पूरे दिनभर की थकान दूर करने के लिए इंसान रात में सुकून से सोना चाहता है. ऐसे में वह अपने बेडरूम का बेड ऐसा सलेक्ट करता है, जो बहुत ही कंफर्टेबल हो. लेकिन जैसे-जैसे लकड़ी का बेड पुराना होता है, वैसे-वैसे उसमें समस्याएं शुरू हो जाती हैं. कई बार रात में सोने के लिए बिस्तर पर लेटते ही लकड़ी का बेड चरमराने लगता है. उसमें से अजीब-अजीब सी आवाज आने लगती है. बेड के चरमराने के कारण तो कई बार अच्छी नींद लेना भी मुश्किल हो जाता है. करवट बदलने पर कभी हल्की तो कभी तेज आवाज आती है, जिससे बार-बार ध्यान उसी तरफ चला जाता है.
बेड की इस चरमराहट से परेशान होकर कुछ लोग नया बेड खरीदने की सोचने लगते हैं, तो कुछ को लगता है कि अब बढ़ई को बुलाना ही पड़ेगा. लेकिन हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं है. कई बार बेड के स्क्रू ढीले होने, लकड़ी के हिस्सों के आपस में रगड़ खाने या नीचे की पट्टियों के हिलने से यह परेशानी होती है. अगर आपके घर में भी लकड़ी का बेड आवाज कर रहा है, तो पहले उसकी वजह पता करें. कुछ आसान तरीकों से इस परेशानी को कम किया जा सकता है.
1. सबसे पहले पता करें आवाज कहां से आ रही है: बेड की चरमराहट बंद करने के लिए सबसे जरूरी है कि पहले ये देखा जाए कि आखिर आवाज आ कहां से रही है. इसके लिए गद्दे को हटाकर बेड के फ्रेम को अच्छी तरह देखें. हेडबोर्ड, फुटबोर्ड और दोनों तरफ की लकड़ी की रेल पर ध्यान दें. इन हिस्सों को जोड़ने वाले स्क्रू या बोल्ट ढीले होने पर लकड़ी हिल सकती है. जब बेड पर वजन पड़ता है, तो ये हिस्से आपस में रगड़ खाते हैं और आवाज आने लगती है.
2. बेड को हल्का हिलाकर करें चेक: कई बार देखने से यह पता नहीं चलता कि बेड में गड़बड़ी कहां है. ऐसे में बेड के अलग-अलग हिस्सों को हल्के हाथ से दबाकर या हिलाकर देखें. पहले हेडबोर्ड, फिर साइड फ्रेम और आखिर में फुटबोर्ड को चेक करें. जिस हिस्से को हिलाने पर चरमराहट सुनाई दे, वहां खास ध्यान दें. इससे आपको अंदाजा लग सकता है कि आवाज किसी ढीले जोड़ से आ रही है या लकड़ी के दो हिस्से आपस में रगड़ खा रहे हैं.
3. ढीले स्क्रू और बोल्ट को कस दें: अगर बेड के किसी जोड़ से आवाज आ रही है, तो वहां लगे स्क्रू और बोल्ट को चेक करें. कई बार लगातार इस्तेमाल करने से ये धीरे-धीरे ढीले हो जाते हैं. ऐसे में सही स्क्रूड्राइवर की मदद से स्क्रू कसने और बोल्ट को ठीक से टाइट करने पर आवाज कम हो सकती है. हालांकि, स्क्रू को जरूरत से ज्यादा कसने से बचें. इससे लकड़ी को नुकसान पहुंच सकता है या स्क्रू लगाने वाली जगह और ढीली हो सकती है.
