White Vs Yellow Potato: आलू लगभग हर भारतीय रसोई का हिस्सा है. कभी इसकी सब्जी बनती है, कभी पराठे, तो कभी फ्रेंच फ्राइज और चाट का स्वाद बढ़ाता है. ऐसे में आलू खूब खरीदने जाते हैं. आलू खरीदते समय क्या आप भी बस उसके दाम और शेप पर ध्यान देते हैं? अगर हां, तो अगली बार उससे थोड़ा आगे बढ़िए और बाकी चीजों पर भी गौर कीजिए. क्या आपने कभी गौर किया है कि एक ही आलू कभी उबलकर बिखर जाता है, तो कभी पकने के बाद भी बिल्कुल आकार में बना रहता है?
इसके पीछे आपके आलू को पकाने का तरीका नहीं, बल्कि उसकी किस्म भी जिम्मेदार होती है. बाजार में दो किस्मों के आलू आते हैं. एक सफेद होता है, वहीं एक पीले रंग का होता है. लेकिन दोनों का इस्तेमाल हर तरह की डिश के लिए एक जैसा नहीं होता. किसी आलू से फ्रेंच फ्राइज ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं, तो कोई सब्जी और सलाद के लिए बेहतर रहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि सफेद आलू और पीले आलू में आखिर क्या अंतर है और खाना पकाने के लिए इनमें से कौन-सा ज्यादा अच्छा है? चलिए जानते हैं कौन सा आलू खाना पकाने के लिए अच्छा रहता है.
सफेद और पीले आलू में आखिर फर्क क्या है?
आलू का रंग देखकर उसकी पूरी खासियत तय कर पाना मुश्कि है. असली फर्क आलू के रंग में नहीं, बल्कि उसकी किस्म, स्टार्च और नमी की मात्रा में होता है. यही चीज तय करती है कि पकाने के बाद आलू कैसा रहेगा.
जिन आलुओं में स्टार्च ज्यादा होता है, वो सफेद रंग के होते हैं. ये पकने के बाद ज्यादा सूखे, हल्के और फ्लफी हो जाते हैं. ऐसे आलू उन डिशेज के लिए अच्छे माने जाते हैं, जिनमें आलू को आसानी से मैश या नरम करना हो.
वहीं, पीले आलू ज्यादा क्रीमी-फर्म होते हैं और पकने के बाद भी अपनी शेप बनाए रखते हैं. इसलिए इन्हें उन डिशेज में इस्तेमाल करना अच्छा रहता है, जहां आलू के टुकड़े टूटने नहीं चाहिए या कहें आलू भुरभुरे ना हों.
फ्रेंच फ्राइज और मैश्ड पोटैटो के लिए कौन-सा आलू?
अगर आप क्रिस्पी फ्रेंच फ्राइज या हल्के और फ्लफी मैश्ड पोटैटो बनाना चाहते हैं, तो ज्यादा स्टार्च वाला आलू बेहतर ऑप्शन हो सकता है. ऐसे आलू बाहर से अच्छी तरह क्रिस्पी और अंदर से नरम बन सकते हैं. वहीं, मैश्ड पोटैटो में भी ये आसानी से टूटकर एक स्मूद और हल्की शेप देने में मदद करते हैं.
सब्जी, स्टू या सलाद के लिए पीला आलू क्यों बेहतर?
अगर आप आलू को उबालकर सलाद, स्टू या सूप में डाल रहे हैं, तो ऐसा आलू चुनना बेहतर है जो जल्दी टूटे नहीं. फर्म टेक्शचर वाले पीले आलू पकने के बाद भी अपनी शेप बनाए रख सकते हैं. यही वजह है कि आलू की सलाद, स्टू, उबले आलू और कुछ ग्रैटिन जैसी डिशेज में इनका इस्तेमाल अच्छा रहता है.
उबालते समय न करें ये गलती
आलू को सही किस्म का चुनना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही तरीके से पकाना भी है. खासकर उबालते समय आलू को जरूरत से ज्यादा पकाने से उसका पूरा टेक्शचर बिगड़ सकता है. इससे आलू जरूरत से ज्यादा पानी सोखकर बहुत नरम हो सकता है और टुकड़े टूटने लग सकते हैं. इसलिए आलू उबालते समय ठंडे पानी से शुरुआत करना और पकने का समय ध्यान में रखना बेहतर है.
सफेद या पीला, कौन सा आलू बेहतर?
आलू चुनते समय सिर्फ उसका रंग देखकर फैसला न करें. पहले यह तय करें कि आपको उससे क्या बनाना है. फ्राइज, मैश्ड या बेक्ड पोटैटो के लिए ज्यादा स्टार्च वाला यानी सफेद रंग का आलू चुनें.
आलू सलाद, स्टू या उबले आलू के लिए ऐसा आलू चुनें, जिसका रंग थोड़ा पीला हो. ये सख्त होते हैं, जो पकने के बाद भी शेप में बने रहते हैं.
यानी सही सवाल ये नहीं है कि सफेद आलू बेहतर है या पीला, बल्कि ये है कि आप कौन-सी डिश बना रहे हैं और उसमें आलू का टेक्शचर कैसा चाहिए. सही किस्म चुनने से साधारण-सा आलू भी आपकी डिश का स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर कर सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क