वजन घटाने के लिए आजकल लोग सर्जरी से लेकर दवाइयों और इंजेक्शन का सहारा ले रहे हैं लेकिन कई बार वजन घटाने का तरीका जान को भी खतरे में डाल देता है. ऐसा ही हुआ कतर की एक महिला के साथ. इस महिला के पेट में वजन घटाने के लिए डाला गया बलून फट गया जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.
पेट में क्यों डाला गया था बलून
लोकल मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गैस्ट्रिक बैलून प्रॉसीजर के जरिए महिला के पेट में वजन घटाने वाला बैलून डाला गया था. लेकिन तीन दिन बाद ही वो फट गया. इसके बाद महिला की हालत खराब हो गई और उसे इंटेंसिव केयर में भर्ती कराना पड़ा.
इसके बाद उसे उस प्राइवेट हॉस्पिटल से, जहां प्रोसीजर हुआ था, वहां से हमद जनरल हॉस्पिटल में ट्रांसफर कर दिया गया. यहां इलाज के लिए उसे इंटेंसिव केयर यूनिट में भर्ती किया गया.
हालांकि ये मामले काफी दुर्लभ हैं लेकिन ये कोई पहली घटना नहीं है. इस घटना ने एक बार फिर वजन घटाने वाले प्रॉसिजर से जुड़ी दिक्कतों की तरफ इशारा किया है. साथ ही ये भी बताया है कि क्यों ऐसे प्रॉसिजर के लिए हमेशा स्पेशलाइज्ड मेडिकल सेंटर चुनना और अनुभवी मेडिकल टीमों की देखरेख जरूरी है.
यह घटना बात की तरफ भी ध्यान दिलाती है कि वजन घटाने वाले प्रॉसीजर करवाने का फैसला करने से पहले मरीजों को इस तरह के प्रॉसिजर से जुड़े जोखिमों और दिक्कतों की पूरी जानकारी दी जाए.
क्या होता है वेट लॉस बलून
गैस्ट्रिक बैलून एक अस्थायी और कम चीर-फाड़ वाला डिवाइस है जिसे पेट की क्षमता कम करने के लिए एंडोस्कोपी के जरिए या मुंह के जरिए पेट में डाला जाता है. सलाइन या गैस से भरा यह बैलून मरीजों को जल्दी पेट भरा हुआ महसूस करने में मदद करता है जिससे आमतौर पर 4 से 6 महीनों में औसतन 10 से 20 किलो वजन कम हो सकता है.
वेट लॉस के लिए पेट में डाला जाने वाला गैस्ट्रिक बैलून बहुत दुर्लभ मामलों में फट या लीक हो सकता है. लेकिन इसके फटने पर तेज पेट दर्द, उल्टी, या आंत में रुकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. सुरक्षा के लिए इसमें नीला रंग मिलाया जाता है जिससे पेशाब का रंग हरा होने पर मरीज को बलून फटने का पता लग जाता है और वो तुरंत अस्पताल जाकर अपना इलाज करना सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क