4. बेड के बीच वाली पट्टियों को चेक करना ना भूलें: लकड़ी के बेड में गद्दे के नीचे कई पट्टियां लगी होती हैं, जिन्हें स्लैट्स कहा जाता है. इनके अलावा बीच में वजन संभालने के लिए सेंटर सपोर्ट भी दिया जा सकता है. अगर ये पट्टियां अपनी जगह से खिसक गई हैं या फ्रेम से रगड़ खा रही हैं, तो करवट बदलने पर आवाज आ सकती है. इसलिए सभी पट्टियों को चेक करें और देखें कि वे अपनी सही जगह पर लगी हैं या नहीं. अगर कोई पट्टी टूटी हुई है या सेंटर सपोर्ट कमजोर हो गया है, तो उसे रिपेयर करवाना जरूरी है.
5. लकड़ी की रगड़ रोकने के लिए अपनाएं यह तरीका: कई बार बेड के स्क्रू बिल्कुल ठीक होते हैं, लेकिन फिर भी आवाज आती है. इसकी वजह लकड़ी के दो हिस्सों का आपस में रगड़ खाना हो सकती है. मौसम में बदलाव और नमी के कारण लकड़ी थोड़ी फैल या सिकुड़ सकती है, जिससे जोड़ की फिटिंग बदल जाती है.
अगर आवाज लकड़ी के हिस्सों की रगड़ से आ रही है, तो फर्नीचर के लिए वैक्स या फ्रिक्शन कम करने वाला कोई प्रोडक्ट इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसे लगाने से पहले ये जरूर देख लें कि वो बेड की पॉलिश और लकड़ी के लिए ठीक है या नहीं. गलत प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से लकड़ी की फिनिश खराब हो सकती है.
6. पट्टियों के नीचे लगाएं पतले पैड: अगर गद्दे के नीचे लगी लकड़ी की पट्टियां फ्रेम से टकराकर आवाज कर रही हैं, तो उनके बीच पतली फेल्ट या फर्नीचर पैड लगा दें. इससे लकड़ी आपस में नहीं रगड़ेगी और आवाज कम हो सकती है. ध्यान रखें कि पैड ज्यादा मोटा न हो, वरना पट्टियां अपनी जगह से ऊपर उठ सकती हैं और बेड हिलने लग सकता है.
7. गद्दे में भी हो सकती है गड़बड़ी: हर बार आवाज बेड के फ्रेम से ही नहीं आती. कई बार गद्दे के अंदर लगे स्प्रिंग या उसके दूसरे हिस्सों से भी चरमराने जैसी आवाज आ सकती है. ऐसे में गद्दे को हटाकर बेड को अलग से चेक करें. अगर फ्रेम से कोई आवाज नहीं आती, तो गद्दे को दोबारा सही तरीके से रखकर देखें. अगर आवाज गद्दे से आ रही है, तो बेड के स्क्रू कसने से समस्या दूर नहीं होगी.
8. बेड के पैरों और फर्श को भी करें चेक: अगर बेड का फ्रेम और उसके जोड़ ठीक हैं, तो उसके पैरों पर ध्यान दें. कभी-कभी बेड के पैर फर्श पर ठीक से टिके नहीं होते या फर्श थोड़ा ऊबड़-खाबड़ होता है. ऐसे में बेड पर वजन पड़ने के साथ वो हल्का हिलता है और आवाज आने लगती है. बेड के सभी पैरों की कंडीशन भी चेक करें. जरूरत पड़ने पर पैरों के नीचे फेल्ट या नॉन-स्लिप पैड लगा सकते हैं. इससे बेड का हिलना कम करने में मदद मिल सकती है.
कब बुलाएं बढ़ई?
अगर बेड की लकड़ी टूट गई है, जोड़ बहुत कमजोर हो गए हैं, स्क्रू बार-बार ढीले हो रहे हैं या बीच का सपोर्ट वजन नहीं संभाल पा रहा है, तो खुद से रिपेयर करने के बजाय बढ़ई की मदद लें. खासकर अगर बेड पर बैठने या लेटने पर वो ज्यादा हिलता है, तो इस्तेमाल जारी रखने से पहले उसकी मजबूती केर करवा लें. इससे बेड को और नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क