Dharwad Peda Recipe: भारत के अलग-अलग हिस्सों की मिठाइयों की अपनी खास पहचान है. मथुरा का पेड़ा तो आपने खूब खाया होगा और उसके बारे में सुना होगा. लेकिन क्या आपने कभी धारवाड़ पेड़ा मिठाई खाई है, जो कर्नाटक के धारवाड़ शहर की पहचान मानी जाती है. यह ₹600 से ₹800 प्रति किलोग्राम बाजार में बिकती है, मगर आप इसे आसानी से अपने घर पर बना सकते हैं. जिसका स्वाद बिल्कुल मार्केट जैसा ही होगा.
दूध और चीनी से बनने वाली यह मिठाई अपने हल्के भूरे रंग, दानेदार टेक्सचर और कैरेमल जैसी खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है. कर्नाटक पर्यटन के अनुसार, धारवाड़ पेड़े का इतिहास 175 साल से भी ज्यादा पुराना है और इसे GI टैग भी मिला हुआ है.
175 साल पुराना है धारवाड़ पेड़े का इतिहास
धारवाड़ पेड़े की कहानी काफी पॉपुलर है, माना जाता है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव से राम रतन सिंह ठाकुर नाम के एक हलवाई धारवाड़ पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने दूध से पेड़ा बनाकर स्थानीय स्तर पर बेचना शुरू किया. समय के साथ यह मिठाई इतनी फेमस हुई कि इसकी पहचान ही धारवाड़ शहर से जुड़ गई.
बाद में इस मिठाई ने धारवाड़ में अपनी अलग पहचान बनाई और इसे कभी-कभी लाइन बाजार पेड़ा के नाम से भी जाना गया. आज धारवाड़ पेड़ा कर्नाटक की प्रमुख पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है. इसे GI टैग भी मिला हुआ है, जो इसकी पॉपुलैरिटी को दिखाता है.
घर पर कैसे बनाएं धारवाड़ पेड़ा?
धारवाड़ पेड़े का असली स्वाद लंबे समय तक दूध को पकाने से आता है. घर पर इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती. थोड़े धैर्य के साथ आप इसे आसानी से तैयार कर सकते हैं.
धारवाड़ पेड़े के लिए सामग्री
बनाने का तरीका
धारवाड़ पेड़े की खासियत क्या है?
धारवाड़ पेड़े को दूसरे पेड़ों से अलग बनाता है इसका हल्का कैरेमलाइज्ड स्वाद और दानेदार टेक्सचर. इसे बनाने में दूध को धीरे-धीरे पकाया जाता है, जिससे दूध के ठोस हिस्से का रंग बदलने लगता है और मिठाई को खास स्वाद मिलता है. यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है और आप भी सावन के मौके पर घर पर ही बाजार जैसा धारवाड़ पेड़े बना सकते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क