How To Make Organic Compost: रसोई में रोजाना फल-सब्जियों के छिलके, चायपत्ती, कॉफी के बचे हुए कण और सूखे पत्ते निकलते हैं. ज्यादातर सभी लोग इन्हें कचरा और बेकार समझकर सीधे कूड़ेदान में डाल देते हैं. आपके घर में भी ऐसा ही होता है? हां शायद होता हो, लेकिन अगर आप ये करते हैं तो रुक जाएं. आपकी रसोई से रोज निकलने वाला यही 'कचरा' आपके घर में लगे पौधों के लिए वरदान बन सकता है. अगर आपके घर में गमले या छोटा-सा किचन गार्डन है, तो इस 'कचरे' से आप ऑर्गेनिक खाद बना सकते हैं.
जी हां, इन घरेलू चीजों से आप बिना ज्यादा खर्च किए घर पर ही ऑर्गेनिक कम्पोस्ट तैयार कर सकते हैं. ये खाद मिट्टी को बेहतर बनाने के साथ पौधों को धीरे-धीरे पोषण देने में मदद करती है. यानी रसोई का कचरा कम होगा और पौधों की देखभाल का खर्च भी बच सकता है.
सबसे पहले इकट्ठा करें ये चीजें
ऑर्गेनिक खाद बनाने के लिए आपको कोई खास सामान खरीदने की जरूरत नहीं है. घर से निकलने वाले कई तरह के ऑर्गेनिक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आप केले, सेब, संतरे जैसे फलों के छिलके, सब्जियों के छिलके और बचे हुए टुकड़े, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती, कॉफी ग्राउंड्स और सूखे पत्ते जमा कर सकते हैं. कागज की कुछ सूखी लेयर्स भी इसमें काम आ सकती हैं.
बाल्टी या पुराने ड्रम में बनाएं कम्पोस्ट
इसके लिए आप पुरानी बाल्टी, ड्रम या किसी कम्पोस्ट बिन का इस्तेमाल कर सकते हैं. कंटेनर के नीचे के हिस्से में सूखे पत्तों या सूखे कागज की एक लेयर बिछा दें. अब इसके ऊपर रसोई से जमा किया हुआ गीला कचरा डालें. इसके बाद फिर से सूखे पत्तों या सारे सूखे इंग्रेडिएंट्स की एक लेयर डालें. इसी तरह गीले और सूखे इंग्रेडिएंट्स की लेयर्स बनाते रहें.
खाद को सिर्फ भरकर छोड़ना नहीं है
कम्पोस्ट तैयार होने के लिए इसमें थोड़ी नमी जरूरी होती है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा गीला भी नहीं करना चाहिए. समय-समय पर डिब्बे के अंदर के सभी इंग्रेडिएंट्स को हल्का-सा पलटते या हिलाते रहें. ऐसा करने से अंदर हवा पहुंचती रहती है और ऑर्गेनिक कचरा धीरे-धीरे टूटकर कम्पोस्ट में बदलने लगता है. मौसम और कंडीशन के हिसाब से इसमें कुछ हफ्ते से लेकर कुछ महीने तक लग सकते हैं.
हर तरह का रसोई का कचरा इसमें न डालें
ये गलती बिल्कुल न करें कि रसोई से निकलने वाली हर चीज कम्पोस्ट में डाल दें. मांस, मछली, डेयरी प्रोडक्ट्स, तेल या बहुत ज्यादा चिकनाई वाला खाना इसमें डालने से बदबू और कीड़ों की समस्या हो सकती है. प्लास्टिक, कांच और ऐसी चीजें भी कम्पोस्ट में नहीं डालनी चाहिए जो आसानी से ऑर्नेंगिक रूप से गलती नहीं हैं.
कैसे पहचाने की खाद तैयार हो गई है?
जब कम्पोस्ट अच्छी तरह तैयार हो जाती है तो उसका कलर आमतौर पर डार्क ब्राउन और टेक्शचर भुरभुरा हो जाता है. इसमें इस्तेमाल की गई चीजें पहले जैसी साफ नजर नहीं आतीं. ऐसी तैयार खाद को गमलों की मिट्टी में मिलाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल फूलों वाले पौधों, सब्जियों और किचन गार्डन में भी किया जा सकता है.
पौधों के लिए क्यों फायदेमंद है ये खाद?
घर की बनी कम्पोस्ट मिट्टी की क्वालिटी सुधारने में मदद करती है. ये मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ा सकती है और पौधों की जड़ों के लिए बेहतर कंडीशन तैयार करती है. इसका एक फायदा ये भी है कि ऑर्गेनिक खाद पौधों को पोषण धीरे-धीरे देती है. नियमित इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बेहतर रखने में मदद मिल सकती है और केनिकल फर्टिलाइजर्स पर निर्भरता भी कम की जा सकती है.
कचरा नहीं, पौधों का 'खजाना' समझें
अगली बार फल-सब्जियों के छिलके या चायपत्ती कूड़ेदान में डालने से पहले एक बार जरूर सोचें. थोड़ी सी मेहनत से यही घरेलू कचरा आपके गमलों के लिए काम की ऑर्गेनिक खाद बन सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क