्राईवेट संस्था या CARA को सौंप दी जाए, जो उसकी मेंटल हेल्थ का सही से इलाज करवा पाए. इतना ही नहीं महिला का कहना है कि वो अपनी क्षमता के हिसाब से बच्चे के इलाज का खर्च देने के लिए भी तैयार है.
बच्चा गोद लेने के नियम
सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी यानी CARA के तहत केवल लेगल फ्री घोषित बच्चों को ही गोद लिया जा सकता है. गोद लेने वाले माता-पिता का शारीरिक, मानसिक, इमोशनल और आर्थिक तौर पर सक्षम होना जरूरी है. साथ ही, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड या बाल अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं होना चाहिए.
बच्चा वापस लौटाने का कारण
स्क्रीनिंग के बावजूद कई बार माता-पिता बच्चों को वापस लौटा देते हैं. इसका अहम कारण माता-पिता और बच्चे के बीच इमोशनल कनेक्शन की कमी, अवास्तविक अपेक्षाएं या सही काउंसलिंग न मिलना होता है. कभी-कभी यह फैसला बच्चे की बेहतरी के लिए भी लिया जाता है. CARA के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 और 2019 के बीच 1,100 से ज्यादा गोद लिए गए बच्चों को उनके पेरेंट्स ने वापस कर दिया था.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क