जब हम किसी करोड़पति या फिर कहें अमीर इंसान का घर देखते हैं तो अक्सर उन सभी के घरों में एक बात बहुत कॉमन होती है और वो है कि इतना बड़ा होने के बाद भी उसमें सामान बहुत कम रखा होता है. घर बड़ा और शानदार होने के बावजूद वहां सामान कम ही होता है और ये किसी एक के घर की बात नहीं है, बल्कि सभी अमीर लोगों के घरों का नजारा कुछ ऐसा ही होता है. न हर कोने में फर्नीचर, न अलमारियों में जरूरत से ज्यादा चीजें और न ही घर का हर हिस्सा सामान से भरा हुआ. इसके मुकाबले अगर आप किसी मिडिल क्लास फैमिली के घर में जाते हैं तो देखेंगे कि छोटा घर होने के बावजूद हर कोना भरा नजर आएगा.
ऐसे में सवाल उठता है कि जब अमीर लोगों के पास पैसे की कमी नहीं है, तो फिर वो घर को अपनी पसंद की हर चीज से भर क्यों नहीं देते? अमीरों और मिडिल क्लास फैमिलीज के घरों में आखिर इतना अंतर क्यों होता है. इसका जवाब सिर्फ घर सजाने के लिए उनके टेस्ट, मिनिमल इंटीरियर या दिखावे से जुड़ा नहीं है. इसके पीछे पैसे और भविष्य को देखने का एक अलग नजरिया भी हो सकता है. इसे 'Abundance Mindset' यानी भरपूरता वाली सोच कहा जाता है. इसमें लोग चीजों को इस डर से संभालकर रखते हैं कि आगे कभी जरूरत पड़ सकती है. उन्हें भरोसा होता है कि जरूरत होने पर वे चीजें फिर से काम आ जाएंगी. हालांकि, अक्सर ऐसा होता नहीं है. घर में सालों से कई चीजें रखी होती हैं लेकिन उनका कोई इस्तेमाल हो ही नहीं पाता है.
पैसे कम हों तो हर चीज संभालकर रखने लगते हैं
जब किसी इंसान के पास पैसों की कमी हो या फिर उसके दिमाग में डर हो कि भविष्य में उसके पास पैसा होगा या नहीं तो छोटी-छोटी चीजें भी जरूरी लगने लगती हैं. घर में पुराना सामान पड़ा है तो लगता है कि कभी न कभी काम आ जाएगा. पुराने कपड़े नहीं पहनते, फिर भी उन्हें फेंकने का मन नहीं करता. रसोई की कोई चीज महीनों से इस्तेमाल नहीं हुई, फिर भी लगता है कि इसे रख लेते हैं, आगे जरूरत पड़ सकती है.
धीरे-धीरे यही सोच घर में सामान बढ़ाती जाती है. चीजों को फेंकना नुकसान जैसा लगने लगता है और उन्हें संभालकर रखना ज्यादा सुरक्षित लगता है. इसलिए ही मिडिल क्लास फैमिली के घरों में जगह कम होने के बावजूद सामान ज्यादा होता है.
'पता नहीं आगे क्या होगा' वाली सोच बढ़ाती है सामान
इसे Scarcity यानी अभाव का डर कहा जा सकता है. जब मन में ये डर रहता है कि आगे पैसे कम पड़ सकते हैं या कोई चीज दोबारा खरीदना मुश्किल हो सकता है, तो गैरजरूरी सामान भी घर में रखा रहने लगता है. यानी कई बार हम किसी चीज को उसकी जरूरत की वजह से नहीं, बल्कि इस डर से संभालकर रखते हैं कि अगर आगे जरूरत पड़ गई तो क्या होगा?
ज्यादा पैसे नहीं, चीजों को लेकर भरोसा जरूरी
इसके उलट Abundance Mindset का मतलब ये नहीं है कि इंसान के पास बहुत पैसा हो और वो जो चाहे खरीद सके. इसका मतलब चीजों और भविष्य को लेकर एक तरह का भरोसा होना है. ऐसी सोच में इंसान मानता है कि अगर आगे किसी चीज की सच में जरूरत पड़ी, तो उसे दोबारा आराम से बिना किसी टेंशन के खरीदा जा सकता है. इसलिए हर सामान को ये सोचकर रखने की जरूरत महसूस नहीं होती कि 'कभी काम आ सकता है.'
यही वजह है कि अमीरों के बड़े घरों में भी बहुत कम सामान दिखाई देता है. वहां खाली जगह को कमी नहीं, बल्कि सुकून और खुलापन माना जाता है.
घर का हर सामान सिर्फ जगह नहीं घेरता
किसी सामान की कीमत सिर्फ उतने पैसों से तय नहीं होती, जितने में उसे खरीदा गया था. उसे घर में रखने के लिए जगह चाहिए, उसकी सफाई करनी पड़ती है और कई बार उसका रखरखाव भी करना पड़ता है.
अगर कोई चीज इस्तेमाल ही नहीं होती, लेकिन फिर भी उसे बार-बार साफ करना, इधर-उधर रखना या संभालना पड़ता है, तो वो आपका समय और एनर्जी भी ले रही है. इसलिए कम सामान रखने का मतलब हमेशा कम खर्च करना नहीं होता. कई बार इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि जो चीज काम की नहीं है, उसे सिर्फ इसलिए क्यों रखें क्योंकि कभी उसे खरीदा था.
खाली घर का मतलब हमेशा 'कम' नहीं होता
किसी बड़े घर में कम सामान देखकर हमें लग सकता है कि घर खाली या अधूरा है. लेकिन वहां रहने वाले के लिए वही खाली जगह आराम और शांति की वजह हो सकती है. जब इंसान भविष्य के डर से हर चीज को संभालकर रखना कम करता है, तो घर में भी जगह बनती है और दिमाग में भी.
असली अमीरी सिर्फ सामान की गिनती नहीं
Abundance Mindset की सबसे खास बात यही है कि इसका मतलब सिर्फ बैंक बैलेंस या ज्यादा पैसा होना नहीं है. ये इस भरोसे से जुड़ा है कि आगे आने वाली जरूरतों को संभाला जा सकता है. इसलिए कभी-कभी करोड़ों के घर में भी बहुत कम सामान दिखाई देता है. इसका मतलब ये नहीं कि वहां रहने वाले के पास चीजें खरीदने के पैसे नहीं हैं. बल्कि वो हर चीज को खरीदना या संभालकर रखना जरूरी नहीं समझता.
यानी घर में कम सामान होना हमेशा कमी की निशानी नहीं है. कई बार इसका मतलब होता है कि इंसान को हर चीज संभालकर रखने या जमा करने की जरूरत महसूस नहीं होती.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क